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प्रधानमंत्री मोदी की अपील

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 23, 2026
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दीपक द्विवेदी एडीटर-इन-चीफ

अगर प्रधानमंत्री की अपील हमने मान ली तो हम महंगाई से बच जाएंगे। वैसे यह कोई पहला अवसर नहीं है जब किसी प्रधानमंत्री ने देशवासियों से मितव्ययिता बरतने की अपील की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11-12 मई 2026 को विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए देशवासियों से एक वर्ष तक सोने की खरीद कम करने, पेट्रोल-डीजल के उपयोग में कटौती करने और वर्क फ्रॉम होम जैसे सात उपायों को प्राथमिकता देने की अपील की है। ध्यान रहे देश में सोने की खरीद विदेशी मुद्रा पर स्थायी बोझ है और भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है। इस पहल का उद्देश्य, विशेष रूप से पश्चिम एशिया के मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण, आयात पर निर्भरता कम करके विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को नियंत्रित करना है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण उपजे होर्मुज स्ट्रेट संकट का वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर गहरा और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ रहा है और यह तमाम देशों में मुद्रास्फीति, उत्पादन और वृद्धि पर भी असर डाल रहा है। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह संकट कब तक जारी रहेगा पर यह बात सराहनीय है कि केंद्र सरकार इस खतरे को गंभीरतापूर्वक ले रही है। विशेष तौर पर वह खतरा जो व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए मुंह बाये खड़ा है। जब कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं; तो भारत विशेष रूप से अपने बाहरी खाते पर दबावों को लेकर संवेदनशील हो जाता है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के महत्व पर सावधानीपूर्वक जोर दिया। उन्होंने इसे राष्ट्र के लिए सात अपीलों के रूप में प्रस्तुत किया। इनमें विदेश यात्रा को कम से कम करना, खाना पकाने में तेल की मात्रा कम करना और पेट्रोल व डीजल की खपत घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना मुख्य रूप से शामिल हैं।

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प्रधानमंत्री ने किसानों से भी फर्टिलाइजर का कम से कम उपयोग करने का आह्वान किया है जो आयातित उत्पादों पर निर्भर हैं। सरकार के प्रयास सराहनीय हैं और जो भी निर्देश दिए गए हैं, वे मूल्यवान हैं। यदि सरकार बदली हुई आपूर्ति स्थिति के जवाब में कीमतों को शीघ्रता से समायोजित करने की अनुमति देती है तो लोग स्वतः ही उसका पालन करेंगे, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। अब जबकि सरकार इसे स्पष्ट संकट मान रही है तो ऐसे संकट के समय में कीमतों पर लगे इन प्रतिबंधों को अलग परिदृश्य में रख कर देखा जाना चाहिए। कच्चे माल के बढ़ते दामों के कारण एफएमसीजी कंपनियां भी रोजमर्रा के अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। विपक्षी दलों के कुछ लोग तो पहले से ही संकेत देने लगे हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई भी बदलाव राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा लेकिन इन बातों को नजरअंदाज करना चाहिए क्योंकि जनता कीमतों में वृद्धि के व्यापक वैश्विक संदर्भ को समझ सकती है। तेल कंपनियों को हर महीने 30,000 करोड़ रुपये की अंडर रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है और बिना कीमतें बढ़ाए इस संकट से लंबे समय तक नहीं निपटा जा सकता।

वैसे प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को जो सलाह दी है, उसकी चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। सर्वाधिक चर्चा एक साल तक सोना न खरीदने की सलाह को लेकर हो रही है। भारत में सोना केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक या सांस्कृतिक रूप से भी बहुत प्रचलित है तथा जीवन से जुड़े हर संस्कार में इसकी अहमियत है। भारत प्रति घंटे औसतन 80 किलोग्राम सोना खरीदता है और देश में खपत के लिए जरूरी 90 प्रतिशत सोना आयात करना पड़ता है जिसका भुगतान डॉलर में होता है। इसका सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। निस्संदेह, प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोने की खपत कम होगी तो देश को आर्थिक बल मिलेगा। प्रधानमंत्री ने घर से काम करने की प्रथा को पुनर्जीवित करने का आह्वान भी कंपनियों से किया है जिससे ईंन्धन की बचत होगी। यह देश की तरक्क ी को बनाए रखने की सामूहिक चिंता का समय है। अब तक भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल की कीमतों को बहुत हद तक संभाले रखा है जबकि दुनिया के ज्यादातर देशों में तेल के भाव में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। जब दुनिया महंगाई से जूझ रही है, तेल का अभाव है, अनेक देशों में पहले से ही वर्क फ्रॉम होम चल रहा है तो इसे पुनः शुरू करने में क्या हर्ज है। कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम जान बचाने के लिए किया गया तो अब संभावित आर्थिक मंदी और महंगाई से बचने के लिए ऐसा करने की अपील प्रधानमंत्री ने की है। अगर प्रधानमंत्री की अपील हमने मान ली तो हम महंगाई से बच जाएंगे। वैसे यह कोई पहला अवसर नहीं है जब किसी प्रधानमंत्री ने देशवासियों से मितव्ययिता बरतने की अपील की है।

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