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यूरोपीय संघ का कार्बन कर शुरू, भारत को होगा नुकसान

- इस्पात, एल्युमीनियम निर्यातकों को घटाने पड़ सकते हैं मूल्य

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 10, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। यूरोपीय संघ (ईयू) का कुछ धातुओं पर कार्बन कर (सीबीएएम) एक जनवरी से लागू हो गया है। इससे भारत के इस्पात एवं एल्युमीनियम निर्यात को झटका लग सकता है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने यह जानकारी दी।

फर्नेस यूरोपीय संघ के 27 देशों का समूह उन वस्तुओं पर वह कर लगा रहा है जिनके निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन होता है। इस्पात क्षेत्र में ब्लास्ट फर्नेसबेसिक आक्सीजन (बीएफबीओएफ) मार्ग में उत्सर्जन सबसे अधिक होता है जबकि गैस आधारित डीआरआई में यह कम तथा कबाड़ (स्क्रैप) आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) में सबसे कम होता है। इसी तरह एल्युमीनियम में बिजली का स्रोत एवं ऊर्जा की खपत अहम भूमिका निभाती है। कोयले से उत्पादित बिजली से कार्बन बोझ बढ़ता है जिससे सीबीएएम लागत भी अधिक होती है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, कई भारतीय निर्यातकों को कीमतों में 15 से 22 फीसद तक की कटौती करनी पड़ सकती है ताकि ईयू के आयातक उसी मुनाफे (मार्जिन) से सीबीएएम कर का भुगतान कर सकें। भारतीय निर्यातकों को सीधे तौर पर कर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा क्योंकि यूरोपीय संघ स्थित आयातकों (जो अधिकृत सीबीएएम घोषणाकर्ता के रूप में पंजीकृत हैं) को आयातित वस्तुओं में निहित उत्सर्जन से संबंधित सीबीएएम प्रमाणपत्र खरीदने होंगे। इसका भार अंततः भारतीय निर्यातकों पर पड़ेगा।

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आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, एक जनवरी 2026 से ईयू में प्रवेश करने वाली भारतीय इस्पात एवं एल्यूमीनियम की हर खेप पर कार्बन लागत जुड़ेगी क्योंकि सीबीएएम ‘रिपोर्टिंग’ चरण से भुगतान चरण में प्रवेश करेगा।’

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