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कोर्टों में महिलाओं, दिव्यांगों, ट्रांसजेंडरों के लिए अलग-अलग शौचालय हों

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 24, 2025
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। देश की अदालतों और ट्रिब्यूनलों में महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर के लिए शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी हाईकोर्ट चार महीने में दिशा-निर्देशों का पालन करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शौचालय/वाशरूम/रेस्टरूम केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि एक बुनियादी आवश्यकता है जो मानवाधिकारों का एक पहलू है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उचित स्वच्छता तक पहुंच को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, जो जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है।

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की अदालतों के लिए कहा, ‘हाईकोर्ट और राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश देश भर की सभी अदालत परिसरों और ट्रिब्यूनलों में पुरुषों, महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग-अलग शौचालय सुविधाओं का निर्माण और उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। हाईकोर्ट यह सुनिश्चित करेंगे कि ये सुविधाएं जजों, वकीलों, वादियों और अदालत कर्मचारियों के लिए स्पष्ट रूप से पहचान योग्य और सुलभ हों।’

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपर्युक्त उद्देश्य के लिए हर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। इसके सदस्य हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल /रजिस्ट्रार, मुख्य सचिव, लोक निर्माण सचिव और राज्य के वित्त सचिव, बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि और अन्य अधिकारी होंगे। यह समिति छह सप्ताह की अवधि के भीतर गठित की जाएगी। समिति एक व्यापक योजना बनाएगी, निम्नलिखित कार्य करेगी और उसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करेगी।

विशेष समिति के कार्य
औसतन प्रतिदिन अदालतों में आने वाले लोगों की संख्या का आंकड़ा रखना और यह सुनिश्चित करना कि पर्याप्त अलग- अलग शौचालय बनाए गए हैं और उनका रखरखाव किया गया है। • शौचालय सुविधाओं की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे में कमी और उनके रखरखाव के बारे में सर्वेक्षण करना, मौजूदा शौचालयों का सीमांकन करना और उपर्युक्त श्रेणियों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए मौजूदा शौचालयों को परिवर्तित करने की आवश्यकता का आकलन करना।

•नए शौचालयों के निर्माण के दौरान मोबाइल शौचालय जैसी वैकल्पिक सुविधाएं प्रदान करना, रेलवे की तरह न्यायालयों में पर्यावरण अनुकूल शौचालय (बायो-शौचालय) उपलब्ध कराना।

• महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए, कार्यात्मक सुविधाओं के साथ-साथ स्पष्ट संकेत और संकेत प्रदान करें, जैसे कि पानी, बिजली, संचालन फ्लश, हाथ साबुन, नैपकिन, टॉयलेट पेपर और अद्यतित प्लंबिंग सिस्टम का प्रावधान। विशेष रूप से, दिव्यांग व्यक्तियों के शौचालयों के लिए रैंप की स्थापना सुनिश्चित करना और यह सुनिश्चित करना कि शौचालय उन्हें समायोजित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

• मुंबई, कलकत्ता, चेन्नई आदि जैसे हेरिटेज कोर्ट रूम के संबंध में वास्तुशिल्प अखंडता को बनाए रखने के बारे में एक अध्ययन करें।

• शौचालय बनाने के लिए कम उपयोग किए गए स्थानों का उपयोग करके मौजूदा सुविधाओं के साथ काम करना, पुरानी एल प्लंबिंग प्रणालियों के आसपास काम करने के लिए मॉड्यूलर समाधान, स्वच्छता सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए समाधानों का आकलन करने के लिए पेशेवरों को शामिल करना।

• एक अनिवार्य सफाई कार्यक्रम को प्रभावी बनाना और स्वच्छ शौचालय प्रथाओं पर उपयोगकर्ताओं को संवेदनशील बनाने के साथ-साथ रखरखाव और सूखे बाथरूम के फर्श को बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को सुनिश्चित करना।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सभी उच्च न्यायालयों और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा चार महीने की अवधि के भीतर एक स्टेटस रिपोर्ट दायर की जाएगी।

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