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10वीं पास महिला ने हुनर से बदले हालात

खेती से नहीं हो रहा था गुजारा, अब लाखों में हो रही कमाई

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 15, 2025
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10th pass woman changed the situation with her skills
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। काफी लोग खेती में अच्छी कमाई कर रहे हैं, लेकिन इसमें सफलता हर किसी को नहीं मिलती। ऐसा ही कुछ हो रहा था पश्चिम बंगाल में रहने वाली दीपाली मुरा के साथ। कड़ी मेहनत के बाद भी खेती से उतनी कमाई नहीं हो रही थी कि परिवार का गुजारा हो सके लेकिन उन्होंने हुनर सीखा और फिर सबकुछ बदल गया। आज वह सबई घास के बने प्रोडक्ट बेचकर लाखों रुपये सालाना कमा रही हैं।

दीपाली ने साल 2009 में 10वीं की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद 17 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। दीपाली आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। ससुराल में उनके परिवार की आय का जरिया सिर्फ खेती था। काफी मेहनत के बाद भी वह खेती से पर्याप्त कमाई नहीं कर पा रही थीं। दीपाली और उनके पति अपनी एक बीघा जमीन पर सबई घास उगाते थे। इस घास की वे रस्सियां बनाकर बेचते थे। इससे उन्हें महीने के दो हजार रुपये भी नहीं मिलते थे।

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क्या है सबई घास
सबई घास एक गुच्छेदार घास है। इसकी खेती पूरे साल होती है। इसे प्राकृतिक फाइबर भी कहते हैं। इसका इस्तेमाल रस्सी बनाने में होता है। इसकी बनी रस्सी काफी सॉफ्ट होती है। इसे बबुई घास भी कहा जाता है। इसकी रस्सी बनाने के बाद उसे किसी रंग में रंग सकते हैं। इसका इस्तेमाल रस्सी बनाने के अलावा कागज, डिस्पोजल बर्तन, चटाई आदि बनाने में भी होता है।

समय के साथ बदल दी चीजें
करीब 10 साल पहले दीपाली को दूसरा बच्चा हुआ। उस समय भी उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसके बाद दीपाली ने कुछ अलग करने के बारे में सोचा।

– 50 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी दिया
दीपाली ने साल 2013 में ग्रामीण शिल्प और सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजिक एक वर्कशॉप में हिस्सा लिया। इसका मुख्य रूप से आयोजन यूनेस्को की ओर से किया गया था। इस वर्कशॉप में महिलाओं को सबई घास से घर की सजावट में काम आने वाली चीजों को बनाने की ट्रेनिंग दी गई।

5,000 रुपये का किया निवेश
ट्रेनिंग के बाद दीपाली ने 5,000 रुपये का निवेश किया। उन्होंने इस रकम से रंग, घास और दूसरी चीजें खरीदीं। इसके बाद उन्होंने सबई घास से कई तरह की चीजें बनानी शुरू कर दीं। इसमें ज्वेलरी बॉक्स, टोकरियां, डेकोरेटिव आइटम्स आदि शामिल हैं। वह प्रोडक्ट पर अलग-अलग रंगों से तरह-तरह का डिजाइन करती हैं। इसमें फूल, पक्षी, जानवर आदि शामिल होते हैं। साथ ही वह कई तरह के दूसरे डिजाइन भी बनाती हैं। वह बताती हैं कि दीवार पर लटकाने वाली 14 इंच की थाली बनाने में 30 घंटे तक का समय लगता है।

कितनी हो रही कमाई
33 साल की दीपाली सबई घास से बने प्रोडक्ट को न केवल भारत में बल्कि विदेश में भी बेचती हैं। हर साल विभिन्न प्रदर्शनियों में अपने प्रोडक्ट बेचती हैं। वह हर महीने करीब 600 प्रोडक्ट बनाती हैं। इनकी कीमत साइज के डिजाइन के हिसाब से अलग-अलग होती है।

ये प्रोडक्ट बेचकर दीपाली साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा कमा रही हैं। साथ ही वह पश्चिम बंगाल के आदिवासी बहुल इलाके में 50 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं।

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