नई दिल्ली। अब ब्रिटेन में भी भारतीयों छात्रों की संख्या में भारी कमी आने की आशंका है। अमेरिका में ट्रम्प राज में भारतीय छात्र मुश्किलें झेल रहे थे, लेकिन अब वैसे ही हालात ब्रिटेन में भी हो रहे हैं।
सेंटर फॉर ग्लोबल हायर एजुकेशन (सीजीएचई), यूके की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2027 के मई-जून के दाखिलों (समर इनटेक) में भारतीय छात्रों की संख्या में 20% तक की कमी आ सकती है। इस साल सितंबर तक भारतीय छात्रों को लगभग 83 हजार स्टूडेंट वीजा मिले थे। अगले साल ये घटकर 63 हजार रहने की आशंका है। इसका सबसे बड़ा कारण ब्रिटेन की एंडी बर्नहैम सरकार की सख्त वीजा नीतियां हैं।
ब्रिटेन में ग्रेजुएट वर्क वीजा डेढ़ साल किया गया
दरअसल, ब्रिटेन में राष्ट्रवादी पार्टियों जैसे रिफॉर्म यूके के तेजी से उभरने के कारण वीजा में सख्ती हो रही है। रिफॉर्म यूके के एजेंडे में स्थानीयों को रोजगार देना प्रमुख है। इसलिए बर्नहैम सरकार अमेरिका की तर्ज पर वीजा जारी करने में बैकग्राउंड चेक में सख्ती बरत रही है। ब्रिटेन में ग्रेजुएट वर्क वीजा को दो साल से घटाकर अब डेढ़ साल कर दिया गया है। इससे स्टूडेंट्स को पढ़ाई के बाद ब्रिटेन में नौकरी और रिसर्च करने के लिए कम समय मिल पाएगा।
भारत में ब्रिटेन की 9 यूनिवर्सिटी के कैंपस खुले
वीजा में सख्ती के बीच एक राहत भी है। ब्रिटेन की साउथैम्पटन, लिवरपूल, यॉर्क जैसी 9 यूनिवर्सिटी ने भारत में अपने कैंपस खोलने का एलान किया है। इनमें से कुछ में पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। जानकारों का मानना है कि भारतीय छात्र यहां पर दाखिले लेकर ब्रिटेन के स्तर की पढ़ाई कर सकते हैं। आने वाले समय में ब्रिटेन की और यूनिवर्सिटी भी आएंगी। भारतीय छात्रों की संख्या में कमी से ब्रिटेन की इकोनॉमी को सालाना लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का घाटा झेलना पड़ेगा।
छात्र अब किन देशों का रुख करेंगे?
जर्मनी, आयरलैंड और फ्रांस में भारतीय छात्र रुख करेंगे। इन देशों में स्टूडेंट वीजा की अप्रूवल रेट 90% तक है। जर्मनी की सरकारी यूनिवर्सिटी में फीस माफी है। भारत-ब्रिटेन एफटीए में भारत की ओर से स्टूडेंट और प्रोफेशनल वीजा में रियायत का पॉइंट रखा गया था। तत्कालीन ऋषि सुनक और स्टारमर सरकारों ने अड़ियल रुख से वीजा प्रावधानों को हटा दिया था।













