नई दिल्ली। तमिलनाडु के तूतीकोरिन (थूथुकुडी) में नमक मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। सुबह करीब साढ़े छह बजे मुल्लाकाडु और कोवलम तट पर मजदूर काले झंडे लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे। उनकी नाराजगी नमक बनाने वाली पारंपरिक जमीनों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देने की कोशिश को लेकर है।
मामला सिर्फ जमीन का नहीं, रोजी-रोटी का भी है। इन इलाकों में कई परिवार पीढ़ियों से नमक उत्पादन से जुड़े हैं। अब इसी जगह शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट लगाने की योजना है, जिससे मजदूरों को अपना काम प्रभावित होने की चिंता है। इसे लेकर स्थानीय मछुआरे भी विरोध में उतर आए हैं। उन्हें आशंका है कि शिपबिल्डिंग यार्ड से समुद्र में प्रदूषण बढ़ सकता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में नमक उत्पादक, मजदूर और स्थानीय लोग प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे।
मुल्लाकाडु इलाके में जिन जमीनों पर नमक बनाया जाता है, उनमें सरकारी जमीन भी शामिल है। इन जमीनों को पट्टे पर लेकर नमक उत्पादन किया जाता है। अब इन्हीं जमीनों को प्रस्तावित शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल करने की योजना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट सिपकोट और केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के संयुक्त उपक्रम के जरिए विकसित किया जाना प्रस्तावित है। नमक उत्पादकों का कहना है कि नमक के खेत हटाकर उद्योग लगाने से वर्षों से इस काम पर निर्भर लोगों की मुश्किल बढ़ जाएगी।
प्रशासन ने प्रोजेक्ट से प्रभावित नमक उत्पादकों के लिए वैकल्पिक जमीन देने की योजना रखी है। मुआवजे की बात भी सामने आई है। प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि नमक उत्पादन के लिए समुद्र से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी होती हैं।
शिपबिल्डिंग यार्ड को लेकर मछुआरों की भी अपनी चिंता है। उनका कहना है कि इससे समुद्र में प्रदूषण बढ़ सकता है। इसका असर मछली पकड़ने के काम पर पड़ने की आशंका है।














