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वैज्ञानिकों की नई सोच से दुनिया को मिलेगी स्वच्छ ऊर्जा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
October 11, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

स्टोकहोम। इस साल रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले वैज्ञानिकों का शोध पर्यावरण संरक्षण व स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में नई क्रांति लाएगा। वैज्ञानिकों का कार्य धातु-कार्यनिक ढांचे पर आधारित है, जो गैसों के भंडारण, प्रदूषण नियंत्रण, जलशुद्धिकरण आदि में अहम भूमिका निभाता है। इस खोज से कार्बन उत्सर्जन घटाने और नई दवाओं के विकास में मदद मिलेगी।

इनको मिला रसायन का नोबेल पुरस्कार
सुसुमु कितागावा : जापान के प्रोफेसर। उन्होंने सबसे पहले एमओएपस की अवधारणा को प्रयोगात्मक रूप दिया।
रिचर्ड रॉब्सन : ब्रिटिश वैज्ञानिक । उन्होंने एमओएफ्स की संरचना और धातु-कार्बनिक संयोजनों की रासायनिक स्थिरता पर शोध किया।
उमर मोनिस यागी : यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर। गैस भंडारण, जल शुद्धिकरण में एमओएफ्स के व्यावहारिक उपयोग की दिशा दिखाई।
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इम्युनिटी सिस्टम पर 3 वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल
मैरी ई. ब्रंको, फ्रेड राम्सडेल और डॉ. शिमोन सकागुची को पेरीफेरल इम्युनिटी से संबंधित अपनी खोजों के लिए 2025 के मेडिसिन क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है।
64 वर्षीय ब्रंको सिएटल में इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स बायोलॉजी में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक हैं। वहीं 64 वर्षीय राम्सडेल सैन फ्रांसिस्को में सोनोमा बायोथेरेप्युटिक्स के लिए एक वैज्ञानिक सलाहकार हैं। इसके अलावा 74 वर्षीय सकागुची, जापान के ओसाका विश्वविद्यालय में इम्युनोलॉजी फ्रंटियर रिसर्च सेंटर में एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं। इन नोबेल विजेताओं ने एक नए तरीके से पता लगाया है कि शरीर इम्यून सिस्टम को कैसे चेक में रखता है।

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3 अमेरिकी वैज्ञानिकों को फिजिक्स का नोबेल
इस साल फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार 3 अमेरिकी वैज्ञानिकों, जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट, जॉन मार्टिनिस को मिला है। पुरस्कार इलेक्टि्रक सर्किट में बड़े पैमाने पर मैक्रोस्कोपिक क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा के स्तरों की खोज के लिए मिला है। क्वांटम टनलिंग वह प्रक्रिया है जिसमें कोई कण किसी बाधा (बैरियर) को कूदकर नहीं बल्कि उसके ‘आर-पार’ होकर निकल जाता है, जबकि सामान्य फिजिक्स के हिसाब से यह असंभव होना चाहिए। कोई गेंद दीवार से टकराकर वापस आ जाती है, लेकिन क्वांटम में छोटे कण कभी-कभी दीवार को पार कर दूसरी तरफ चले जाते हैं। यही क्वांटम टनलिंग है। फिजिक्स में बुनियादी सवाल यह रहा है कि क्या क्वांटम इफेक्ट, जो आम तौर पर परमाणु व कणों तक सीमित रहते हैं, बड़े पैमाने पर भी दिखाई दे सकते हैं? इसके लिए जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट और जॉन मार्टिनिस ने 1984 व 1985 में कैलिफोर्निया विवि में खास प्रयोग किया।

ट्रंप खाली हाथ, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया को शांति का नोबेल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार को वेनेजुएला की मुख्य विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को प्रदान किया गया, जो फिलहाल छिपकर रह रही हैं। ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर मचाडो का नाम ‘टाइम पत्रिका’ की ‘2025 के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों’ की सूची में शामिल है।

लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई को साहित्य का नोबेल
2025 के लिए साहित्य का नोबेल प्राइज हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्ज्नाहोरकाई को दिया गया। लास्जलो को ये पुरस्कार उनके मनमोहक और दूरदर्शी कामों के लिए दिया गया।

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