• Latest
  • Trending

मिठास बनी रहे

September 6, 2025
बातचीत से सुलझाएं विवाद : पीएम मोदी

उज्बेकिस्तान-भारत के बीच यूरेनियम समेत हुए 11 समझौते

September 6, 2026
मोदी-जापारीव बैठक किर्गिस्तान 2026

भारत और किर्गिस्तान बढ़ाएंगे आर्थिक सहयोग

September 6, 2026
मोदी-पुतिन द्विपक्षीय बैठक 2026

मोदी ने पुतिन से कहा, इस युद्ध का अंत हो

September 6, 2026
बातचीत से सुलझाएं विवाद : पीएम मोदी

बातचीत से सुलझाएं विवाद : पीएम मोदी

September 6, 2026
सिविल जज भर्ती 1 साल वकालत

अब एक साल वकालत कर बन सकेंगे जज

September 6, 2026
kerla-high-court

हाई कोर्ट में 10वीं पास को मिलेगी ₹52000 तक मंथली सैलरी

September 6, 2026
3 लाख छात्रों को साइबर एक्सपर्ट बनाएगा आईआईटी

3 लाख छात्रों को साइबर एक्सपर्ट बनाएगा आईआईटी

September 6, 2026
शिक्षक

अतिथि शिक्षकों के लिए खुशखबरी अब बन सकेंगे प्रधानाचार्य

September 6, 2026
लवकुश प्रसाद ISRO साइंटिस्ट

इसरो में साइंटिस्ट बन राज्य का नाम रोशन किया लवकुश ने

September 6, 2026
आईपीएस अंजलि विश्वकर्मा UPSC सफलता

यूपीएससी के लिए छोड़ी 48 लाख की नौकरी

September 6, 2026
विदेश में पीएचडी सबसे ज्यादा स्टाइपेंड

पीएचडी करने के लिए सालाना ₹1 करोड़ स्टाइपेंड

September 6, 2026
पुणे आयकर विभाग स्पोर्ट्स कोटा भर्ती 2026

खिलाड़ियों के लिए आयकर विभाग में भर्ती, ₹81000 तक सैलरी

September 6, 2026
Sunday, September 6, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

मिठास बनी रहे

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 6, 2025
in the blitz
0
दीपक द्विवेदी

अब हमें यह उम्मीद करनी चाहिए कि वैश्विक मजबूरियों के चलते ही सही; भारत-चीन-रूस के बीच जो मिठास बढ़ी है वह वैश्विक जन-कल्याण के लिए सदैव बरकरार रहे।

प्र धानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी हाल ही में चीन और जापान की यात्रा करके भारत लौट आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह विदेशी दौरा निश्चित रूप से नए भारत के विकास और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पाने में एक बड़ा मील का पत्थर भी साबित होगा। इस महत्वपूर्ण विदेशी यात्रा के दौरान जहां जापान से भारत के अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के नए आयाम जुड़े, वहीं चीन की यात्रा भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही जिस पर पूरे विश्व की निगाहें लगी रहीं। प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा करने का निर्णय परिणामों की दृष्टि से भी अत्यधिक फलदाई रहा, इसमें कोई भी दो राय नहीं है। पीएम मोदी चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए गए थे। मोदी की चीन और जापान की यह यात्रा 7 वर्ष बाद हुई। उनकी यह यात्रा भारत सरकार की विदेश नीति के दृष्टिकोण में बदलाव का भी एक स्पष्ट संदेश दे रही है। साल 2020 के सैन्य प्रतिरोध के बाद पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह पहली द्विपक्षीय बैठक थी। इसके अतिरिक्त मोदी को शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में शामिल हुए 3 साल हो गए हैं। एससीओ एक यूरेशियाई समूह है जिसे स्पष्ट रूप से पश्चिम विरोधी माना जाता है। तियानजिन के इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच की गर्म जोशी की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने एक निष्कि्रय सी पड़ी रूस-भारत-चीन की त्रिपक्षीय बैठक की यादें कहीं न कहीं ताजा कर दीं।

YOU MAY ALSO LIKE

उज्बेकिस्तान-भारत के बीच यूरेनियम समेत हुए 11 समझौते

भारत और किर्गिस्तान बढ़ाएंगे आर्थिक सहयोग

यहां यह उल्लेख करना भी अत्यंत जरूरी है कि इन तीनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे परिदृश्य के बीच में हो रही है जब रूस से तेल खरीदने के नाम पर अमेरिका ने भारत पर जबरदस्ती 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया है क्योंकि अमेरिका का यह मानना है कि भारत रूस से जो तेल खरीद रहा है उसके भुगतान से यूक्रेन के खिलाफ रूस युद्ध जारी रखे हुए है। ऐसे में इन तीनों नेताओं की तस्वीरों ने अमेरिका सहित पूरे विश्व में तहलका मचा दिया है और पश्चिम को एक नए ‘वर्ल्ड ऑर्डर’ के उभरने का भय सताने लगा है। यहां यह भी उल्लेख करना समीचीन है कि जिस चीन को भारत का कट्टर दुश्मन माना जाता है; उसी चीन ने अमेरिका के टैरिफ वार के खिलाफ खुलकर भारत का समर्थन किया है। इसे उसने अमेरिका की बेजा कार्रवाई भी करार दिया है। चीन के साथ भारत की द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते करने और उन्हें आगे बढ़ाने के अपने-अपने संकल्पों को दोहराया और विश्व व्यापार को स्थिर करने के लिए सीधी उड़ानों, दोनों देशों के बीच वीजा सुविधा और आर्थिक संबंधों के निर्माण को भी हरी झंडी दिखा दी। जहां पीएम मोदी ने आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई वहीं जिनपिंग ने ‘ड्रैगन’ यानी चीन और ‘हाथी’ यानी कि भारत के एक साथ आने का आह्वान किया। जिनपिंग ने कहा कि वैश्विक स्थिरता और क्षेत्रीय विकास के लिए भारत और चीन का साथ आना आज के समय की जरूरत है। ऐसी सहृदयता एक साल पहले तक नितांत अकल्पनीय थी और यह साफ है कि कुछ हद तक भारत पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने के अमेरिकी कदमों और ट्रंप प्रशासन के इरादों के बारे में नई दिल्ली की अविश्वास की भावना से प्रेरित भी है।

यद्यपि अमेरिका के कुछ समझदार नेता ट्रंप के फैसलों से उत्पन्न खराब हालात को संभालने के प्रयास कर रहे हैं और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत-अमेरिकी संबंधों को 21वीं सदी की सबसे ऐतिहासिक साझेदारी बता रहे हैं पर जो खटास पैदा हो गई है, उसे दूर होने में अब समय लगना लाजिमी है। वैसे चीन भी अनेक अवसरों पर भारत विरोधी रुख अख्तियार करता रहा है जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को समर्थन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और एनएससी की संस्था पर भारत के कदमों को रोकना एवं पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को आतंकवादी घोषित करने पर रोक भी शामिल है लेकिन चीन के वर्तमान रुख ने कहीं न कहीं भारत और मोदी सरकार को फिलहाल चीन की कार्रवाइयों पर चिंता दूर करने का एक मौका भी प्रदान किया है। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि शंघाई सहयोग संगठन का जो संयुक्त घोषणा पत्र जारी हुआ, उसमें भारत आतंकवादियों की सीमा पार गतिविधियों के विरुद्ध कड़े शब्दों का प्रयोग और पहलगाम हमले की निंदा का प्रस्ताव जुड़वाने में सफल रहा जबकि इस मंच पर पाकिस्तान भी मौजूद था। यही नहीं, भारत अकेला ऐसा देश है जिसने चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना का समर्थन करने वाले अनुच्छेद का विरोध करना जारी रखा। इसके अलावा एससीओ सदस्यों के बीच ‘सभ्यता का संवाद’ शुरू करने के पीएम मोदी के सुझाव का जिक्र भी घोषणा पत्र में समाहित किया गया। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की अपनी इस यात्रा को उत्पादक बताया है। अब हमें यह उम्मीद करनी चाहिए कि वैश्विक मजबूरियों के चलते ही सही; भारत-चीन-रूस के बीच जो मिठास बढ़ी है, वह वैश्विक जन-कल्याण के लिए सदैव बरकरार रहे।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation