ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। पेपर लीक के मुद्दे पर संसद मार्च के दौरान आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और ज्यादती की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अगुवाई में 5 सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) का गठन किया है। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही, उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति से कहा कि आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस द्वारा अत्यधिक बल और हिंसा (जिसमें पैलेट गन का इस्तेमाल भी शामिल है) की जांच करें। कोर्ट ने आंदोलन के दौरान पुलिस अधिकारियों व अन्य सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की भी जांच का आदेश दिया है।
देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रेड्डी के अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक एल.आर. बिश्नोई को शामिल किया है। सुप्रीम कोर्ट ने समिति का गठन कई बातों को ध्यान में रखकर किया है, जिनमें इसके हर सदस्य की अपनी विशेषज्ञता और अनुभव, साथ ही कमेटी की विविधता और अन्य कारक शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 अगस्त पारित आदेश (जिसे 20 अगस्त को अपलोड किया गया) में कहा है ‘हमें भरोसा है कि उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति की सिफारिशें इस अदालत के लिए बहुत मददगार साबित होंगी और उम्मीद जाहिर की है कि समिति उन सभी मुद्दों का व्यापक मूल्यांकन कर पाएगी जिन पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।’
पीठ ने अपने आदेश में साफ किया कि पूरी सावधानी बरतते हुए, एचपीईसी की जांच सिर्फ एक बार की जाने वाली प्रक्रिया नहीं होगी। पीठ ने समिति से कहा कि वह मुद्दों का लगातार और समय-समय पर मूल्यांकन करे और समय-समय पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट इस अदालत को सौंपे। पीठ ने कहा है कि ड्यूटी के दौरान पुलिस बलों को लगी चोटों, और उसके कारण उनके परिवारों को हुए मानसिक और भावनात्मक सदमे को भी याचिकाकर्ताओं की शिकायतों के बराबर ही महत्व और विचार दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हमने मामले को पहले ही साफ कर दिया था कि आरोप गंभीर हैं और इसकी स्वतंत्र जांच की जरूरत है।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा की जांच को प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति को कुछ मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर काम करने को कहा है, जिनमें सबसे अहम मुद्दा महिला प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ की कथित घटनाओं से जुड़ा है। पीठ ने कहा कि एचपीईसी दोनों पक्षों-चाहे पुलिसकर्मी हों या प्रदर्शनकारी- में से घायल हुए लोगों को अंतरिम मुआवजा देने के मुद्दों पर भी विचार कर सकता है। अपने आदेश में कोर्ट ने समिति से प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की हरकतों से सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान पर भी रिपोर्ट सौंपने को कहा। इसमें सरकारी प्रतिष्ठानों, वाहनों और राज्य व निजी नागरिकों की अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान और तोड़-फोड़ शामिल है।













