ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट का इस्तेमाल हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और बच्चों को भी इससे वंचित नहीं किया जा सकता। ऑनलाइन नुकसान से बचाने के नाम पर बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाना उचित नहीं है।
हालांकि, उम्र के अनुसार पाबंदियां और अभिभावकों की निगरानी जरूरी है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 137 पन्नों के आदेश में केंद्र को बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का पता लगाने और हटाने के लिए राष्ट्रीय डाटाबेस बनाने का भी निर्देश दिया।
उम्र के आधार पर इंटरनेट पर कोई पाबंदी नहीं होनी चाहिए। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।














