ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। साहस, देशभक्ति और दृढ़ इच्छा शक्ति की जब भी बात आती है, तो भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की जांबाज महिला अधिकारियों का नाम सबसे पहले आता है। इन्हीं में से एक बेहद चर्चित नाम है डॉ. संजुक्ता पराशर का। असम की ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर 2006 बैच की आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में महानिरीक्षक (आईजी) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। संजुक्ता पराशर की यह नियुक्ति देश भर के उन लाखों युवाओं और छात्रों के लिए एक बड़ा संदेश है, जो चुनौतियों से डरने के बजाय उनका डटकर सामना करने का जज्बा रखते हैं।
3 अक्टूबर 1979 को असम में जन्मीं संजुक्ता पराशर का बचपन से ही पढ़ाई में गहरा लगाव था। उनके पिता सिंचाई विभाग में इंजीनियर और माता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थीं। गुवाहाटी में अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आ गईं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित इंद्रप्रस्थ कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल रिलेशन में एमए, एमफिल और पीएचडी की उच्च डिग्री प्राप्त की।
यूपीएससी में 85वीं रैंक
कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास के दम पर संजुक्ता पराशर ने वर्ष 2006 में सिविल सेवा परीक्षा में पूरे देश में 85वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की। इतनी शानदार रैंक होने के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा (आईएए) के बजाय भारतीय पुलिस सेवा को चुना, क्योंकि वह जमीनी स्तर पर देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए काम करना चाहती थीं। उन्हें असम-मेघालय काडर आवंटित किया गया और वह असम की पहली महिला आईपीएस अधिकारियों में शामिल हुईं।
जंगलों में उग्रवादियों का खात्मा
असम में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने उग्रवाद प्रभावित इलाकों में कानून-व्यवस्था कायम करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। जब बोडो और अन्य सशस्त्र उग्रवादी गुट असम के घने जंगलों में हिंसा फैला रहे थे, तब संजुक्ता पराशर ने कमांड सेंटर में बैठने के बजाय खुद मैदान में उतरने का फैसला किया। हाथों में एके-47 राइफल थामे घने जंगलों में कमांडो टीमों और सुरक्षा बलों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने महज 15 महीनों में 16 से अधिक खतरनाक उग्रवादियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया और 64 से ज्यादा को गिरफ्तार किया। उनके इसी अदम्य साहस और निडर नेतृत्व के कारण उन्हें ‘आयरन लेडी ऑफ असम’ का खिताब मिला।
एनआईए से लेकर सीआरपीएफ तक का शानदार सफर
जुक्ता पराशर ने केवल मैदानी अभियानों में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के रूप में भी कई राष्ट्रीय सुरक्षा जांचों को अंजाम दिया। देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें गृह मंत्री पदक’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।













