न्यूयॉर्क। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। हम ब्राजील और भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं।
लावरोव ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त सीटों का विरोध किया। उन्होंने खासतौर पर जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए उन पर ‘सैन्यवाद और बदले की भावना की ओर बढ़ने का आरोप लगाया।
लावरोव ने साथ ही कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के दौरान मौजूदा स्थायी सदस्यों के अधिकारों और शक्तियों में कमी नहीं होनी चाहिए।
भारत की स्थायी सदस्यता की मांग 1990 से जारी
भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग 1990 के दशक से उठती रही है। 2008 से यूएन में सुरक्षा परिषद सुधार पर औपचारिक बातचीत शुरू हुई। 2010 में भारत ने ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ जी4 समूह बनाकर स्थायी सीट की मांग आगे बढ़ाई। 2026 में भी सुधार को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन सदस्य देशों के बीच सुरक्षा परिषद के नए ढांचे पर सहमति नहीं बनी है।
वीटो राइट सिर्फ 5 को
सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन हैं। इन सबको वीटो पावर हासिल है। इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें 2 साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बढ़ाने के लिए यूएन चार्टर में बदलाव करना होगा। इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और दो-तिहाई सदस्य देशों की औपचारिक मंजूरी जरूरी है। इसमें सभी पांच मौजूदा स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी आवश्यक है।
75 देशों ने नेतन्याहू का बायकॉट किया
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया। जैसे ही वो मंच पर आए तो 75 देशों के प्रतिनिधियों ने हूटिंग करके उनका विरोध किया, फिर बाहर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद नेतन्याहू करीब 3 मिनट तक चुपचाप खड़े रहे।
स्थायी सदस्यता को लेकर 4 मुश्किलें
1. चीन का विरोधी रुख
भारत की स्थायी सदस्यता पर चीन का रुख सबसे महत्वपूर्ण अड़चनों में से एक माना जाता है। चीन के भारत के साथ क्षेत्रीय व रणनीतिक मतभेद भी हैं। उसने स्थायी सदस्यता को लेकर भारत का कभी भी समर्थन नही किया है।
2. जी4 के खिलाफ दूसरे देशों की आपत्ति
भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील स्थायी सीटों के विस्तार का समर्थन करते हैं लेकिन यूनाइटिंग फार कंसेंसस (यूएफसी) जैसे समूह का एक प्रस्ताव है कि सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों के बजाय गैर-स्थायी सीटें बढ़ाई जाएं।
3. अफ्रीकी देशों की सीटों पर सहमति
अफ्रीकी देशों की मांग भी सुरक्षा परिषद सुधार का बड़ा हिस्सा है। कितनी सीटें होंगी और उनका स्वरूप क्या होगा, इस पर भी बातचीत जारी है। अभी तक सर्वसम्मति नहीं बन सकी है।
4. वीटो का सवाल
नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर मिलेगी या नहीं, यह सबसे जटिल मुद्दों में से एक है। मौजूदा पांच स्थायी सदस्य अपने अधिकारों को बनाए रखने पर जोर देते हैं। जी4 स्थायी सदस्यता के वास्तविक अधिकारों की बात करता है, जिसमें वीटो राइट्स भी शामिल हैं।













