नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ 17 सितंबर 2026 को खुला। ऊपरी मूल्य पर इसका आकार लगभग ₹22,569 करोड़ है। यह भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल है लेकिन इसकी अहमियत सिर्फ आकार में नहीं है। एनएसई वही संस्था है जो देश का प्रमुख शेयर बाजार चलाती है। अब निवेशकों को इसी संस्था में हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिल रहा है।
आम कंपनियों के आईपीओ से यह बात एनएसई के निर्गम को अलग बनाती है। एनएसई ऐसा मंच चलाता है जहां दूसरी कंपनियों के शेयरों का कारोबार होता है। उसकी तकनीक, जोखिम प्रबंधन और कामकाज की विश्वसनीयता पर लाखों निवेशकों तथा बाजार से जुड़ी कंपनियों का भरोसा टिका है।
इस आर्इपीओ के बारे में एक बात साफ समझनी चाहिए कि एनएसई नए शेयर जारी नहीं कर रहा। पूरा निर्गम ऑफर फॉर सेल है। यानी पुराने शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच रहे हैं। शेयरों की मूल्य सीमा ₹1,700 से ₹1,785 है। बिक्री से मिलने वाली रकम शेयर बेचने वालों को जाएगी; एनएसई को इससे विस्तार के लिए नई पूंजी नहीं मिलेगी। हालांकि यह एक बड़ा आईपीओ है, भारत का सबसे बड़ा नहीं है। वर्ष 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ लगभग ₹27,870 करोड़ का था। एनएसई सार्वजनिक होने वाला पहला भारतीय स्टॉक एक्सचेंज भी नहीं है। बीएसई वर्ष 2017 में अपना आईपीओ ला चुका है।
सूचीबद्ध होने के बाद एनएसई के वित्तीय प्रदर्शन और प्रबंधन के फैसलों पर सार्वजनिक निवेशकों की निगरानी बढ़ेगी। इससे अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद की जा सकती है। साथ ही एनएसई के सामने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रहेगी; अपने शेयरधारकों के लिए कारोबार बढ़ाते हुए सभी निवेशकों को निष्पक्ष और भरोसेमंद बाजार उपलब्ध कराना। निवेशकों के लिए यह एक नया अवसर है लेकिन शेयरों में लाभ की गारंटी नहीं होती। इस आईपीओ की असली सफलता शेयरों की बिक्री से आगे तय होगी, इस बात से कि एनएसई आने वाले वर्षों में बाजार का भरोसा कितनी मजबूती से बनाए रखता है।













