• Latest
  • Trending
suprem-court

हस्ताक्षर न करने वाले को मध्यस्थता कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार नहीं

August 22, 2025
airport

अब खाड़ी नहीं, अमेरिका से आता है ज़्यादा पैसा

August 5, 2026
वैश्विक संकट के बीच भी नहीं थमेगी भारत की रफ्तार

यूपी में जीएसटी 15% बढ़ा

August 5, 2026
boxing

ग्लासगो में 39 पदक, सात गोल्ड सिर्फ़ बॉक्सिंग से

August 5, 2026
solar

बारह लाख घरों ने बिजली बेचकर कमाए

August 5, 2026
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

पीएम-किसान अब 2031 तक

August 5, 2026
आरबीआई

कल सुबह 10 बजे आरबीआई का फ़ैसला आएगा। आपकी होम लोन ईएमआई पर इसका क्या असर होगा — और असली बात रेट में नहीं, भाषा में है

August 4, 2026
election center

तीन राज्य, तीन सीटें, तीन अलग नतीजे: बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर ने एक ही दिन तीन अलग कहानियां सुनाईं

August 4, 2026
Athletics-track-inside-a-stadium

ग्लासगो में भारत को 39 मेडल मिले, इनमें 10 अकेले बॉक्सिंग से। दो दिन बाद सरकार ने खेल पर ₹36,441 करोड़ मंज़ूर किए — दोनों ख़बरें एक साथ पढ़िए

August 4, 2026
दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026

बारिश 12 फ़ीसदी कम, अगस्त-सितंबर का अनुमान भी कमज़ोर। फिर भी बुवाई क्यों नहीं बिगड़ी — और आपके पास अब 11 दिन क्यों बचे हैं

August 4, 2026
farmer

पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी, ₹3.15 लाख करोड़ मंज़ूर। पर असली बात यह है कि यह पैसा कब और किसके खाते में पहुंचेगा

August 4, 2026
दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026

बुवाई में 38 लाख हेक्टेयर की कमी, पर खेल अभी ख़त्म नहीं — 15 अगस्त तक का वक़्त बाक़ी है

August 3, 2026
farmer

पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी: ₹6,000 सालाना मिलते रहेंगे, और अब पाँच साल की गारंटी के साथ

August 3, 2026
Wednesday, August 5, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

हस्ताक्षर न करने वाले को मध्यस्थता कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार नहीं

उनकी उपस्थिति गोपनीयता का उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 22, 2025
in the blitz
0
suprem-court

YOU MAY ALSO LIKE

अब खाड़ी नहीं, अमेरिका से आता है ज़्यादा पैसा

ग्लासगो में 39 पदक, सात गोल्ड सिर्फ़ बॉक्सिंग से

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर न करने वाला पक्ष मध्यस्थता कार्यवाही में भाग नहीं ले सकता, क्योंकि केवल हस्ताक्षर करने वाले पक्ष ही मध्यस्थता कार्यवाही में उपस्थित रहने के हकदार हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद कर दिया, जिसमें मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर न करने वालों को अपने वकीलों की उपस्थिति में मध्यस्थता कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।
न्यायालय ने इस मुद्दे पर विचार किया, क्या मध्यस्थता कार्यवाही के लिए किसी समझौते पर हस्ताक्षर न करने वाले पक्ष के लिए ऐसी मध्यस्थता कार्यवाही में उपस्थित रहना स्वीकार्य है?
नकारात्मक उत्तर देते हुए जस्टिस चंदुरकर द्वारा लिखित निर्णय में कहा गया: “एक बार जब यह स्पष्ट हो जाता है कि मध्यस्थता निर्णय उक्त समझौता ज्ञापन/एफएसडी के गैर-पक्षकारों को बाध्य नहीं करेगा, क्योंकि ऐसे पक्ष उक्त दस्तावेजों पर हस्ताक्षरकर्ता नहीं है तो समझौता ज्ञापन/एफएसडी के गैर-हस्ताक्षरकर्ता को एकमात्र मध्यस्थ के समक्ष कार्यवाही में उपस्थित रहने की अनुमति देने का कोई भी कानूनी आधार नहीं होगा। जब मध्यस्थता कार्यवाही केवल मध्यस्थता समझौते के पक्षों के बीच ही हो सकती है। अधिनियम की धारा 35 ऐसे समझौते के गैर-हस्ताक्षरकर्ताओं पर पारित होने वाले मध्यस्थता निर्णय को बाध्यकारी नहीं बनाती है तो हमें अधिनियम द्वारा प्रदत्त कोई भी कानूनी अधिकार नहीं मिलता, जो समझौते के गैर-पक्षकार को समझौते के हस्ताक्षरकर्ताओं के बीच मध्यस्थता कार्यवाही में उपस्थित रहने में सक्षम बनाता हो।”
संक्षेप में मामला
अपीलकर्ताओं – पवन गुप्ता (पीजी) और कमल गुप्ता (केजी) के बीच मौखिक पारिवारिक समझौता (2015) बाद में समझौता ज्ञापन/पारिवारिक समझौता विलेख (2019) में औपचारिक रूप से दर्ज किया गया, जिसमें प्रतिवादी – राहुल गुप्ता को शामिल नहीं किया गया। समझौता ज्ञापन के मध्यस्थता खंड के अंतर्गत एक मध्यस्थता खंड लागू किया गया, जिसमें प्रतिवादी – राहुल गुप्ता ने समझौते पर हस्ताक्षरकर्ता न होने के बावजूद हस्तक्षेप की मांग की।
हाईकोर्ट मध्यस्थता कार्यवाही में गैर-हस्ताक्षरकर्ता की उपस्थिति की अनुमति देने वाला हस्तक्षेप आवेदन स्वीकार करने के लिए इच्छुक नहीं था, लेकिन बाद में उसे रेफरल चरण के बाद यानी मध्यस्थता की नियुक्ति के बाद मध्यस्थता कार्यवाही में उपस्थित होने की अनुमति दी।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के निर्णय को रद्द करते हुए जस्टिस चंदुरकर द्वारा लिखित निर्णय में कहा गया कि कार्यवाही में गैर-हस्ताक्षरकर्ता के उपस्थित होने के बावजूद, पारित निर्णय उन पर बाध्यकारी नहीं होगा। उनके पास किसी निर्णय के प्रवर्तन को चुनौती देने के लिए एकमात्र उपाय मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 36 के तहत उपलब्ध है।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation