ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सीखने की इच्छा हो तो सीमित संसाधनों में भी कमाई और करियर के कई मौके बनाए जा सकते हैं। मिजोरम के एक दूर दराज के और म्यांमार बॉर्डर के पास स्थित गांव की पी मारी जेडटी लालरिथांगी ने इसे साबित कर दिया है। 35 वर्षीय महिला मारी जेडटी को इटली के रोम में संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी की ओर से सम्मानित किया गया है। वह पहले शिक्षक थीं, अब स्ट्रॉबेरी की खेती करती हैं। उन्होंने फलों की खेती के एक छोटे से प्रयोग को आजीविका का जरिया बना लिया है।
पहली मिजो महिला टीचर से किसान बनीं
लॉन्गटलाई जिले के सांगाऊ की मारी जेडटी लालरिथांगी उन महिलाओं में शामिल हैं, जिन्हें खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के तहत कृषि-खाद्य प्रणालियों और ग्रामीण विकास में एफएओ की 100 महिला नायिकाओं के रूप में मान्यता दी है। यह सम्मान पाने वाली वह पहली मिजो महिला हैं। 131 देशों के 600 लोगों में से चुना गया।
भारत से दो महिलाओं को चयन
इस सम्मान के लिए भारत से दो महिलाओं को चुना गया था। यह पुरस्कार पिछले सप्ताह रोम में एफएओ मुख्यालय में आयोजित विश्व खाद्य मंच में प्रदान किया गया। लालरिथांगी ने कहा कि यह सम्मान पाकर मैं बहुत खुश हूं। मैं ईश्वर और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करती हूं, जिन्होंने मुझे यह पहचान दिलाने में मदद की। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय ईश्वर के मार्गदर्शन, अपने परिवार के सहयोग और राज्य के बागवानी विभाग को दिया।
सालाना 1.5 लाख से 10 लाख पहुंची कमाई
लालरिथांगी ने पड़ोसी सियाहा जिले में स्ट्रॉबेरी की सफल खेती करने वाले किसानों के बारे में जानने के बाद 2024 में इसकी खेती के प्रयोग शुरू किए थे। लालरिथांगी ने सांगाऊ से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित खेत में लगभग 1,000 पौधों से खेती शुरू की थी। बाद में उन्होंने इसका विस्तार करते हुए दो हेक्टेयर क्षेत्र में 10,000 से अधिक पौधे लगाए। महिला किसान ने पहले वर्ष में करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई की, जबकि 2025 में स्ट्रॉबेरी की खेती से उनकी आय 10 लाख रुपये से अधिक हो गई। वह न केवल स्ट्रॉबेरी बेचती हैं, बल्कि अपनी उपज के कुछ हिस्से से स्ट्रॉबेरी वाइन और कैंडी भी बनाती हैं, जिन्हें मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है।
इग्नू से समाजशास्त्र में पोस्टग्रेजुएट लालरिथांगी ने पहले एक प्राइवेट स्कूल में टीचर के तौर पर काम किया था और सरकारी नौकरी पाने की कोशिश में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने पहले मीडिया को बताया था, शुरुआत में, ग्रेजुएशन और मास्टर्स डिग्री पूरी करने के बाद मैंने नौकरी के लिए कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। फिर मैंने सोचा कि आजीविका के लिए सिर्फ सरकारी नौकरी पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि अगर कोई व्यक्ति सच में कड़ी मेहनत करे, तो अच्छी कमाई के और भी कई तरीके हो सकते हैं।’ आखिरकार उन्होंने खेती करने का फैसला किया। उनका कहना है कि वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहती थीं और अपनी शिक्षा का व्यावहारिक इस्तेमाल करना चाहती थीं।
3 बच्चों को पालने के साथ साथ सब कुछ सीखा, दूध पिलाते पढ़ीं
बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के लालरिथांगी ने ऑनलाइन ट्यूटोरियल्स और अन्य किसानों से खेती के तरीके सीखे। उन्होंने बताया कि अपने तीन बच्चों की परवरिश करने के साथ-साथ वह अक्सर देर रात तक पढ़ाई करती थीं। उन्होंने कहा, मैं इंटरनेट से पढ़ती थी, खासकर यूट्यूब पर मौजूद खेती के तरीकों से जुड़े ट्यूटोरियल्स देखती थी। तीन बच्चों की मां होने के नाते मेरे पास बहुत कम समय होता था। इसलिए मैं देर रात तक पढ़ाई करती थी, और कभी-कभी तो बच्चों को दूध पिलाते समय भी पढ़ाई कर लेती थी।,
पति सरकारी स्कूल में टीचर
उनके पति सांगाऊ के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं। पति और उनके सास-ससुर ने खेती के काम में उनका पूरा साथ दिया है। वे दोनों वीकेंड पर भी खेत में ही समय बिताते हैं। लालरिथांगी को मिजोरम हॉर्टी फेयर 2026 में लॉन्गटलाई जिले का सर्वश्रेष्ठ किसान चुना गया था।














