ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।देश में खरीफ की बुवाई पिछले साल से 20.95 लाख हेक्टेयर कम है। लेकिन इस आँकड़े के भीतर दो राज्य उलटी दिशा में चल रहे हैं — और वही असली ख़बर है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 14 अगस्त तक के आँकड़ों के मुताबिक़ इस साल कुल 1,016.57 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी तारीख़ तक 1,037.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। यानी 2.02 प्रतिशत की कमी। सबसे बड़ी गिरावट धान में है — 393.44 से घटकर 379.07 लाख हेक्टेयर, यानी 14.37 लाख हेक्टेयर कम। अकेला धान पूरी कमी का लगभग 69 प्रतिशत है।
अब उत्तर प्रदेश को देखिए। दलहन में 4.25 लाख हेक्टेयर ज़्यादा, तिलहन में 3.89 लाख ज़्यादा, मोटे अनाज में 0.62 लाख ज़्यादा और गन्ने में 0.36 लाख ज़्यादा। धान में सिर्फ़ 0.58 लाख हेक्टेयर की कमी। सब जोड़-घटा दें तो यूपी ने पिछले साल से क़रीब 8.5 लाख हेक्टेयर ज़्यादा बोया है।
यहीं तय होता है फ़ैसला: मध्य प्रदेश के उमरिया ज़िले में धान का खेत जोतता किसान। कौन-सी फ़सल बोनी है, यह मानसून के पहले पंद्रह दिनों में तय हो जाता है — और फिर पूरे मौसम बदला नहीं जा सकता।
देश में धान का सबसे बड़ा इज़ाफ़ा असम में है — 3.93 लाख हेक्टेयर। सबसे बड़ी कमी कर्नाटक में, अकेले धान में 2.86 लाख हेक्टेयर। भारत का धान का नक़्शा नीति नहीं, बारिश बदल रही है।
एक नज़र में
• आँकड़े: 14 अगस्त 2026 तक, कृषि मंत्रालय
• कुल बुवाई: 1,016.57 लाख हे. · पिछले साल 1,037.52 लाख हे.
• धान: 379.07 लाख हे. — 14.37 लाख हे. कम
• दलहन: 108.14 लाख हे. — क़रीब बराबर
• उत्तर प्रदेश: कुल मिलाकर क़रीब 8.5 लाख हे. ज़्यादा
• कर्नाटक: चार फ़सल समूहों में मिलाकर क़रीब 14.5 लाख हे. कम
• उड़द: 2.73 लाख हे. ज़्यादा — दलहन में इकलौती बड़ी बढ़त
किसान के लिए इसका मतलब क्या है? दो बातें। पहली, दलहन और तिलहन का रक़बा लगभग पिछले साल जितना ही है — और ये दोनों वही फ़सलें हैं जो देश सबसे ज़्यादा बाहर से मँगाता है। यानी दाल और खाने के तेल की तरफ़ से इस साल कोई बड़ा झटका दिखता नहीं। दूसरी, दलहन के अंदर उड़द 2.73 लाख हेक्टेयर बढ़ा है जबकि अरहर 1.69 और मूँग 1.37 लाख हेक्टेयर घटी है। अरहर की जगह उड़द नहीं ले सकता, इसलिए मंडी में इन दोनों के भाव अलग-अलग चाल चलेंगे।
अब आगे की बात। बुवाई का काम क़रीब-क़रीब हो चुका है। अब जो बचा है वह पैदावार है, और पैदावार अभी खुली हुई है। मौसम विभाग ने दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश समेत क़रीब 25 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। जिन इलाक़ों में बुवाई पहले ही पिछड़ी है, वहाँ यह बारिश राहत है। जहाँ फ़सल खड़ी है, वहाँ यही बारिश जोखिम है। बड़ी बात यह है कि जिस दिशा में यूपी बढ़ा है — धान कम, दलहन-तिलहन ज़्यादा — वह दिशा पानी की बचत की भी है और आयात घटाने की भी। बाक़ी राज्य उसी रास्ते चलें, इसके लिए ख़रीद और फ़सल बीमा के संकेत साफ़ होने चाहिए।













