• Latest
  • Trending
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

धान का रकबा घटा, दाल और कपास जस के तस

August 20, 2026
भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

October 6, 2026
भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा...!

भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा…!

October 5, 2026
jai-shankar

न्यूयॉर्क में दिखी नए भारत की ‘दबंग कूटनीति’

October 5, 2026
संसद का मॉनसून सत्र 2026: हंगामे में बर्बाद हुआ समय और जनता के धन का नुकसान

लोकतंत्र में विपक्ष कितना रचनात्मक

October 5, 2026
अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

October 5, 2026
परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

October 5, 2026
स्लीमनाबाद टनल

विंध्य की धरती को मिलेगा मां नर्मदा का आशीर्वाद, जल सुरंग की खुदाई पूरी

October 5, 2026
ev-scooter

23 रुपए में दिनभर के लिए इलेक्टि्रक स्कूटर

October 5, 2026
सोना 4,550 डॉलर के पार, चांदी भी 67 डॉलर के ऊपर

सोना गिरवी रखकर लोन लेने में यूपी वाले सबसे आगे

October 5, 2026
metro

मुंबई मेट्रो का महाविस्तार: 6 नए रूट पर 374 किमी में 130 स्टेशन

October 5, 2026
खटमलों ने उड़ाई अफसरों की नींद

खटमलों ने उड़ाई अफसरों की नींद

October 5, 2026
भारत भी बना रहा अपना ‘सूरज’, गुजरात की लैब में जुटे वैज्ञानिक

भारत भी बना रहा अपना ‘सूरज’, गुजरात की लैब में जुटे वैज्ञानिक

October 5, 2026
Wednesday, October 7, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

धान का रकबा घटा, दाल और कपास जस के तस

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 20, 2026
in the blitz
0
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।इसका आपकी थाली पर क्या असर पड़ेगा? इस बार खरीफ़ की बुवाई पिछले साल से 2.02 फ़ीसदी पीछे है। लेकिन असली बात यह है कि यह गिरावट पूरी टोकरी में नहीं फैली — लगभग सारी की सारी एक ही फ़सल में है, और वह है धान।

14 अगस्त तक खरीफ़ की कुल बुवाई 1,016.57 लाख हेक्टेयर हुई, जबकि पिछले साल इसी तारीख़ तक 1,037.52 लाख हेक्टेयर थी। यानी 20.95 लाख हेक्टेयर कम। अब इसे फ़सल के हिसाब से तोड़िए। धान इस बार 379.07 लाख हेक्टेयर, पिछले साल 393.44 लाख हेक्टेयर — यानी 14.37 लाख हेक्टेयर की कमी। सिर्फ़ यह एक फ़सल पूरी गिरावट का 68.6 फ़ीसदी है।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा…!

सबसे ज़्यादा पानी वाली फ़सल: उमरिया, मध्य प्रदेश में धान का खेत। रोपाई वाला धान खरीफ़ की सबसे ज़्यादा पानी माँगने वाली फ़सल है — इसीलिए रकबा किस फ़सल में घटा, यह कितना घटा से ज़्यादा मायने रखता है।

दाल का रकबा जस का तस है। यही सबसे राहत की बात है, क्योंकि थाली की महंगाई सबसे तेज़ दाल से बढ़ती है।

एक नज़र में

• कुल खरीफ़ रकबा, 14 अगस्त: 1,016.57 लाख हेक्टेयर
• पिछले साल इसी दिन: 1,037.52 लाख हेक्टेयर
• कमी: 20.95 लाख हेक्टेयर, यानी 2.02 फ़ीसदी
• धान: 379.07 लाख हेक्टेयर — 14.37 लाख हेक्टेयर या 3.65 फ़ीसदी कम
• पूरी कमी में धान का हिस्सा: 68.6 फ़ीसदी
• दालें: 108.14 लाख हेक्टेयर — सिर्फ़ 0.32 फ़ीसदी कम
• मोटा अनाज / मिलेट: 172.96 लाख हेक्टेयर
• कपास: 107.30 लाख हेक्टेयर — 0.89 फ़ीसदी कम
• आँकड़े: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की साप्ताहिक बुवाई रिपोर्ट

दाल और कपास में कोई बड़ा बदलाव नहीं है। दालें 0.32 फ़ीसदी कम हैं — 108 लाख हेक्टेयर के आधार पर यह गिनती में भी मुश्किल से आता है। कपास 0.89 फ़ीसदी कम है। मोटा अनाज 172.96 लाख हेक्टेयर पर है। अगर बारिश हर जगह कम होती, तो गिरावट हर फ़सल में बराबर बँटती। ऐसा नहीं हुआ। पूरी गिरावट धान में बैठी है।

यह ख़बर उतनी बुरी नहीं जितनी दिखती है। रोपाई वाला धान खरीफ़ में सबसे ज़्यादा पानी खींचता है, और जिन राज्यों में सबसे ज़्यादा धान होता है, वहीं भूजल सबसे तेज़ी से नीचे गया है। धान से हटकर दाल, मक्का, तिलहन या मोटे अनाज में जाने वाला हर हेक्टेयर पानी बचाता है, मिट्टी में नाइट्रोजन सुधारता है और फ़सल चक्र छोटा करता है।

थाली पर सीधा असर क्या होगा? चावल का सरकारी भंडार बड़ा है और ख़रीद की व्यवस्था बनी हुई है, इसलिए रकबे की 3.65 फ़ीसदी कमी दुकान के भाव तक बहुत धीरे और बहुत कम पहुँचती है। दाल में इतनी ही कमी होती तो असर कहीं तेज़ होता — और दाल में कमी है ही नहीं। यही इस आँकड़े की सबसे राहत देने वाली बात है।

एक ज़रूरी सावधानी। यह बुवाई की साप्ताहिक रिपोर्ट है, अंतिम आँकड़ा नहीं। देर से बोने वाले ज़िलों में रकबा अभी बढ़ सकता है। और रकबा घटने का मतलब पैदावार घटना नहीं होता — प्रति हेक्टेयर उपज लगातार बढ़ रही है। पैदावार का असली हिसाब पहले अग्रिम अनुमान से मिलेगा, जो अभी कुछ हफ़्ते दूर है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation