ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। कश्मीर घाटी के इतिहास में 1990 का आतंक का दौर आज भी खौफ पैदा करता है। उस दौरान कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया गया था। उसी दौर की एक बर्बर दास्तां स्वतंत्रता सेनानी और कवि सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की भी है। दोनों को घर से अगवा करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और शव पेड़ से लटका दिए गए थे।
अब 36 साल बाद जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने इस दोहरे हत्याकांड की फाइल फिर से खोल दी है। विगत दिवस एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर में 10 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें राजौरी में छह, जम्मू में दो और कश्मीर में दो स्थान शामिल है। सर्वानंद के दूसरे बेटे राजेंद्र कौल ने बताया, ‘उस रात तीन आतंकी घर में घुसे थे। आतंकियों ने मुझे, मेरी मां, छोटे भाई और दो बहनों को एक कमरे में बंद कर दिया। वे पिता और भाई को अगवा कर ले गए और हत्या कर दी। अब 36 साल बाद इंसाफ की उम्मीद जगी है।’ उन्होंने अपील की कि ऐसे सभी पुराने मामलों की फिर से जांच हो और दोषियों को सजा मिले।













