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जर्मनी से 70 हजार करोड़ में 6 पनडुब्बियां खरीदेगा भारत

सरकार से मिली मंजूरी, इजराइल से भी रेम्पेज मिसाइल खरीदी जाएगी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 29, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत सरकार वायु सेना और नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए दो बड़ी डील करने के लिए तैयार हो गई है। पहली डील के तहत रक्षा मंत्रालय और मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड जर्मनी से 6 सबमरीन खरीदने वाली है। सरकार ने प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत भारत में बनने वाली इन पनडुब्बियों की खरीद बातचीत शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह डील 70 हजार करोड़ में हो सकती है।
दूसरी डील इजराइली रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों की बड़ी खेप खरीदने की है। सूत्रों के अनुसार, यह ऑर्डर जल्द ही फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा। रैम्पेज मिसाइलों का इस्तेमाल पाकिस्तान के मुरिदके और बहावलपुर स्थित आतंकवादियों मुख्यालयों पर सटीक हमलों में किया था।
मझगांव डॉकयार्ड में बनेंगी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम वाली सबमरीन
रक्षा मंत्रालय ने जनवरी में जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के साथ एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम वाली छह पनडुब्बियां बनाने के लिए मझगांव डॉकयार्ड को अपना साझेदार चुना था। रक्षा अधिकारियों ने मीडिया से कहा है कि रक्षा मंत्रालय और एमडीएल के बीच इस महीने के आखिर तक यह प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्रालय और भारतीय नौसेना अगले छह महीने में कॉन्ट्रैक्ट पर चर्चा पूरी होने और फाइनल मंजूरी मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय का मकसद देश में पारंपरिक पनडुब्बियों के डिजाइन और मैनुफैक्चरिंग की स्वदेशी क्षमता विकसित करना है।
तीन हफ्ते तक पानी के भीतर
रह सकेंगी एडवांस्ड सबमरीन
ट्रेडिशनल डीजल-इलेक्टि्रक पनडुब्बियां पानी के नीचे ज्यादा देर तक नहीं रह सकतीं। उन्हें कुछ दिनों में सतह पर आकर बैटरी चार्ज करनी पड़ती है, क्योंकि बैटरी केवल लिमिटेड टाइम तक ही चलती है। सतह पर आने वे दुश्मन के रडार और सैटेलाइट की पकड़ में आसानी से आ सकती हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम डेवलप किया गया। एआईपी सिस्टम वाली सबमरीन 3 हफ्ते तक पानी के अंदर रह सकती हैं। भारत की स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बी (कलवरी क्लास) अभी डीजल-इलेक्टि्रक हैं, लेकिन इन्हें डीआरडीओ के फ्यूल सेल बेस्ड एआईपी से लैस किया जाएगा।
एआईपी के प्रकार
स्टर्लिंग इंजन – स्वीडन, जापान: बंद कमरे में ऑक्सीजन और ईंन्धन (जैसे डीजल/ लिक्विड ऑक्सीजन) जलाकर ऊर्जा पैदा करते हैं। शांत और किफायती तकनीक है।
फ्यूल सेल एआईपी – जर्मनी और भारत: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली पैदा करता है। काफी शांत और बिना वाइब्रेशन के, जिससे पनडुब्बी पकड़ में नहीं आती।
क्लोज्ड साइकल डीजल इंजन – फ्रांस : सामान्य डीजल इंजन लेकिन इसमें लिक्विड ऑक्सीजन का इस्तेमाल होता है।
नौसेना अगले 10 साल में 10 सबमरीन रिप्लेस कर सकती है
भारतीय नौसेना अगले दस साल में अपनी लगभग 10 पनडुब्बियों को हटा सकती है। इसी दौरान उनकी जगह नई पनडुब्बियां लाने की की जरूरत होगी, इसके लिए सारी कवायद तेजी से की जा रही है। इसलिए भारत सरकार ने परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह की कई पनडुब्बी परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
भारतीय इंडस्ट्री दो न्यूक्लियर अटैक सबमरीन बनाने पर भी काम रही हैं। इसमें सबमरीन बिल्डिंग सेंटर के साथ प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो की भूमिका अहम होगी।
ऑपरेशन सिंदूर ने बढ़ाया इजराइली
रेम्पेज मिसाइल का रुतबा
ऑपरेशन सिंदूर में मिली सफलता के बाद इजराइली रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों का रुतबा बढ़ गया है। इन मिसाइलों का इस्तेमाल पाकिस्तान के मुरीदके और बहावलपुर के आतंकवादियों ठिकानों पर हमले के लिए किया गया था। इसलिए भारतीय वायुसेना सभी बेड़ों को इससे लैस करने और बाकी प्लेटफॉर्म में एकीकरण की योजना पर भी विचार कर रही है।
एक नजर रेम्पेज मिसाइल की खासियत पर
4.7 मीटर लंबी रैम्पेज मिसाइल का वजन 570 किलो है। इसे हल्का और कॉम्पैक्ट बनाया है ताकि किसी भी फाइटर पर लगाया जा सके। सुपरसोनिक मिसाइल है। मैक 2–3 की स्पीड होने से इसे इंटरसेप्ट करना कठिन है। रेम्पेज मिसाइल की रेंज 150 से 250 किमी तक है। यह दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरबेस, हथियार डिपो और रडार स्टेशनों जैसे हाई-वैल्यू टारगेट्स को सटीकता से नष्ट कर सकती है। इसे एफ-15,एफ-16, एफ-35 और भारत के सुखोई-30 एमकेआई जैसे जेट्स से लॉन्च किया जा सकता है।

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