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भारत का एससीओ बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार

बिना साझा बयान के ही समाप्त हो गया रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2025
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहलगाम आतंकवादी हमले को नजरअंदाज करने और पाकिस्तान समर्थित सीमा पार आतंकवाद पर भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से संबोधित नहीं करने को लेकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। मामले से परिचित व्यक्तियों ने बताया कि एससीओ आम सहमति के तहत काम करता है, लिहाजा वक्तव्य का समर्थन करने से राजनाथ के इनकार के परिणामस्वरूप एससीओ रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन संयुक्त वक्तव्य जारी किए बिना ही समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि मसौदा वक्तव्य में न तो पहलगाम आतंकवादी हमले का उल्लेख किया गया और न ही सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत के रुख का जिक्र किया गया।
सम्मेलन में अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की तथा आतंकवाद के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कुछ देश सीमा पार आतंकवाद को नीति के एक साधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और आतंकवादियों को पनाह देते हैं। ऐसे दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। एससीओ को ऐसे देशों की आलोचना करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में बदलाव की व्यापक रूपरेखा रखी और एससीओ सदस्य देशों से आतंकवाद से लड़ने के लिए एकजुट होने तथा ‘दोहरे मानदंडों’ को त्यागने का आग्रह किया। सम्मेलन में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून भी शामिल हुए। शांति व समृद्धि आतंकवाद और सरकार से इतर तत्वों तथा आतंकवादी समूहों के हाथों में सामूहिक विनाश के हथियार देने की नीति साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा, इन चुनौतियों से निपटने के लिए निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है। अपने संकीर्ण व स्वार्थी उद्देश्यों के लिए आतंकवाद को प्रायोजित, पोषित और उपयोग करने वालों को इसके परिणाम भुगतने होंगे। सिंह ने यह भी कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले का तरीका भारत में लश्कर-ए-तैयबा के पिछले आतंकवादी हमलों के जैसा था। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद से बचाव और सीमा पार से होने वाले हमलों को रोकने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया।

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उन्होंने कहा, ‘पहलगाम आतंकी हमले के दौरान, पीड़ितों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर गोली मारी गई थी। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट ने हमले की जिम्मेदारी ली। पहलगाम हमले का तरीका भारत में लश्कर-ए-तैयबा के पिछले आतंकवादी हमलों के जैसा था। भारत की आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति उसके कार्यों से प्रदर्शित होती है।’ उन्होंने कहा, ‘इस नीति में आतंकवाद से खुद का बचाव करने का हमारा अधिकार भी शामिल है।

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