ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में खरीफ सीजन के दौरान मक्का का रकबा 13 प्रतिशत से अधिक घटने के कारण वर्ष 2026-27 में सरकार के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ने की संभावना है। 30 सितंबर को चीनी सीजन समाप्त होने तक चीनी का समापन भंडार काफी कम रहने की आशंका जताई जा रही है। इससे वैकल्पिक मुख्य स्रोत के रूप में विशेषकर कुछ गैर-बासमती चावल किस्मों की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है, जिनकी मांग पहले ही बढ़ने लगी है।
सरकार को पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ईबीपी) लक्ष्य हासिल करने के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की आवश्यकता होगी। देश में करीब 2,000 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन क्षमता विकसित की जा चुकी है, जिसमें लगभग 900 करोड़ लीटर क्षमता चीनी उद्योग के पास है, जबकि शेष क्षमता अनाज आधारित इकाइयों के पास है। ताजा फसल कवरेज आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष गन्ने की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और 57.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती दर्ज की गई है, जबकि 2025 में अंतिम गन्ना क्षेत्रफल 58.84 लाख हेक्टेयर था।
शीर्ष तीन गन्ना उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश में 28.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना बोया गया है, जो पिछले वर्ष 28.61 लाख हेक्टेयर था। महाराष्ट्र में यह बढ़कर 11.82 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले वर्ष 11.47 लाख हेक्टेयर था। कर्नाटक में गन्ना क्षेत्रफल 6.08 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.61 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। इसके विपरीत, 24 जुलाई तक देशभर में मक्का का क्षेत्रफल 9.7 प्रतिशत घटकर 77.79 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 86.15 लाख हेक्टेयर था। हालांकि मध्य प्रदेश में मक्क ा का रकबा 8.2 प्रतिशत बढ़कर 25.61 लाख हेक्टेयर हो गया है।
धान की बुवाई के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश में 4.2 प्रतिशत वृद्धि के साथ 57.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई है। पंजाब में 31.66 लाख हेक्टेयर, बिहार में 36.4 प्रतिशत वृद्धि के साथ 17.58 लाख हेक्टेयर, असम में 73 प्रतिशत बढ़कर 11.68 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 6 प्रतिशत वृद्धि के साथ 4.74 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान बोया गया है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में धान का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 1 से 1.6 लाख हेक्टेयर कम है, लेकिन वर्तमान वर्षा के बाद इसमें सुधार की संभावना जताई जा रही है। वहीं मध्य प्रदेश में धान का क्षेत्रफल 29 प्रतिशत घटकर 19.54 लाख हेक्टेयर रह गया है।














