ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इथेनॉल ब्लेंडिंग की राष्ट्रीय नीति बनने से पांच दशक पहले ही तमिलनाडु के इंजीनियरों ने यह साबित कर दिया था कि कारों, दोपहिया वाहनों और बसों को इस ईंन्धन पर चलाया जा सकता है।
1970 में तमिलनाडु के इंजीनियरों ने कारों, दोपहिया वाहनों और बसों को 100% इथेनॉल पर चलाने के लिए उनमें बदलाव किए थे। उन्होंने चेन्नई-ऊटी-कन्याकुमारी के बीच 2,000 किमी की यात्रा में इस तकनीक का परीक्षण किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इसका प्रदर्शन भी दिखाया लेकिन खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया। अब, पांच दशक बाद, जब भारत इथेनॉल-ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रहा है, तो अन्ना यूनिवर्सिटी इस रिसर्च को फिर से शुरू करने की योजना बना रही है।
प्रयोग तब शुरू हुआ, जब 1973 में पेट्रोल की कीमतें ₹4 प्रति लीटर से बढ़कर ₹6 प्रति लीटर हो गईं। ईंन्धन की बढ़ती लागत को देखते हुए, तमिलनाडु सरकार ने कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी (सीईजी) की ‘इंटरनल कंबशन इंजन (आईसीई) लेबोरेटरी’ के प्रोफेसरों से वैकल्पिक ईंन्धनों की तलाश करने को कहा।
प्रोफेसर टी. आर. जगदीसन के नेतृत्व वाली एक टीम ने पेट्रोल इंजनों में बदलाव करके उन्हें 100% इथेनॉल पर चलने लायक बनाया। इसके लिए उन्होंने कार्बोरेटर, इग्निशन सिस्टम, और कूलिंग व हीटिंग सिस्टम को बदल दिया। जगदीसन कहते हैं, “पेट्रोल इंजन के लिए इथेनॉल एक अच्छा ईंन्धन है।
इसकी फ्लेम स्पीड (लपट की गति) काफी तेज होती है और यह जलते समय काला धुआं नहीं छोड़ता है। इसकी मुख्य कमी माइलेज है। इथेनॉल से मिलने वाली हीट एनर्जी (ऊष्मीय ऊर्जा), पेट्रोल से मिलने वाली ऊर्जा का लगभग 60% ही होती है। और इसका असर माइलेज पर पड़ता है। टीम के रोड टेस्ट में यह अंतर साफ तौर पर दिखा। 1979 के एक ट्रायल में, एक कार ने पेट्रोल पर 11.46 किमी प्रति लीटर का माइलेज दिया, जबकि इथेनॉल पर यह 7.2 किमी प्रति लीटर रहा। हाईवे पर यही आंकड़े क्रमशः 14.9 किमी प्रति लीटर और 9.38 किमी प्रति लीटर थे। 21 जनवरी 1980 को शहर की सड़कों पर किए गए एक टेस्ट में, रिसर्च टीम को दी गई एक एंबेसडर कार ने पेट्रोल पर 9.54 किमी प्रति लीटर का माइलेज दिया, जबकि इथेनॉल पर यह 6.2 किमी प्रति लीटर था।
रिसर्चर्स ने पाया कि इंजन में कुछ बदलाव करके इथेनॉल की परफॉरमेंस को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने एक फिएट कार के इंजन का कम्प्रेशन रेशियो 7:1 से बढ़ाकर 11:1 कर दिया और इसके कार्बोरेटर तथा अन्य पुर्जों में भी बदलाव किए।














