नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने लाखों यूपीएससी एस्पिरेंट्स के दिल में उम्मीद की एक नई लौ जगा दी है। यह वीडियो किसी फिल्मी सीन या मोटिवेशनल स्पीच का नहीं, बल्कि सड़क पर हुई एक छोटी-सी, बेहद सहज बातचीत का है, जिसने इंटरनेट पर तूफान मचा दिया। यह वीडियो है आईएएस अफसर परी बिश्नोई का जो फिलहाल सिक्कि म में एडिशनल डिस्टि्रक्ट मजिस्ट्रेट की कुर्सी संभाल रही हैं। हुआ यूं कि मशहूर स्ट्रीट फोटोग्राफर अंकित कुमार सड़क पर घूमते हुए लोगों से उनका प्रोफेशन पूछ रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर दो वर्किंग विमेन पर पड़ी, जो इत्मिनान से टहल रही थीं। जैसे ही अंकित ने माइक आगे बढ़ाया इनमें से एक ने खुद को आईएएस परी बिश्नोई बताया। यह सुनते ही अंकित का उत्साह बढ़ गया और उन्होंने तुरंत सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कुछ टिप्स मांग डाले। परी ने जो जवाब दिया वह इतना सीधा और दिल को छू लेने वाला था कि देखते ही देखते यह क्लिप वायरल हो गई।
दरअसल, सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले लाखों उम्मीदवार अक्सर किताबों के बोझ से कहीं ज्यादा कम्पिटिशन के खौफ से टूट जाते हैं। दिल्ली के मुखर्जी नगर से लेकर प्रयागराज की गलियों तक, हर एस्पिरेंट के जेहन में एक ही सवाल घूमता रहता है, इतने काबिल लोग तैयारी कर रहे हैं, आखिर मेरा नंबर कैसे लगेगा? यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 30 हासिल कर चुकीं परी बिश्नोई ने इसी डर को नए सिरे से समझाने की कोशिश की।
शुरुआत मुझे भी डर लगा था
परी बिश्नोई खुलकर बताती हैं कि जब उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की, तो उनके मन में भी घबराहट थी। देश की टॉप यूनिवर्सिटीज से आए तेज-तर्रार अभ्यर्थियों को देखकर किसी का भी हौसला डगमगा सकता है, यह बात वह बखूबी समझती हैं। उनका कहना है कि वह किसी बड़े नाम वाले स्कूल-कॉलेज से नहीं, बल्कि एकदम आम पृष्ठभूमि से आई हैं। तैयारी शुरू करते वक्त उनके मन में भी सबसे पहला खयाल यही आया था कि इतनी भीड़ में उनकी जगह कहां बनेगी लेकिन इस शुरुआती हिचकिचाहट के बावजूद उन्होंने न तो आत्मविश्वास खोया और न ही सही रणनीति के साथ पढ़ाई करना छोड़ा।
भ्रम भी तोड़ा
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए परी बिश्नोई ने एक दिलचस्प भ्रम भी तोड़ा। उनके मुताबिक, परीक्षा का दबाव स्टूडेंट्स के दिमाग पर इतना हावी हो जाता है कि वे कॉम्पिटिशन के दायरे को असल से कहीं ज्यादा बड़ा मान बैठते हैं।













