वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सरकार ने एच-1बी वीजा के लिए नया प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक एच-1बी वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को हर वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर (करीब 98 लाख रुपए) की एक्सट्रा फीस देनी होगी।
एच-1बी एक गैर-अप्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां कुछ समय के लिए विदेशों से हाई स्किल वाले पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं।
इस फीस से एच-1बी वीजा लेना पहले के मुकाबले बहुत महंगा हो जाएगा। पहले एच-1बी वीजा लेने में आमतौर पर करीब 2,000 से 5,000 डॉलर (करीब 1.9 लाख से 4.7 लाख रुपए ) तक फीस लगती थी। यह रकम अलग-अलग मामलों में अलग हो सकती थी। यह नया नियम साल के आखिर तक लागू किया जा सकता है। अगर यह लागू हो जाता है तो इसका सीधा असर भारतीयों पर पड़ेगा, क्योंकि इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स करते हैं।
कोर्ट ने फीस को गैरकानूनी बताया था
पिछले साल ट्रम्प ने एक अस्थायी आदेश के जरिए यह फीस लागू की थी लेकिन जून में अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने इसे गैरकानूनी बताते हुए अमेरिकी सरकार को फीस वसूलने से रोक दिया था। अब बोस्टन की एक अपीलीय अदालत इस फैसले की समीक्षा कर रही है। वहीं, वॉशिंगटन डीसी की एक दूसरी अदालत इस मामले में एक बड़े कारोबारी संगठन की याचिका पर फैसला देख रही है।
नए प्रस्ताव में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को फीस को स्थायी बनाने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया गया है। यानी सरकार अब इसे हमेशा के लिए कानून बनाने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 19 सितंबर 2025 को एच-1बी वीजा को लेकर नियमों में बदलाव से जुड़े ऑर्डर पर साइन किया था।
आवेदनों में 25% से ज्यादा गिरावट
पिछले साल कंपनियों ने करीब 3.44 लाख एच-1बी वीजा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। यह 2024 के मुकाबले 25% से ज्यादा कम था।














