नई दिल्ली, 30 अक्टूबर। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की जेब में अब हर महीने कुछ ज्यादा पैसा आएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर को महंगाई भत्ता और महंगाई राहत 3 फीसदी बढ़ाने का फैसला किया। वित्त मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक अब यह मूल वेतन या पेंशन का 63 फीसदी होगा। अब तक यह 60 फीसदी था।
बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से लागू मानी जाएगी। इसका मतलब है कि जुलाई से अक्टूबर तक चार महीने का बकाया भी मिलेगा।
18,000 रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी को हर महीने 540 रुपये ज्यादा मिलेंगे। जुलाई से बकाया भी मिलेगा। फायदा 1.17 करोड़ लोगों को।
किसे कितना फायदा
सातवें वेतन आयोग में सबसे कम मूल वेतन 18,000 रुपये है। इस पर 3 फीसदी का मतलब है 540 रुपये महीना ज्यादा। चार महीने का बकाया जोड़ें तो 2,160 रुपये बनते हैं।
9,000 रुपये न्यूनतम पेंशन पाने वाले को हर महीने 270 रुपये ज्यादा मिलेंगे। जिसका मूल वेतन ज्यादा है, उसे उसी हिसाब से ज्यादा रकम मिलेगी।
फायदा 48.54 लाख कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनभोगियों को होगा। यानी कुल करीब 1.17 करोड़ लोग। ध्यान देने वाली बात यह है कि पेंशनभोगी कर्मचारियों से 42 फीसदी ज्यादा हैं।
सरकार पर कितना खर्च
इस फैसले पर सालाना 10,016.10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हमारे हिसाब से यह हर लाभार्थी पर औसतन करीब 8,540 रुपये साल बैठता है।
महंगाई भत्ता महंगाई की भरपाई के लिए दिया जाता है। इसकी दर साल में दो बार तय होती है। विज्ञप्ति के मुताबिक यह बढ़ोतरी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित तय फॉर्मूले से की गई है।
भारत को क्या मिला
त्योहारों के बाद के महीनों में 1.17 करोड़ लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा होगा। यह पैसा बाजार में लौटता है। छोटे शहरों की दुकानों तक इसका असर पहुंचता है।
ब्लिट्ज की सलाह
पेंशनभोगियों तक बकाया जल्दी पहुंचे, इसके लिए बैंक और पेंशन कार्यालय एक तय तारीख घोषित कर सकते हैं। इससे बुजुर्गों को बार-बार बैंक नहीं जाना पड़ेगा।
पंचायतों के लिए 7,395 करोड़ की योजना
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर।गांव की पंचायत अब अपने विकास की योजना खुद बनाएगी और ऑनलाइन दर्ज करेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी। पीआईबी की जानकारी के मुताबिक इस पर 2026-27 से 2030-31 तक 7,395.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें केंद्र का हिस्सा 4,869.48 करोड़ और राज्यों का 2,526.07 करोड़ रुपये है। यानी करीब दो-तिहाई खर्च केंद्र उठाएगा। योजना 2.55 लाख से ज्यादा पंचायतों के करीब 32 लाख चुने हुए प्रतिनिधियों और कर्मचारियों तक पहुंचेगी।
हर साल 2.55 लाख से ज्यादा ग्राम विकास योजनाएं ई-ग्रामस्वराज पर और इतनी ही ऑडिट योजनाएं ऑनलाइन दर्ज होंगी। रेल और सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे सोच में बड़ा बदलाव बताया।
भारत को फायदा
गांव का पैसा, गांव की योजना और उसका हिसाब, सब एक जगह और सबके सामने।

रक्षा खरीद : 82% देसी उद्योग से
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर।सेना के लिए ड्रोन, ड्रोन मार गिराने वाले सिस्टम और हेलिकॉप्टर अब ज्यादातर देश में बने होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 26 अक्टूबर को करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये की खरीद के प्रस्तावों को शुरुआती मंजूरी दी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इसमें से करीब 82 फीसदी खरीद भारतीय उद्योग से होगी। हमारे हिसाब से यह करीब 1.74 लाख करोड़ रुपये बनता है। सूची में लंबी दूरी के कामिकाजे ड्रोन, टैंकों पर लगने वाला एंटी-ड्रोन सिस्टम और मिसाइल को भटकाने वाला नौसेना का डिकॉय सिस्टम शामिल है।
यह खरीद की पहली सीढ़ी है। टेंडर, परीक्षण और कीमत तय होने के बाद ही सौदे होंगे।
भारत को फायदा
हथियार देश में बनेंगे तो रोजगार, हुनर और कलपुर्जे भी देश में रहेंगे।
खेल सामान बनाने पर 1,856 करोड़
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर। जालंधर और मेरठ में बल्ले, गेंद और खेल का सामान बनाने वाले छोटे कारखानों के लिए अच्छी खबर है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को 1,856.67 करोड़ रुपये की खेलो इंडिया खेल सामान विनिर्माण योजना मंजूर की।
पीआईबी के मुताबिक देश में खेल के सामान का करीब 90 फीसदी उत्पादन छोटे और सूक्ष्म उद्यम करते हैं। योजना में 300 एकड़ से बड़े चार विनिर्माण जोन बनेंगे। अभी खेल उपकरण का निर्यात 27.5 करोड़ डॉलर है। 2036 तक इसे करीब 810 करोड़ डॉलर तक ले जाने का अनुमान है, यानी करीब 29 गुना।
योजना से 2036 तक करीब 54 लाख रोजगार बनने का अनुमान है।
भारत को फायदा
छोटे शहरों का हुनर दुनिया के बाजार तक।

एक बूंद खून से दो जांच
मुंबई, 30 अक्टूबर। आदिवासी इलाकों में सिकल सेल की जांच के लिए अब बड़ी लैब का इंतजार शायद न करना पड़े। आईआईटी बॉम्बे के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ने खून की एक बूंद से खून की कमी (एनीमिया) और सिकल सेल रोग पहचानने का तरीका बनाया है।
प्रोफेसर महेश एस. तिरुमकुडुलु की टीम का यह शोध रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री की पत्रिका ‘लैब ऑन अ चिप’ में छपा है। पीटीआई और फ्री प्रेस जर्नल ने 23 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी।
तरीका सीधा है। गाढ़ा खून कांच की स्लाइड पर कम फैलता है। स्लाइड पर खून की लकीर की लंबाई से पता चलता है कि हीमोग्लोबिन कितना है। 516 लोगों पर गंभीर एनीमिया के 95.1 फीसदी मामले पकड़े गए। महाराष्ट्र और मध्य भारत के आदिवासी इलाकों में 394 लोगों पर करीब 95 फीसदी नतीजे सही निकले।
जांच को अभी मंजूरी नहीं मिली है। यह तकनीक स्टार्टअप रियोहीम प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। वह आईसीएमआर-एनआईआरटीएच जबलपुर और एम्स नागपुर के साथ मंजूरी की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। एक जांच की कीमत अभी घोषित नहीं हुई है।
भारत को फायदा
जहां लैब नहीं, वहां भी जांच।














