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‘आपराधिक अदालतें अपने फैसलों में संशोधन नहीं कर सकतीं’

- दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद किया सर्वोच्च अदालत ने

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 29, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है कि आपराधिक अदालतें लिपिकीय या अंकगणितीय त्रुटियों को ठीक करने के अलावा अपने निर्णयों को वापस नहीं ले सकतीं।
चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद कर दिया जिसमें लंबे समय से चल रहे विवाद में झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने की याचिका खारिज करने के अपने पहले के फैसले को वापस ले लिया गया था। सीआरपीसी के तहत परिकल्पित आपराधिक अदालतों को अपने स्वयं के निर्णयों को बदलने या समीक्षा करने से रोक दिया गया है, सिवाय उन अपवादों को छोड़कर, जो कानून द्वारा स्पष्ट रूप से प्रदान किए गए है।
मामले की पृष्ठभूमि : बख्शी और खोसला समूहों ने मॉन्ट्रो रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कसौली में एक रिसॉर्ट विकसित करने के लिए दिसंबर 2005 में समझौता किया। मार्च 2006 के एक समझौते ने विक्रम बख्शी को 51% हिस्सेदारी दी और विनोद सुरहा और वाडिया प्रकाश को बोर्ड में रखा।
विवाद तब उठे जब सोनिया खोसला ने दावा किया कि उनकी हिस्सेदारी 49% से घटकर 36% हो गई है और 2007 में कंपनी लॉ बोर्ड (सीएलबी) के समक्ष उत्पीड़न और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कंपनी की याचिका दायर की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बख्शी समूह द्वारा दायर एजीएम मिनट्स फर्जी थे और धारा 340 सीआरपीसी के तहत झूठी गवाही के लिए मुकदमा चलाने की मांग की।
2014 में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि कंपनी की याचिका और झूठी गवाही के आवेदन, दोनों पर सीएलबी (अब एनसीएलटी) द्वारा फैसला किया जाए और उच्च न्यायालय को आगे की कार्यवाही से रोक दिया जाए। 2019 में आरपी खोसला ने हाईकोर्ट में एक और आवेदन दायर किया जिसमें आरोप लगाया गया कि बख्शी ग्रुप ने संबंधित अवमानना कार्यवाही में झूठा जवाबी हलफनामा दायर किया था। हाईकोर्ट ने 2014 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए अगस्त 2020 में इसे खारिज कर दिया था। खोसला समूह ने तब वापस लेने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि कंपनी की याचिका फरवरी 2020 में वापस ले ली गई थी, लेकिन इस तथ्य को पहले अदालत के सामने नहीं रखा गया था। हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया और 5 मई, 2021 को अपने फैसले को वापस ले लिया, जिससे वर्तमान अपील को प्रेरित किया गया।

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