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चीनी रोबोट से यूएस में की गई सर्जरी

दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संकट दूर करने में मिलेगी मदद

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 27, 2026
in प्रौद्योगिकी ब्यूरो
0
चीनी रोबोट से यूएस में की गई सर्जरी

ब्लिट्ज ब्यूरो

कैलिफोर्निया। अमेरिकी डॉक्टरों ने चीन में बने रोबोट की मदद से ‘की-होल सर्जरी’ की, जिसमें रोबोट ने मुख्य सर्जन की भूमिका निभाई।

यूनिट्री रोबोटिक्स द्वारा बनाए गए इस सामान्य-उद्देश्य वाले ह्यूमनॉइड रोबोट को दो इंसानी सर्जनों ने दूर से नियंत्रित किया। इस रोबोट ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो में सफलतापूर्वक एक सुअर के पित्ताशय को निकाला।

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इस प्रक्रिया के दौरान एक अन्य रोबोट ने भी सहायक की भूमिका निभाई; उसने ऑपरेशन की निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाले एंडोस्कोप को नियंत्रित किया और ऊतकों को हटाने का काम किया।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के इलेक्टि्रकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और इस सर्जरी पर आधारित शोध पत्र के वरिष्ठ लेखक माइकल यिप ने कहा, दूर से संचालित और स्वायत्त (ऑटोनॉमस) ह्यूमनॉइड रोबोट में उन महत्वपूर्ण सर्जरी तक पहुंच बढ़ाने की वास्तविक क्षमता है, जिनसे मरीज अन्यथा वंचित रह जाते।

चिकित्सकों ने बताया, इससे न केवल अमेरिका में, बल्कि दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संकटों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
‘सर्जी’ उपनाम वाला यह रोबोट ‘यूनिट्री जी1’ पर आधारित है – यह एक ह्यूमनॉइड है जिसकी ऊंचाई लगभग 1.5 मीटर (5 फीट) और वजन लगभग 27 किलोग्राम (60 पाउंड) है।

टीम ने सर्जरी के लिए रोबोट में कुछ बदलाव किए और एक ऐसा एडॉप्टर डिज़ाइन किया जिससे उसके हाथ उन उपकरणों को पकड़ सकें जिनका इस्तेमाल इंसानी सर्जन करते हैं।

पारंपरिक सर्जिकल रोबोट, जैसे कि ‘डा विंची सर्जिकल सिस्टम’ विशेष कार्यों के लिए बने होते हैं, महंगे होते हैं और काफी जगह घेरते हैं।

‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, दूर से संचालित (टेली-ऑपरेटेड) यूनिट्री रोबोट भी उन्हीं विशेष सर्जिकल रोबोटों जैसी सटीकता के साथ काम करता है।

वे इंसानों के लिए डिज़ाइन किए गए उपकरणों और सुविधाओं का भी उपयोग कर सकते हैं जिससे लागत कम करने में मदद मिलती है।

टीम ने सुअरों के पित्ताशय को निकालने के लिए दो ‘की-होल’ ऑपरेशन किए – इस प्रक्रिया को ‘लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी’ कहा जाता है। इस अध्ययन के पहले लेखक कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट कर रहे चीनी छात्र लियांग जेकाई थे।

एक ऑपरेशन में, एक जी1 रोबोट ने एक इंसानी सहायक सर्जन के साथ मिलकर काम किया। दूसरे ऑपरेशन में, दो जी1 रोबोटों ने मिलकर प्रक्रिया पूरी की।

हालांकि ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरे हो गए, लेकिन टीम को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जी1 से की गई प्रक्रिया में इंसानों या मौजूदा रोबोटिक सिस्टम के मुकाबले काफी ज़्यादा समय लगा। इसकी एक वजह यह थी कि प्रक्रिया के दौरान रोबोट को कई बार रीकैलिब्रेट और रीपोजिशन करना पड़ा और इंसानी सर्जन के उलट, वे आसानी से और लगातार मूवमेंट नहीं कर सकते।

दूसरी प्रक्रिया में पित्त का हल्का रिसाव और लिवर बेड से ब्लीडिंग हुई, लेकिन दोनों ही समस्याएं बिना किसी गंभीर जटिलता के ठीक हो गईं। रिसर्चर का मानना है कि और ट्रेनिंग से ऑपरेशन में लगने वाले समय और जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। यूसी सैन डिएगो स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में सर्जरी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. लियू शेंगलेई ने बताया, 1997 में, पहली रोबोटिक लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी में छह घंटे लगे थे। अब, जी1 रोबोट से इसमें सिर्फ़ 30 मिनट लगते हैं। उन्होंने ही स्टडी के दौरान रोबोट को ऑपरेट किया था और वे इस पेपर के सह-लेखक भी हैं। इसे कहीं भी इस्तेमाल करना आसान है। ग्रामीण इलाकों से लेकर युद्ध के मैदान और यहां तक कि अंतरिक्ष में भी।

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