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अब भारतीयों पर निर्भर ब्रिटेन की आर्थिक प्रगति

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 3, 2023
in दृष्टिकोण
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Britain's economic progress now depends on Indians

Alok-Mehtaसमय चक्र कितना बदल रहा है, इसकी झलक ब्रिटेन की वर्तमान अर्थ व्यवस्था और राजनीति को देखकर समझा जा सकता है। एक समय था जब इंग्लैंड भारत पर राज करता था, हमारा बजट तय करता था, यहां तक कि अकाल की भयावह स्थिति में भी भारत का अनाज भूखे ब्रिटिश सैनिकों के पेट भरने के लिए ले जाता था और हमारे यहां अकाल (1943) में लाखों लोग मर गए। आज वही ब्रिटेन भारतीय मूल के अरबपति व्यापारिक समूहों, भारत के साथ करीब 36 अरब पाउंड्स के व्यापारिक संबंधों , देश के बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, होटल उद्योग जैसी मूलभूत व्यस्वस्था के लिए भारतीय मूल के पेशेवर लोगों पर निर्भर हो रहा है | देश की राजनीति पर भी भारत के साथ संबंधों का गहरा असर है |

हिन्दू होने पर गर्व करने वाले प्रधानमंत्री और संसद में भारतीय मूल के 15 सांसद हैं। मुझे 1977 से अब तक 45 वर्षों में कई बार निजी अथवा ब्रिटिश सरकार के निमंत्रण या भारतीय प्रधानमंत्रियों के साथ ब्रिटेन जाने के अवसर मिले हैं। इस बार कुछ अंतराल के बाद दो सप्ताह की निजी यात्रा पर जाने का अवसर मिला, तो कई सुखद अनुभव हुए और भारत के बढ़ते सामाजिक आर्थिक प्रभाव की झलक मिली। यात्रा के दौरान भारत में उच्चायुक्त रह चुके मार्क रुनक्रेस, नेहरू सेंटर के निदेशक और प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी सहित विभिन्न क्षेत्रों के कुछ विशेषज्ञों से बातचीत का अवसर भी मिला।
लंदन में बदलाव का एक बड़ा प्रमाण इसी महीने शुरू हुए भव्य ‘ रैफल ‘ होटल को देखकर मिला| होटल की कॉफ़ी शॉप में दो घंटे बिताए।

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तब मालूम हुआ कि ऐतिहासिक ‘ओल्ड वार ऑफिस’ की इमारत को भारतीय मूल के जीपी हिंदुजा के पारिवारिक समूह ने खरीद कर होटल का रूप दिया है। हिंदुजा बंधुओं ने वर्ष 2006 में लंदन की कार्लटन हाउस टेरेस स्ट्रीट पर 25 बेडरूम वाला एक बड़ा घर 5.8 करोड़ डॉलर में खरीदा था। फिर द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के युद्ध कार्यालय की इमारत को हिंदुजा समूह ने आठ साल पहले खरीदा था। विंस्टन चर्चिल का पुराना युद्ध कार्यालय लंदन में पीएम आवास के सामने व्हाइट हाल बिल्डिंग में स्थित है। हिंदुजा समूह ने रैफल होटल्स के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक इमारत को लग्जरी रिहायशी इमारत, रेस्तरां और स्पा में तब्दील कर दिया है।

– हिंदुजा, टाटा, अंबानी से निवेश पूंजी बढ़ाने का विशेष आग्रह कर रही ब्रिटिश सरकार
– ब्रिटेन की शान हैं हिंदुजा बंधु, वहां के सबसे धनवान लोगों की सूची में शीर्ष पर रहे

हिंदुजा समूह ने फ्रांस के बहुराष्ट्रीय हॉस्पिटैलिटी समूह एकॉर के साथ मिलकर इस होटल को विकसित किया। पुराने युद्ध कार्यालय का निर्माण 1906 में किया गया था। इसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट विलियम यंग ने डिजाइन किया था। इस इमारत में इतिहास के कई प्रभावशाली नेताओं के कार्यालय रहे, जिनमें विंस्टन चर्चिल और डेविड लॉयड जॉर्ज जैसे नाम शामिल हैं। जेम्स बॉन्ड सीरीज की कई फिल्मों में भी यह इमारत दिखाई जा चुकी है और हालिया नेटफ्लिक्स सीरीज ‘द क्राउन’ में भी इसे दिखाया गया था। इस होटल में जिस जगह महान नेताओं के कार्यालय रहे, वहां एक हैरिटेज सुइट बनाया गया है। विंस्टन चर्चिल को भारत में खलनायक माना जाता है।

भारत में विंस्टन चर्चिल को साल 1943 में भूख से हुई लाखों मौतों का जिम्मेदार माना जाता है। चर्चिल ने बंगाल का अनाज विश्व युद्ध लड़ रहे अपने सैनिकों को भेज दिया था, जिसके चलते अनाज की कमी से लाखों लोगों की मौत हो गई। यही वजह है कि उसी चर्चिल के पुराने ऑफिस को भारतीय मूल के परिवार द्वारा खरीदा जाना और उसमें लग्जरी होटल का निर्माण अपने आप में दिलचस्प और गौरवपूर्ण है। ब्रिटेन इस समय आर्थिक कठिनाइयों का भी सामना कर रहा है। ब्रिटिश राज परिवार और सरकार की कई इमारतें बिक रही हैं।

वहीं भारतीय मूल के लोग अधिकाधिक संपत्ति लंदन और अन्य नगरों में खरीद रहे हैं | ब्रिटिश सरकार हिंदुजा, टाटा, अंबानी समूहों से ब्रिटेन में पूंजी, उद्योग लगाने, व्यापार बढ़ाने का विशेष आग्रह कर रही है, ताकि उनके लोगों को अधिक रोजगार भी मिले। ब्रिटेन के सबसे धनवान लोगों की सूची में हिंदुजा बंधु शीर्ष पर रहे हैं। लंदन के ‘द संडे टाइम्स’ की अमीर लोगों की सूची के मुताबिक हिंदुजा बंधुओं के पास 28.472 अरब पौंड की संपत्ति होने का अनुमान है। इनके संबंध दुनिया के प्रमुख नेताओं से रहे हैं जिनमें ईरान के तत्कालीन शाह से लेकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सीनियर, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और वर्तमान प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी शामिल हैं।

इसी तरह श्रीमती इंदिरा गांधी से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न दलों के शीर्ष नेताओं से उनके अच्छे सम्बन्ध रहे हैं। 83 वर्षीय गोपीचंद हिंदुजा ने अपने भाई श्रीचंद पी हिंदुजा के हाल के निधन के बाद हिंदुजा समूह के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला है। वह ऑटोमोटिव, आईटी, मीडिया और मनोरंजन, बुनियादी ढांचा, तेल और विशेष रसायन, बिजली और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में फैले विविध वैश्विक व्यापार साम्राज्य को संभालते रहे हैं। वह व्यापार व प्रतिस्पर्धात्मकता पर विश्व आर्थिक मंच की वैश्विक एजेंडा परिषद के सदस्य हैं और हिंदुजा फाउंडेशन के ट्रस्टी हैं, जो भारत और दुनिया में कई धर्मार्थ प्रयोजनों का समर्थन करता है।

हिंदुजा समूह ऑटोमोटिव, ऊर्जा, वित्त और स्वास्थ्य सेवा सहित उद्योगों की विस्तृत श्रृंखला के साथ एक बहुराष्ट्रीय समूह है। समूह का 60 से अधिक देशों में संचालन है और दो लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। हिंदुजा समूह की स्थापना 1914 में अविभाजित भारत के शिकारपुर के व्यवसायी परमानंद दीपचंद हिंदुजा ने की थी। अब यह दुनिया की सबसे बड़ी निजी स्वामित्व वाली कंपनियों में से एक है।

जब भी कुछ अच्छे अवसर मिलते हैं, तो इसमें किस्मत आजमाते हैं। हिंदुजा का कहना है, ‘ग्रुप में यह माना जाता है कि सब कुछ सबका है, कुछ भी किसी का नहीं है। हमारे पिता ने हमें सिखाया कि यदि आप पैसे कमा रहे हैं, तो आपको कोशिश करनी चाहिए और देखना चाहिए कि कैसे जरूरतमंद लोगों को और समाज को दिया जाए। हम इसे अपने साथ स्वर्ग में ले जाने वाले नहीं हैं। मरना एक दिन सभी को है।’ दूसरी तरफ भारत और ब्रिटेन के आर्थिक विकास पर समूह का कहना है कि फ्यूचर तो ग्रीन, स्थिरता और इलेक्टि्रक वाहन का है। उन्हें लगता है कि पुरानी अर्थव्यवस्था खत्म हो गई है और चीजें बदल गई हैं। इनके पास लगभग 11 टेक्नॉलोजी कंपनियां हैं। वे साइबर सिक्योरिटी पर बहुत ध्यान दे रहे हैं।

कंपनी का नाम सायक्यूरेक्स है और साइबर सुरक्षा का भविष्य बहुत अच्छा है। हिंदुजा ग्रुप के अध्यक्ष गोपीचंद हिंदुजा ने आर्थिक मंचों पर कहा है कि भारत 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी हासिल कर सकता है। लेकिन, इस लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ने के लिए ब्रिटिश काल जैसी ब्यूरोक्रेसी व्यवस्था बदलने की जरूरत है। हिंदुजा ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहतरीन कदम उठाए और उनका नजरिया भी शानदार है, लेकिन उनकी टीम को और तेजी दिखानी होगी। उनकी कंपनी भारत में ज्यादा से ज्यादा निवेश करना चाहती है, क्योंकि दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले यहां सबसे ज्यादा मौके हैं।

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