• Latest
  • Trending
Bhutan King took a dip in Sangam, saw Akshayavat

भूटान नरेश ने संगम में लगाई डुबकी, अक्षयवट के दर्शन किए

February 9, 2025
यशोभूमि, नई दिल्ली में 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 8 अक्टूबर 2026। श्रेय : पीएमओ (pmindia.gov.in)

किसान के फोन पर किस्त, हर जिले में 5जी

October 8, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

कर्ज महंगा, पर अर्थव्यवस्था 7.1% की रफ्तार पर

October 7, 2026
भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

October 6, 2026
भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा...!

भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा…!

October 5, 2026
jai-shankar

न्यूयॉर्क में दिखी नए भारत की ‘दबंग कूटनीति’

October 5, 2026
संसद का मॉनसून सत्र 2026: हंगामे में बर्बाद हुआ समय और जनता के धन का नुकसान

लोकतंत्र में विपक्ष कितना रचनात्मक

October 5, 2026
अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

October 5, 2026
परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

October 5, 2026
स्लीमनाबाद टनल

विंध्य की धरती को मिलेगा मां नर्मदा का आशीर्वाद, जल सुरंग की खुदाई पूरी

October 5, 2026
ev-scooter

23 रुपए में दिनभर के लिए इलेक्टि्रक स्कूटर

October 5, 2026
सोना 4,550 डॉलर के पार, चांदी भी 67 डॉलर के ऊपर

सोना गिरवी रखकर लोन लेने में यूपी वाले सबसे आगे

October 5, 2026
metro

मुंबई मेट्रो का महाविस्तार: 6 नए रूट पर 374 किमी में 130 स्टेशन

October 5, 2026
Friday, October 9, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

भूटान नरेश ने संगम में लगाई डुबकी, अक्षयवट के दर्शन किए

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 9, 2025
in the blitz
0
Bhutan King took a dip in Sangam, saw Akshayavat
ब्लिट्ज ब्यूरो

महाकुंभनगर। भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। उन्होंने डुबकी लगाने से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य दिया।

सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक, वांगचुक ‘घो’ परिधान (भूटान में पुरुषों का राष्ट्रीय परिधान) में हवाई अड्डे पर पहुंचे जहां मुख्यमंत्री ने नारंगी रंग का शॉल देकर उनका स्वागत किया। बाद में जब भूटान नरेश वांगचुक स्नान के लिए पानी में उतरे तो उन्हें केसरिया रंग के लंबे कुर्ते-पायजामे में देखा गया।

YOU MAY ALSO LIKE

किसान के फोन पर किस्त, हर जिले में 5जी

कर्ज महंगा, पर अर्थव्यवस्था 7.1% की रफ्तार पर

सरकार द्वारा जारी तस्वीरों के मुताबिक, वांगचुक के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी स्वतंत्र देव सिंह और नंद गोपाल गुप्ता नंदी तथा संतोष दास ‘सतुआ बाबा’ ने भी संगम में डुबकी लगाई। संगम में डुबकी लगाने के बाद भूटान नरेश अक्षयवट और बड़े हनुमान मंदिर में भी दर्शन के लिए गये। इसके बाद वांगचुक तथा मुख्यमंत्री, डिजिटल महाकुंभ अनुभूति केंद्र पहुंचे जहां उन्होंने महाकुंभ के डिजिटल स्वरूप का भी अवलोकन किया।

सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक कलाकारों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश कर उनका स्वागत किया। बाद में भूटान नरेश राजभवन पहुंचे थे, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनका गरिमापूर्ण स्वागत किया।

वांगचुक ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भूटान नरेश के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा भी की।
बयान में कहा गया कि भूटान नरेश का यह दौरा भारत-भूटान मित्रता एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। भूटान नरेश और महारानी मार्च 2024 और दिसम्बर 2024 में दिल्ली की यात्रा पर आए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसे पहले नेता हैं जिन्हें भूटान ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द डुक ग्यालपो’ से सम्मानित किया।

जूना अखाड़े में पांच लाख से ज्यादा नागा साधु
म हाकुंभ नगर। गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर आबाद महाकुंभ का महामेला अब पूरे शबाब पर है। देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु यहां की दिव्यता-भव्यता का नजारा लेने के साथ त्रिवेणी के संगम में डुबकी लगाकर खुद को कृतार्थ कर रहे हैं तो सालों साल से चल रही कठोर तपस्या को पूर्णता प्रदान करने की चाहत में साधु-संत धर्म-भक्ति की इस धरती पर पहले से ही धूनी रमाये हुए हैं। महाकुंभ में अखाड़े आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।

खासतौर पर इन अखाड़ों के नागा साधु-संतों का दर्शन कर आशीर्वाद पाने के साथ उनके रहस्यमय संसार को जानने समझने की उत्सुकता श्रद्धालुओं में कुछ ही देखी जा रही है। वे यह जानकर खासा हैरान हो रहे हैं कि केवल जूना अखाड़े में पांच लाख से ज्यादा नागा-संन्यासियों की फौज है। यह तो लगभग सभी को पता है कि देश में साध-संतों के कुल तेरह अखाड़े हैं और इनमें शैव सम्प्रदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला श्री पंचनाम जूना अखाड़ा सबसे बड़ा है। यह अखाड़ा उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 1145 में स्थापित हुआ था। यह नागा साधुओं के लिए विश्वभर में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
इसमें नागा संत-संन्यासियों की तादाद पांच लाख से ज्यादा मानी जाती है। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी हैं। वह एक लाख से ज्यादा नागा संन्यासियों को दीक्षा दे चुके हैं। बेहद अनुशासित माने जाने वाले जूना अखाड़ा के साथ संत-संन्यासियों को कठोर नियमों और परम्पराओं का पालन करना होता है। नागा साधुओं का इतिहास पुराना है। भभूत से

लिपटे हुए, माथे पर तिलक, हाथ पैरों में कड़ा, हाथों में त्रिशूल और हर दम ‘हर हर महादेव’ का उद्घोष करने वाले नागा संन्यासी कठोर तपस्या और कठिन परीक्षा के बाद ही अपने असल रूप को धारण कर पाते हैं। धर्म की रक्षा के लिए नागा साधु-संन्यासी अस्त्र धारण करते हैं। त्रिशूल, तलवार और भाला उनके प्रमुख अस्त्र हैं। त्रिशूल भगवान शिव का प्रिय अस्त्र है और इसे शक्ति, सृष्टि और विनाश का प्रतीक माना जाता है। वहीं तलवार और भाला वीरता व साहस के प्रतीक हैं। नागा साधु-संन्यासी धर्मरक्षा के साथ आत्मरक्षा के लिए भी इन अस्त्रों को साथ रखते हैं।
त्याग-तपस्या के साथ संकल्प- साहस और बलिदान के उनकी कई गाथाएं हैं। महाकुंभ की दिव्यता और भव्यता के साझीदार बन रहे विदेशी श्रद्धालुओं में भी नागा-संन्यासियों के जीवन और उनके कठिन त्याग तपस्या के बारे में जानने की खासी ललक देखी गई। उनकी वीरता और जुझारूपन की कई गाथाएं प्रचलित हैं। बानगी के तौर पर कुछ गाथाओं का जिक्र किया जा सकता है। काबुल और बलूचिस्तान की ओर से आक्रमण कर जोधपुर तक आए आक्रमणकारियों से उस समय नागाओं ने ही इस जगह को बचाया था। कहा जाता है कि उस समय मंदिर तोड़े जा रहे थे और लोग मारे जा रहे थे। मुगल शासकों ने हर व्यक्ति पर भारी कर लगा दिया था। तब अटल संन्यासियों ने उन्हें परास्त किया था।

अखाड़ों के अपने अपने नियम-कानून
अखाड़े अपने अलग-नियम और कानून से संचालित होते हैं। यहां जुर्म करने वाले साधुओं को अखाड़ा परिषद सजा देता है। छोटी चूक के दोषी साधु को अखाड़े के कोतवाल के साथ गंगा में पांच से लेकर 108 डुबकी लगाने के लिए भेजा जाता है। डुबकी के बाद वह भीगे कपड़े में ही देवस्थान पर आकर अपनी गलती के लिए क्षमा मांगता है, फिर पुजारी पूजा स्थल पर रखा प्रसाद देकर उसे दोषमुक्त करते हैं। विवाह, हत्या या दुराचार जैसे मामलों में उसे अखाड़े से निष्कासित कर दिया जाता है। अगर अखाड़े के दो सदस्य आपस में लड़ें भिड़ें, कोई नागा साधु विवाह कर ले या दुराचार का दोषी हो, छावनी के भीतर से किसी का सामान चोरी करते हुए पकड़े जाने, देवस्थान को अपवित्र करे या वर्जित स्थान पर प्रवेश, कोई साधु किसी यात्री या यजमान से अभद्र व्यवहार करे, अखाड़े के मंच पर कोई अपात्र चढ़ जाए तो उसे अखाड़े की ‘अदालत’ सजा देती है। अखाड़े का जो सदस्य इस कानून का पालन नहीं करता उसे निष्काषित कर दिया जाता है।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation