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पदकों की संख्या से आगे भारत की असली सफलता

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 10, 2026
in खेल
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भारत का राष्ट्रमंडल खेल प्रदर्शन

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत के ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल-2026 के प्रदर्शन का आकलन केवल जीते गए पदकों की संख्या के आधार पर नहीं किया जा सकता। भारत ने कुल 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। वर्ष 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 61 पदक जीते थे। पहली नजर में यह कमी निराशाजनक लग सकती है, लेकिन केवल आंकड़े पूरी कहानी नहीं बताते।

ग्लासगो में इस बार केवल 10 खेलों को शामिल किया गया था, जबकि बर्मिंघम में 19 खेल आयोजित हुए थे। भारत को परंपरागत रूप से अधिक पदक दिलाने वाले निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और हॉकी जैसे खेल इस बार प्रतियोगिता का हिस्सा ही नहीं थे। उल्लेखनीय है कि बर्मिंघम में भारत के 61 में से 30 पदक केवल इन्हीं पांच खेलों से आए थे। इसलिए ग्लासगो में पदकों की संख्या कम होना स्वाभाविक था।

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वास्तव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि बदली हुई परिस्थितियों के बावजूद भारत ने अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखी, शीर्ष चार देशों में स्थान हासिल किया और पारंपरिक खेलों से आगे बढ़कर नए खेलों में भी अपनी बढ़ती ताकत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

नए खेलों में भारत की बढ़ती ताकत
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों ने स्पष्ट कर दिया कि भारत का खेल आधार अब पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो रहा है।
विशेष रूप से मुक्के बाजी में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। भारतीय मुक्के बाजों ने कुल 10 पदक, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं, जीतकर नया इतिहास रच दिया।

इसी तरह जूडो में भारत ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की, जबकि एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की पदक संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

ये नतीजे इस बात का संकेत हैं कि भारत अब केवल कुछ पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई नए खेलों में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

अब लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक
ग्लासगो की सफलता अब भारत के लिए अगले बड़े लक्ष्य की तैयारी का आधार बनेगी। देश की निगाहें अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक-2028 पर टिकी हैं। भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि ग्लासगो से मिले आत्मविश्वास को और मजबूत करते हुए विभिन्न खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया जाए और पेरिस ओलंपिक-2024 में जीते गए छह पदकों से आगे बढ़कर नया कीर्तिमान स्थापित किया जाए।

ओलंपिक में व्यापक सफलता की जरूरत
भारत की ओलंपिक यात्रा उपलब्धियों और चुनौतियों, दोनों का प्रतिबिंब रही है।

पेरिस ओलंपिक-2024 में भारत ने एक रजत और पांच कांस्य पदक जीते थे। ये पदक निशानेबाजी, कुश्ती, हॉकी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में मिले।
इन उपलब्धियों ने भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिभा और क्षमता को साबित किया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत को अधिक से अधिक खेलों में अपनी मौजूदगी मजबूत करनी होगी।

एथलेटिक्स से बढ़ी नई उम्मीदें
हाल के वर्षों में एथलेटिक्स में मिली सफलताओं ने भारत के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। चीन के शाओशिंग में आयोजित एशियाई रिले चैंपियनशिप में भारत की महिला 4×100 मीटर रिले टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

श्राबनी नंदा, एस. एस. स्नेहा, सुदेशना शिवंकर और तमन्ना की टीम ने 43.85 सेकंड का सत्र का सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया।

ओलंपिक में सबसे अधिक पदक एथलेटिक्स में दिए जाते हैं। इसलिए इस क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश और सुनियोजित तैयारी भारत की वैश्विक खेल महत्वाकांक्षाओं के लिए अत्यंत आवश्यक होगी।

सरकारी पहलों से मिला नया बल
अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत की लगातार बढ़ती सफलता के पीछे सरकार का बढ़ा हुआ निवेश, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को दिया जा रहा लक्षित सहयोग महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना और खेलो इंडिया जैसी पहलों ने देश के युवा खिलाड़ियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। इसके अलावा निजी खेल अकादमियों, कॉर्पोरेट प्रायोजन और पेशेवर खेल लीगों ने भी भारत के खेल तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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