इस हफ़्ते की सबसे बड़ी ख़बर खेत से आई, और वह अच्छी नहीं है। 21 अगस्त तक देश में ख़रीफ़ की बुवाई 1,056.70 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी तारीख़ तक 1,072.77 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। यानी 16.07 लाख हेक्टेयर कम — करीब डेढ़ फ़ीसदी। बड़ी बात यह है कि इस पूरी कमी का 82 फ़ीसदी सिर्फ़ एक फ़सल में है। धान इस बार 405.10 लाख हेक्टेयर में लगा है, पिछले साल 418.29 लाख हेक्टेयर था — 13.19 लाख हेक्टेयर की गिरावट। दालों का रकबा 113.63 लाख हेक्टेयर पर पहुँचा है, जो राहत की बात है। वजह साफ़ है: 1 जून से 21 अगस्त तक देश में बारिश सामान्य से करीब 13 फ़ीसदी कम रही है, और अगस्त वह महीना है जिसमें मानसून की करीब 29 फ़ीसदी बारिश होती है।
चीनी को लेकर भी इसी हफ़्ते एक फ़ैसला हुआ जो सीधे रसोई से जुड़ा है। इस्मा (भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा उत्पादक संघ) और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारख़ाना संघ ने सरकार से बातचीत के बाद प्रस्ताव रखा है कि 2026-27 का पेराई सत्र सामान्य से 10 से 15 दिन पहले शुरू किया जाए, ताकि त्योहारों से पहले बाज़ार में नई चीनी आ जाए। दोनों संगठनों का कहना है कि देश में स्टॉक पर्याप्त है और घबराने की कोई बात नहीं। सीधी बात यह है कि सरकार और उद्योग दोनों दिवाली के आसपास चीनी के दाम पर नज़र रखे हुए हैं, और पेराई जल्दी शुरू करना उसी का जवाब है।
घर के बजट से जुड़ी दो और ख़बरें रहीं। पहली सेहत की — स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट और फ़ेनिलेफ़्रीन हाइड्रोक्लोराइड वाली सभी मिली-जुली (फ़िक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन) सर्दी-ज़ुकाम की दवाओं पर चार साल से छोटे बच्चों के लिए रोक लगा दी है। अब हर पैक पर साफ़ चेतावनी छापनी होगी कि यह दवा चार साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जाए। दूसरी ख़बर बच्चों के आधार की है — यूआईडीएआई ने स्कूली बच्चों के दो करोड़ से ज़्यादा अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट पूरे कर लिए हैं, 1.56 लाख स्कूलों में। यह काम सितंबर 2025 में शुरू हुआ था और 5 से 17 साल के बच्चों के लिए यह अपडेट 30 सितंबर 2026 तक मुफ़्त है। जिस बच्चे का आधार अपडेट नहीं है, उसे आगे नीट, जेईई या सीयूईटी के फ़ॉर्म भरते वक़्त दिक़्क़त आ सकती है।
अर्थव्यवस्था की तरफ़ ख़बरें ठीक रहीं। जुलाई में आठ नहीं, अब नौ बुनियादी उद्योगों का सूचकांक 5.4 फ़ीसदी बढ़ा — जून में यह 6 फ़ीसदी था, लेकिन अप्रैल से जुलाई तक का औसत 4.3 फ़ीसदी है, जबकि पिछले साल इन्हीं महीनों में 1.5 फ़ीसदी था। इस बार सूचकांक में लोहे का अयस्क भी जोड़ा गया है, और वही सबसे तेज़ी से बढ़ा — 29.5 फ़ीसदी। सीमेंट 13.1, बिजली 9, कोयला 7.6 फ़ीसदी बढ़े। खाद 8 फ़ीसदी घटी। रिज़र्व बैंक की अगस्त बैठक के ब्योरे भी इसी हफ़्ते आए: रेपो दर 5.25 फ़ीसदी पर जस की तस, यानी आपकी होम लोन की ईएमआई फ़िलहाल नहीं बदलेगी। विदेशी मुद्रा भंडार 14 अगस्त वाले हफ़्ते में 9.905 अरब डॉलर बढ़कर 716.907 अरब डॉलर हो गया। और दिल्ली में, इंदिरा गांधी स्टेडियम में, दुनिया की 39वीं रैंक वाली त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने तीन वरीयता प्राप्त जोड़ियों को हराकर बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता — महिला डबल्स में भारत का पहला विश्व पदक 2011 के बाद।
वे 405 पुर्ज़े, जिनका ऑर्डर अब भारत को मिलेगा
18 अगस्त को रक्षा उत्पादन विभाग ने एक सूची जारी की, जिसमें कोई हथियार नहीं है। उसमें 405 चीज़ें हैं — पुर्ज़े, उप-असेंबली, स्पेयर और कच्चा माल। इनमें से 16 भारतीय तटरक्षक बल की ज़रूरत के हैं और 389 रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनियों की। ये तेजस लड़ाकू विमान, सुखोई-30 एमकेआई, ध्रुव हेलिकॉप्टर, टी-72 और टी-90 टैंक, बीएमपी-2, मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली, युद्धपोतों, रडार और सोनार के भीतर लगने वाली चीज़ें हैं। अनुमानित कारोबार 3,070 करोड़ रुपये का है — यानी औसतन 7.58 करोड़ रुपये प्रति चीज़। हर चीज़ के आगे एक तारीख़ लिखी है, जिसके बाद वह सिर्फ़ भारतीय उद्योग से ख़रीदी जाएगी। यह छठी ऐसी सूची है। पहली पाँच में 5,012 चीज़ें थीं; अब कुल जोड़ 5,417 हो गया है।
अब असली सवाल — इससे आम आदमी को क्या? दरअसल यह सूची कोई सब्सिडी नहीं है, सरकार का इस पर एक रुपया ख़र्च नहीं होता। यह सिर्फ़ इतना करती है कि आने वाले ऑर्डर की तारीख़ पहले से बता देती है। कोयंबटूर या पुणे में बैठे एक छोटे कारख़ाने वाले के लिए यह बहुत बड़ी बात है, क्योंकि अब वह बैंक के पास जाकर कह सकता है कि ऑर्डर पक्का है और कब आएगा यह भी तय है। सृजन पोर्टल पर, जहाँ ये सूचियाँ रहती हैं, जून 2026 तक 33,000 से ज़्यादा चीज़ें भारत में बनाने के लिए पेश की जा चुकी हैं। यानी काम अभी छह गुना और बाक़ी है।
यही है भारत का असली कारख़ाना: वाराणसी में एक दर्ज़ी अपनी मशीन पर। देश में 7.92 करोड़ छोटी ग़ैर-कंपनी इकाइयाँ हैं, जो 12.81 करोड़ लोगों को रोज़गार देती हैं — औसतन 1.62 लोग प्रति इकाई। फ़ोटो: विकिमीडिया कॉमन्स (क्रिएटिव कॉमन्स)
छोटे कारख़ाने वाले को पैसे से ज़्यादा एक चीज़ चाहिए होती है — यह भरोसा कि मशीन का ख़र्च निकलने तक ख़रीदार टिका रहेगा।
एक नज़र में
• छठी स्वदेशीकरण सूची, 18 अगस्त 2026: 405 चीज़ें, ₹3,070 करोड़ का कारोबार
• छहों सूचियाँ मिलाकर 5,417 चीज़ें; सृजन पोर्टल पर 33,000 से ज़्यादा पेश
• पीएलआई योजनाएँ (31 मार्च 2026 तक): ₹2.40 लाख करोड़ का निवेश, 14.15 लाख प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोज़गार — यानी हर नौकरी पर करीब ₹17 लाख का निवेश
• सबसे ज़्यादा निवेश सौर मॉड्यूल में ₹64,873 करोड़, दवा में ₹45,158 करोड़, ऑटो में ₹44,326 करोड़
• मोबाइल फ़ोन निर्यात 2025-26 में ₹2.59 लाख करोड़ — देश का सबसे बड़ा निर्यात; भारत में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2% फ़ोन यहीं बनते हैं
• छोटे उद्यम: 7.92 करोड़ इकाइयाँ, साल भर में करीब 54 लाख बढ़ीं; मैन्युफ़ैक्चरिंग इकाइयाँ 6.48% बढ़ीं
• इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली इकाइयाँ 26.7% से बढ़कर 39.4%
इसी कड़ी की दूसरी योजना है पीएलआई, यानी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने जुलाई में लोकसभा को बताया कि 31 मार्च 2026 तक 14 क्षेत्रों में 2.40 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का असली निवेश आ चुका है और 14.15 लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार बने हैं। इन दोनों को बाँटकर देखें तो हर नौकरी के पीछे करीब 17 लाख रुपये का निवेश है। इसका मतलब यह है कि पीएलआई अपने आप में रोज़गार की योजना नहीं है — यह भारी पूँजी वाले बड़े कारख़ाने खड़े करती है। रोज़गार उन छोटी कंपनियों में बनता है जो इन बड़े कारख़ानों के आसपास पुर्ज़े बनाती हैं, ट्रांसपोर्ट करती हैं, टूल बनाती हैं।’
इलेक्ट्रॉनिक्स में यह बात साबित हो चुकी है। 2014-15 में देश में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स बनता था, 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ का बना — क़रीब सात गुना। निर्यात 38,000 करोड़ से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी करीब ग्यारह गुना। अकेले मोबाइल फ़ोन का निर्यात 2.59 लाख करोड़ रुपये का रहा और अब यह देश की सबसे बड़ी निर्यात वस्तु है। मोबाइल का आयात करीब 77 फ़ीसदी घट चुका है। लेकिन एक बात साफ़ रखनी चाहिए: भारत अभी फ़ोन जोड़ता है, चिप नहीं बनाता। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 12 परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली है और 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश तय हुआ है, जिनमें से तीन — तीनों गुजरात के साणंद में — अभी चिप की पैकेजिंग और टेस्टिंग कर रहे हैं। पूरी चिप बनाने वाला कारख़ाना अभी बन रहा है, और दुनिया में कहीं भी ऐसा कारख़ाना खड़ा होने में लगभग दस साल लगते हैं।
अब उस हिस्से की बात, जो सबसे कम गिना जाता है। सरकारी सर्वेक्षण के मुताबिक़ दिसंबर 2025 तक देश में 7.92 करोड़ ग़ैर-कंपनी उद्यम थे — साल भर में करीब 54 लाख की बढ़ोतरी — और इनमें 12.81 करोड़ लोग काम करते हैं। औसत निकालें तो एक इकाई में 1.62 लोग। यही भारत का असली उत्पादन आधार है: गली-मोहल्ले की वर्कशॉप, दो कारीगरों वाला लेथ, घर के बाहर बनी सिलाई की इकाई। इनमें मैन्युफ़ैक्चरिंग वाली इकाइयाँ साल भर में 6.48 फ़ीसदी बढ़ीं और इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों का हिस्सा 26.7 से बढ़कर 39.4 फ़ीसदी हो गया। जब रक्षा विभाग 405 पुर्ज़ों की सूची छापता है, या कोई बड़ा कारख़ाना पास में गैस्केट बनाने वाला ढूँढ़ता है, तो जवाब इन्हीं को देना होता है। इनकी सबसे बड़ी अड़चन हुनर नहीं, पहला ऑर्डर पूरा करने के लिए पैसे का इंतज़ाम है।
आगे का रास्ता ज़्यादा मुश्किल नहीं है, बस हिसाब सार्वजनिक करना है। पहली पाँच सूचियों की 5,012 चीज़ों में से कितनी तय समय पर वाक़ई भारत में बनने लगीं, किसने बनाईं और आयात के मुक़ाबले क्या क़ीमत पड़ी — यह ब्योरा छपना चाहिए, वरना सूची सिर्फ़ इरादा बनकर रह जाती है। सृजन पोर्टल से पहले ऑर्डर तक का रास्ता उस कारख़ाने के लिए छोटा होना चाहिए जिसने कभी रक्षा कंपनी को सप्लाई नहीं की। और पीएलआई का क्षेत्रवार हिसाब — कितना तय हुआ, कितना मिला — हर साल आना चाहिए। भारत ने यह दशक दुनिया के पैमाने पर सामान जोड़ना सीखने में लगाया है। अगला इम्तिहान यह है कि हम पुर्ज़े ख़ुद बना पाते हैं या नहीं — और इस हफ़्ते की सूची उसी दिशा में उठा हुआ क़दम है।
ब्रिक्स: एक हफ़्ते में पाँच शहर, पाँच बैठकें — इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है, और इस हफ़्ते वह काग़ज़ से निकलकर ज़मीन पर दिखी। 17 अगस्त को नई दिल्ली में पर्यावरण अधिकारियों की बैठक हुई, 18 को पर्यावरण मंत्रियों की। 17 से 21 अगस्त तक पुणे में सूचना-प्रौद्योगिकी की बैठकें चलीं, जिनका समापन 21 अगस्त को बारहवीं ब्रिक्स संचार मंत्री बैठक से हुआ। जयपुर में 19 अगस्त को पर्यटन कार्य समूह और 21 अगस्त को पर्यटन मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें साझा घोषणापत्र अपनाया गया — पर्यटन में एआई, ज़िम्मेदार पर्यटन, कौशल प्रशिक्षण और आसान यात्रा उसके मुख्य बिंदु हैं। 22 और 23 अगस्त को विशाखापत्तनम में युवा और खेल मंत्रियों की बैठकें हुईं। भारत के लिए फ़ायदा सीधा है: अध्यक्ष देश ही एजेंडा लिखता है।
जापान: अब सिर्फ़ अभ्यास नहीं, जहाज़ भी साथ बनेंगे — 20 अगस्त को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने समुद्री सुरक्षा पर समझौता ज्ञापन पर दस्तख़त किए। इसमें भारतीय नौसेना और जापानी नौसेना के बीच समुद्री जानकारी साझा करना, तलाश-बचाव और आपदा राहत में सहयोग, और समुद्री रास्तों की सुरक्षा शामिल है। कारख़ानों के लिहाज़ से सबसे अहम हिस्सा यह है कि दोनों देश नौसैनिक जहाज़ों के डिज़ाइन और निर्माण में मिलकर काम करने की संभावना टटोलेंगे — जापान की तकनीक, भारत की उत्पादन क्षमता। जापान ने अप्रैल 2026 में अपने रक्षा उपकरण निर्यात के नियम बदले थे, उसी से यह बातचीत मुमकिन हुई।
दक्षिण अफ़्रीका: पहली बार किसी अफ़्रीकी समूह से व्यापार बातचीत — भारत ने 12 अगस्त को दक्षिण अफ़्रीकी सीमा-शुल्क संघ (एसएसीयू) के साथ तरजीही व्यापार समझौते की शर्तों पर दस्तख़त किए। बातचीत लगभग एक महीने में शुरू होगी और एक साल में पूरी करने का लक्ष्य है। इस संघ में दक्षिण अफ़्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया, लेसोथो और इस्वातिनी हैं। 2025-26 में भारत और इन पाँच देशों का आपसी कारोबार 16.81 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 7.55 अरब डॉलर था।
ब्रिटेन: पाँच हफ़्ते हो गए, असली हिसाब सितंबर में — भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू है, और उसी दिन से दोनों देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौता भी। अब भारत का 99 फ़ीसदी सामान ब्रिटेन में बिना शुल्क या कम शुल्क पर जाता है — कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न-आभूषण, खिलौने, इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पुर्ज़े। जुलाई के आँकड़ों में इसके सिर्फ़ 17 दिन आए हैं, इसलिए असर सितंबर के आँकड़ों में ही ठीक से दिखेगा।
अगले हफ़्ते क्या
• पहली तिमाही के जीडीपी आँकड़े, सोमवार 31 अगस्त — अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के राष्ट्रीय आय आँकड़े जारी होंगे। रिज़र्व बैंक ने पूरे साल के लिए 6.7 फ़ीसदी वृद्धि का अनुमान रखा है; यह पहला इम्तिहान है।
• ख़रीफ़ बुवाई और बारिश के साप्ताहिक आँकड़े, शुक्रवार — अगस्त का आख़िरी हफ़्ता बुवाई की खिड़की बंद कर देता है। इसके बाद सितंबर की बारिश तय करेगी कि रबी के लिए ज़मीन में नमी कितनी बचती है।
• बच्चों के आधार का अपडेट, 30 सितंबर तक मुफ़्त — जिस बच्चे की उम्र 5 या 15 साल पूरी हो चुकी है, उसका बायोमेट्रिक अपडेट कराना ज़रूरी है। स्कूलों में कैंप लग रहे हैं; तारीख़ निकलने के बाद यह काम शुल्क लेकर होगा।
• चीनी का पेराई सत्र — इस्मा और सहकारी संघ के प्रस्ताव पर सरकार का रुख़ अगले कुछ हफ़्तों में साफ़ होगा। सत्र 10-15 दिन पहले शुरू हुआ तो त्योहारों से पहले नई चीनी बाज़ार में आएगी।
• सर्दी-ज़ुकाम की दवाओं पर नई चेतावनी — क्लोरफेनिरामाइन और फ़ेनिलेफ़्रीन वाली मिली-जुली दवाओं के पैक पर चार साल से छोटे बच्चों के लिए चेतावनी छपनी शुरू होगी। बच्चे को कोई भी सिरप देने से पहले लेबल ज़रूर पढ़ें।
• विदेशी मुद्रा भंडार के आँकड़े, शुक्रवार 28 अगस्त — दो हफ़्तों में 24.041 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के बाद अब देखना यह है कि एनआरआई जमा की खिड़की 31 अगस्त को बंद होने के बाद रफ़्तार कैसी रहती है।














