ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इस हफ़्ते नई दिल्ली के इंदिरा गांधी एरिना में बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप का 30वाँ संस्करण खेला जा रहा है। भारत 2009 के बाद पहली बार इसकी मेज़बानी कर रहा है, और देश के दोनों सबसे बड़े नाम अब भी ड्रॉ में बने हुए हैं।
2026 बीडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड चैंपियनशिप 17 से 23 अगस्त तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी एरिना में चल रही है। दो बार की विश्व चैंपियन पी. वी. सिंधु ने कनाडा की वेन यू झांग को 21-16, 21-17 से हराया। सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी 19 अगस्त को बिना एक शटल खेले प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँच गए, क्योंकि एलेक्ज़ेंडर डन और एडम प्रिंगल की जोड़ी हट गई।
घर का कोर्ट: भारत में एक इनडोर बैडमिंटन कोर्ट। विश्व चैंपियनशिप की मेज़बानी के लिए बीडब्ल्यूएफ़ मानक के आठ कोर्ट, नियंत्रित हवा और अलग प्रैक्टिस हॉल चाहिए — यह ढाँचा भारत ने 2009 के बाद ही खड़ा किया है।
घर पर विश्व चैंपियनशिप सिर्फ़ जीतने का मौक़ा नहीं है। यह वह हफ़्ता है जब देश का हर जूनियर खिलाड़ी दुनिया के सबसे अच्छे खिलाड़ियों को स्क्रीन पर नहीं, स्टैंड से देख सकता है।
एक नज़र में
• आयोजन: 30वीं बीडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड चैंपियनशिप
• जगह: इंदिरा गांधी एरिना, नई दिल्ली
• तारीख़: 17 से 23 अगस्त 2026
• भारत ने पिछली बार मेज़बानी की: 2009 में
• पी. वी. सिंधु: वेन यू झांग (कनाडा) को 21-16, 21-17 से हराया
• सात्विक-चिराग: 19 अगस्त को वॉकओवर से प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में
• भारतीय ड्रॉ में और: आयुष शेट्टी
• फ़ॉर्मैट: नॉकआउट — दोनों हारने वाले सेमीफ़ाइनलिस्ट को कांस्य
वॉकओवर का फ़ायदा भी है और नुक़सान भी। सात्विक-चिराग को पूरा एक दिन आराम मिल गया, जो सात दिन में पाँच राउंड वाले ड्रॉ में पुरुष युगल के लिए बहुत क़ीमती है। लेकिन उन्हें मैच की रफ़्तार पर खेलने का एक मौक़ा नहीं मिला, और कोर्ट की हवा का बहाव पढ़ने का काम अगले राउंड में करना पड़ेगा। युगल जोड़ियाँ आम तौर पर आराम को चुनती हैं।
सिंधु की सीधे गेमों में जीत ज़्यादा बताने वाली है। इस चैंपियनशिप में उनका रिकॉर्ड किसी भी भारतीय खिलाड़ी का किसी भी व्यक्तिगत खेल में सबसे लगातार रहा है — लगातार पाँच संस्करणों में पदक, जिसमें ख़िताब भी शामिल है। 21-16, 21-17 का स्कोर बताता है कि मैच पर नियंत्रण था, पर आसानी नहीं थी। विश्व चैंपियनशिप में यह दोनों में बेहतर हालत है।
मेज़बानी अपने आप में बड़ी बात है। 2009 से 2026 के बीच भारत ने प्रीमियर बैडमिंटन लीग, हैदराबाद-बेंगलुरु-गुवाहाटी की अकादमी व्यवस्था और पेशेवर कोचिंग का जो ढाँचा बनाया, वह पहले नहीं था। ओलंपिक का रजत और कांस्य, दो विश्व ख़िताब, थॉमस कप और सुपर 750 की कई जीतें उसी दौर की उपज हैं।
फ़ाइनल रविवार, 23 अगस्त को है। पदक कितने आएँ, यह अपनी जगह — पर इस हफ़्ते हज़ारों भारतीय बच्चे विश्व स्तर की रैली बीस फ़ुट की दूरी से देखेंगे। ऐसी चीज़ें राष्ट्रीय रैंकिंग सूची में दस साल बाद दिखती हैं, और तभी समझ आता है कि मेज़बानी क्यों मायने रखती थी।













