ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।एशियाई खेलों की क्रिकेट टीम को अगर सीरीज़ की टीम मानकर पढ़ेंगे तो अटपटी लगेगी। पदक तालिका की टीम मानकर पढ़िए — तब हर नाम अपनी जगह बैठ जाता है।
2026 एशियाई खेलों के लिए भारत की पुरुष क्रिकेट टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथ है और उपकप्तान तिलक वर्मा हैं। 15 खिलाड़ियों की टीम में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, नीतीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती और युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी शामिल हैं। खेल जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होंगे। पुरुष क्रिकेट 24 सितंबर से शुरू होगा और पदक के मुक़ाबले 3 अक्टूबर को।
बहु-खेल आयोजन में क्रिकेट का हिसाब अलग होता है। फ़ॉर्मैट टी20 है, टूर्नामेंट छोटा है, मैचों के बीच आराम कम है, और मक़सद सीरीज़ जीतना नहीं, पदक लाना है। ऐसे में काम आते हैं तीन तरह के खिलाड़ी — स्पिनर जो पिच से मदद ले सकें, बल्लेबाज़ जो शुरू से तेज़ खेलें, और ऑलराउंडर जिनसे कप्तान टीम का संतुलन बदल सके बिना गेंदबाज़ घटाए। तीन-चार स्पिन विकल्प और लचीला बल्लेबाज़ी क्रम कोई समझौता नहीं है। यह टूर्नामेंट की टीम है।
नौ दिन, एक पदक: आइची-नागोया एशियाई खेलों में पुरुष क्रिकेट 24 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक खेला जाएगा।
सीरीज़ पूछती है कि बेहतर टीम कौन है। खेल पूछते हैं कि मंगलवार को बेहतर कौन था।
एक नज़र में
• आयोजन: एशियाई खेल 2026, आइची-नागोया, जापान
• तारीख़: 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026
• पुरुष क्रिकेट: 24 सितंबर से 3 अक्टूबर
• कप्तान: श्रेयस अय्यर · उपकप्तान: तिलक वर्मा
• टीम: 15 खिलाड़ी
• तेज़ गेंदबाज़: जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा
• स्पिन: रवि बिश्नोई, वरुण चक्रवर्ती, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर
• सबसे युवा: वैभव सूर्यवंशी
• घोषणा: बीसीसीआई, 6 जून 2026
सबसे ज़्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी के नाम की होगी, और यहाँ ख़ुशी के साथ थोड़ा सब्र भी ज़रूरी है। भारतीय क्रिकेट ने कम उम्र के बल्लेबाज़ हमेशा खोजे हैं। जो टिके, वे अक्सर वही रहे जिन्हें छोटे टूर्नामेंट में एक तय काम दिया गया, न कि लंबी सीरीज़ में पूरा बोझ। एशियाई खेलों की टीम इसके लिए लगभग आदर्श जगह है — दबाव इतना कि अनुभव असली हो, और अवधि इतनी छोटी कि सँभल जाए, और आसपास वे सीनियर खिलाड़ी जो हर तरह का दबाव देख चुके हैं।
एक बड़ी बात स्कोरकार्ड से बाहर है। एशियाई खेलों में क्रिकेट के जाने का मतलब है कि भारतीय क्रिकेटर एक बहु-खेल दल का हिस्सा बनेंगे — पहलवानों, निशानेबाज़ों, एथलीटों और नाविकों के साथ एक ही गाँव में, एक ही पदक तालिका में। इन खेलों के पास क्रिकेट का एक अंश भी पैसा नहीं है, और अनिश्चितता कहीं ज़्यादा है। इस नज़दीकी का फ़ायदा उठाया जाना चाहिए, सिर्फ़ आनंद नहीं लिया जाना चाहिए — साझा स्पोर्ट्स साइंस, साझा रिकवरी और चोट-प्रबंधन, साझा डेटा। पदक जीतना अच्छी बात है। भारतीय खेल का ख़ुद को एक व्यवस्था मानना — न कि एक अमीर खेल और बाक़ी सब — उससे कहीं ज़्यादा क़ीमती है।














