ललित दुबे
वाशिंगटन। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीय मूल के लोगों ने एक बार फिर नया मुकाम हासिल किया है। भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से बाहर निकलकर अपने जीवन का पहला ऐतिहासिक स्पेसवाक किया। यह उनके करियर के लिए एक बड़े मील के पत्थर के तौर पर थी।
इस 6.5 घंटे लंबे कठिन मिशन (ईवीए) में अनिल मेनन के साथ नासा की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री जेसिका मीर भी शामिल थीं, जो अपने करियर का छठा स्पेसवाक कर रही थीं। इन दोनों ने मिलकर अंतरिक्ष स्टेशन की बिजली प्रणाली को अपग्रेड करने का महत्वपूर्ण काम किया।
समझिए इस मिशन से जुड़ी मुख्य बातें
मेनन और मीर का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष स्टेशन के ‘3बी पावर चैनल’ पर नया हार्डवेयर इंस्टॉल करना था। यह काम भविष्य में लगाए जाने वाले नए सोलर पैनल की तैयारी के लिए किया गया।
क्यों जरूरी है यह अपग्रेड?
इस बात को ऐसे समझिए कि अंतरिक्ष स्टेशन पर लगे पुराने सोलर पैनल समय के साथ कमजोर हो गए हैं। ये नए और आधुनिक सोलर पैनल स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमता को काफी ज्यादा बढ़ाएंगे, जिससे वहां होने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों और जीवन रक्षक प्रणालियों के लिए लगातार बिजली मिलती रहेगी।अंतरिक्ष से अनिल मेनन ने प्रशांत महासागर की तस्वीर भेजी। चक्रवात के अद्भुत नजारे की भी तस्वीर भेजी गई। अनिल मेनन पहली बार अंतरिक्ष गए हैं। वह आठ महीने तक आईएसएस पर रिसर्च करेंगे।
अंतरिक्ष में स्पेसवाक की चुनौतियां
अंतरिक्ष के निर्वात में काम करना बहुत खतरनाक और मुश्किल होता है। अंतरिक्ष यात्रियों को अत्यधिक तापमान और लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के चक्क र लगाते हुए हर काम पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ करना होता है।
यह स्पेसवाक तीन अंतरिक्ष अभियानों में से पहला था। इसके बाद 13 अगस्त को संचार एंटीना को बदला गया और 25 अगस्त को डेटा रिले सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए दो और स्पेसवाक योजनाबद्ध हैं।














