नई दिल्ली। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट से हब एंड स्पोक अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा संचालन का शुभारंभ किया। अमृतसर और वाराणसी के बाद यह देश का तीसरा हवाई अड्डा है , जिसे अंतरराष्ट्रीय यात्री आवागमन के लिए भारत के अग्रणी हब एंड स्पोक ढांचे में एकीकृत किया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय हब हवाई अड्डों के माध्यम से घरेलू यात्रियों को निर्बाध अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी प्रदान करने की सुविधा देता है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हब एंड स्पोक सिस्टम के तहत देश भर में कुल 44 एयरपोर्ट्स को विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
ऐसे काम करता है हब एंड स्पोक सिस्टम
यह एयरलाइंस की एक ऐसी संचालन प्रणाली है, जिसमें छोटे शहरों (स्पोक) के यात्रियों को एक बड़े केंद्रीय हवाई अड्डे (हब) पर लाया जाता है और वहां से उन्हें कनेक्टिंग अंतरराष्ट्रीय या लंबी दूरी की उड़ानों में भेजा जाता है।
नए सिस्टम के तहत छोटे एयरपोर्ट पर ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए होगी सारी जांच, इससे एयरलाइंस की परिचालन लागत में आएगी कमी और यात्रियों के समय की होगी बचत।
क्यों पड़ी जरूरत
यात्रियों का समय और परेशानी बचाना व कनेक्टिंग। अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ने के लिए बड़े एयरपोर्ट्स पर लगने वाली लंबी कतारों, दोबारा चेक-इन और इमिग्रेशन की झंझट से यात्रियों को मुक्ति मिलेगी।
सुगम और निर्बाध यात्रा विदेश जाने वाले लोगों को बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के अंतरराष्ट्रीय उड़ान से जुड़ने की सुविधा मिलती है।
हवाई अड्डों पर भीड़ प्रबंधन
मेन टर्मिनल पर यात्रियों और सामान की दोबारा जांच का दबाव कम होता है, जिससे परिचालन अधिक तेज बनता है।
वैश्विक विमानन मानकों को अपनाना अंतरराष्ट्रीय एविएशन हब इसी मॉडल पर काम करते हैं। वैश्विक विमानन केंद्र बनाने को व्यवस्था जरूरी है।
ये सुविधाएं मिलेंगी
सामान की जांच यात्रियों के सामान, कस्टम और इमिग्रेशन की सारी जांच उनके शुरुआती (छोटे) हवाई अड्डे पर ही पूरी हो जाती है।
सुरक्षा जांच नहीं: हब एयरपोर्ट पर उतरने केबाद यात्रियों को दोबारा सुरक्षा जांच या चेक-इन नहीं कराना पड़ता। वे सीधे अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान क्षेत्र की ओर जा सकते हैं।
कंपनियों को हर छोटे शहर से सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें चलाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उनका परिचालन लागत कम पड़ती है।
सामान ट्रांसफर हब एयरपोर्ट पर यात्रियों के सामान का ट्रांसफर एयरसाइड से दूसरी फ्लाइट में एयरलाइन द्वारा खुद किया जाता है। यात्रियों को सामान दोबारा लेने और चेक-इन कराने की जरूरत नहीं पड़ती।














