• Latest
  • Trending

मध्य पूर्व-यूरोप गलियारे को लेकर आगे बढ़ने पर सहमति

September 13, 2025
Gwalior-Fort-in-Madhya-Pradesh

ग्वालियर में ₹5,500 करोड़, 18 हज़ार नौकरियां

August 6, 2026
hospital

22 बच्चे, और वायरस का वाहक अब भी तय नहीं

August 6, 2026
farmer

किसान के हर ₹1 पर ₹2.30

August 6, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

अब सिर्फ़ 460 गांव बाकी हैं

August 6, 2026
solar

19 लाख घरों का बिजली बिल अब ज़ीरो

August 6, 2026
airport

अब खाड़ी नहीं, अमेरिका से आता है ज़्यादा पैसा

August 5, 2026
वैश्विक संकट के बीच भी नहीं थमेगी भारत की रफ्तार

यूपी में जीएसटी 15% बढ़ा

August 5, 2026
boxing

ग्लासगो में 39 पदक, सात गोल्ड सिर्फ़ बॉक्सिंग से

August 5, 2026
solar

बारह लाख घरों ने बिजली बेचकर कमाए

August 5, 2026
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

पीएम-किसान अब 2031 तक

August 5, 2026
आरबीआई

कल सुबह 10 बजे आरबीआई का फ़ैसला आएगा। आपकी होम लोन ईएमआई पर इसका क्या असर होगा — और असली बात रेट में नहीं, भाषा में है

August 4, 2026
election center

तीन राज्य, तीन सीटें, तीन अलग नतीजे: बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर ने एक ही दिन तीन अलग कहानियां सुनाईं

August 4, 2026
Friday, August 7, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

मध्य पूर्व-यूरोप गलियारे को लेकर आगे बढ़ने पर सहमति

टेंशन में एर्दोगन, तुर्की को रखा गया इससे बाहर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 13, 2025
in the blitz
0

YOU MAY ALSO LIKE

ग्वालियर में ₹5,500 करोड़, 18 हज़ार नौकरियां

22 बच्चे, और वायरस का वाहक अब भी तय नहीं

ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ संयुक्त रूप से फोन पर एक अति महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात की है। इस दौरान भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारे (आईएमईसी) के लिए बड़ा कदम उठाया गया, जिसमें यूरोपीय नेताओं ने कॉरिडोर के कार्यान्वयन को लेकर आगे बढ़ने पर सहमति व्यक्त की। यह गलियारा भारत के सामरिक हितों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और कनेक्टिविटी क्षेत्र के रूप में नई दिल्ली की वैश्विक स्थिति को बढ़ाता है, लेकिन इस गलियारे को लेकर तुर्की परेशान हैं। तुर्की के राष्ट्रपति तो इसकी खुलेआम आलोचना तक कर चुके हैं।
सितम्बर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान एक घोषणा ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। यह घोषणा भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे के निर्माण के प्रस्ताव की थी। भारत, अमेरिका, यूरोपीय संघ और खाड़ी के प्रमुख देशों से समर्थित इस गलियारे का उद्देश्य मध्य पूर्व के माध्यम से भारतीय बाजारों को यूरोप से जोड़ने वाली एक आधुनिक लॉजिस्टिक चेन बनाना है।
कॉरिडोर में तुर्की को नहीं मिला भाव
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर मुख्य रूप से दो अंतरराष्ट्रीय मार्गों से मिलकर बनता है। इसमें एक पूर्वी गलियारा है, जो भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ता है और एक उत्तरी मार्ग को जॉर्डन और इजरायल से होकर यूरोप तक जाता है। ग्रीस, इजरायल और जॉर्डन जैसे देश इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन खुद को यूरोप और एशिया के बीच पुल समझने वाले तुर्की को इससे बाहर रखा गया है। यही वजह है कि अंकारा इसे लेकर टेंशन में है।
खास बात ये है कि इस कॉरिडोर को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के जवाब के रूप में देखा जाता है। ऐसे में तुर्की का इसमें न होना एर्दोगन को रास नहीं आया और उन्होंने खुलकर इसकी आलोचना की है। तिलमिलाए एर्दोगन ने इसके जवाब में एक प्रतिद्वंद्वी गलियारे का प्रस्ताव रखा है, जो इराक और तुर्की के माध्यम से खाड़ी को यूरोप से जोड़ता है।
भारत की मजबूती
अंकारा का तर्क है कि तुर्की एशिया और यूरोप के बीच एक प्राकृतिक पुल है। इसके पास रेल और बंदरगाह का बुनियादी ढांचा मौजूद है। ऐसे देश को नजरअंदाज करने से रसद संबंधी अक्षमताएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, तुर्की को असल समस्या इस गलियारे के जरिए भारत को होने वाले लाभ से है। यह गलियारा भारत को पश्चिम के भू-राजनीतिक ढांचे में मजबूती से स्थापित करता है और इसे यूरोपीय संघ और इजरायल के करीब लाता है।
यह गलियारा आर्थिक रूप से अधिक महत्पूर्ण है। यह समय और लागत में कटौती करके यूरोप में भारतीय निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकता है। इससे कपड़ा, दवा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा। आईएमईसी की पहुंच 47 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्था तक फैली हुई है। गलियारा भारत के सामरिक हितों को पूरा करता है। अगर यह पूरी तरह से साकार हो जाता है, तो भारत-यूरोप परिवहन समय को 40 प्रतिशत और लागत को 30% तक कम कर सकता है। यही वजह है कि तुर्की किसी भी तरह इसका हिस्सा बनने के लिए बेकरार है।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation