ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।अगर घर में 5 से 17 साल का बच्चा है और उसका आधार बायोमेट्रिक अपडेट नहीं हुआ है, तो यह ख़बर सीधे आपके लिए है। 30 सितंबर के बाद 7 से 15 साल वालों के लिए यह मुफ़्त नहीं रहेगा।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने 18 अगस्त को बताया कि स्कूली बच्चों के दो करोड़ से ज़्यादा अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट पूरे हो चुके हैं। यह काम देश भर के 1.56 लाख से ज़्यादा स्कूलों में हुआ। अभियान सितंबर 2025 में शुरू हुआ था और स्कूलों में लगे कैंप के ज़रिए चलाया गया।
दरअसल नियम यह है। पाँच साल से छोटे बच्चे का आधार बनता है तो सिर्फ़ नाम-पता और फ़ोटो लिया जाता है। उँगलियों के निशान और आँख की पुतली नहीं ली जाती, क्योंकि उस उम्र में ये बन ही रहे होते हैं। इसलिए बच्चा जब 5 साल का होता है तब और फिर 15 साल का होने पर बायोमेट्रिक दर्ज कराना ज़रूरी है। यही अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट है।
यहीं हो रहा है काम: केरल के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की कक्षा। परिवार को केंद्र तक बुलाने की जगह कैंप को स्कूल तक ले जाने का ही नतीजा है कि ग्यारह महीने में दो करोड़ अपडेट हो सके — औसतन हर स्कूल में क़रीब 128 बच्चे।
पैसा असली मुद्दा नहीं है। असली मुद्दा परीक्षा हॉल है। जिस बच्चे का आधार सत्यापित नहीं होगा, वह नीट, जेईई या सीयूईटी के फ़ॉर्म भरते समय अटक सकता है — और पता तब चलेगा जब देर हो चुकी होगी।
एक नज़र में
• घोषणा: 18 अगस्त 2026, यूआईडीएआई
• अब तक: 2 करोड़ से ज़्यादा अपडेट · 1.56 लाख से ज़्यादा स्कूल
• अभियान शुरू: सितंबर 2025
• कब कराना है: बच्चा 5 साल का हो तब, और फिर 15 साल का हो तब
• मुफ़्त कब तक: 5 से 17 साल तक, 30 सितंबर 2026 तक
• क्यों: 7–15 साल वालों की फ़ीस 1 अक्टूबर 2025 से एक साल के लिए माफ़ की गई थी
• न कराने पर: योजनाओं का लाभ और नीट, जेईई, सीयूईटी के रजिस्ट्रेशन में दिक़्क़त
अब सीधी बात यह है कि करना क्या है। पहले स्कूल के दफ़्तर में पूछिए — कई ज़िलों में कैंप अब भी स्कूल में ही लग रहे हैं, और वहाँ न कहीं जाना पड़ता है, न कोई अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। कैंप न हो तो किसी भी आधार नामांकन या अपडेट केंद्र पर यह काम हो जाएगा। 5 से 7 और 15 से 17 साल वालों के लिए यह वैसे भी मुफ़्त है। तारीख़ की मार सिर्फ़ 7 से 15 साल वालों पर पड़ेगी।
ग्यारह महीने में दो करोड़ अपडेट कम नहीं होते, और इसकी वजह तकनीकी है। यूआईडीएआई ने अपने सिस्टम को यूडाइस+ यानी स्कूल शिक्षा के डेटाबेस से जोड़ दिया है। इससे हेडमास्टर को साफ़ दिखता है कि उसकी हाज़िरी रजिस्टर में कौन-कौन से बच्चे बाक़ी हैं। बड़ी बात यह है कि इसने एक राष्ट्रीय निर्देश को कक्षावार सूची में बदल दिया। आगे का सही क़दम यह होगा कि यूआईडीएआई राज्यवार यह भी बताए कि 5 से 17 साल के कितने बच्चे अभी बाक़ी हैं। तब ज़िले देख पाएँगे कि कैंप कहाँ और लगाने हैं, और माता-पिता देख पाएँगे कि उनका राज्य आगे है या पीछे।













