नई दिल्ली। आज के समय में बेहतर सैलरी और करियर ग्रोथ के लिए नौकरी बदलना आम बात हो गई है। प्राइवेट सेक्टर में ज्यादातर प्रोफेशनल्स हर साल या कुछ समय में ही जॉब बदल देते हैं, ताकि सैलरी में इजाफा हो सके। ऐसा सिर्फ कम सैलरी पाने वाले कर्मचारी ही नहीं करते, बल्कि जिनकी सैलरी 1.5 से 2 लाख हर माह है, वो भी मामूली या कह लीजिए 20 से 30 हजार सैलरी हाइक पर ही नौकरी बदल देते हैं।
अक्सर लोगों के मन एक सवाल ये उठता है कि जब आपकी सैलरी 2 लाख है, तो क्या मामूली सैलरी हाइक के लिए बार-बार नौकरी बदलनी चाहिए? क्या ये फैसला आपके करियर के लिए ठीक रहेगा? इसी सवाल को लेकर इस वक्त सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। इस मुद्दे को लेकर पुणे के प्रोफेशनल ने अपना नजरिया शेयर किया है।
पुणे के निहार पाटिल ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें वो बताते हैं कि जब किसी प्रोफेशनल की मासिक सैलरी करीब 1.5 लाख से 2 लाख रुपये हो जाती है, तो उसे नौकरी बदलने के फैसले के बारे में थोड़ा अलग तरीके से सोचना चाहिए।
20-30 हजार रुपये की हाइक के लिए नौकरी बदलना जरूरी?
पाटिल ने कहा कि इस लेवल पर कोई व्यक्ति 20 से 30 हजार रुपये ज्यादा सैलरी के लिए नौकरी बदल सकता है, लेकिन टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाली बढ़ी हुई रकम उतनी बड़ी नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मामूली हाइक के लिए मौजूदा नौकरी से मिलने वाली दूसरी सुविधाओं और फायदे को छोड़ना सही है?
उन्होंने कहा कि नौकरी बदलने का मतलब केवल कंपनी बदलना नहीं है। इसके साथ व्यक्ति को उस जगह को भी छोड़ना पड़ सकता है, जहां उसने अच्छी पहचान बनाई है, अच्छे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है और एक बेहतर मैनेजर व सहकर्मियों के साथ सहज माहौल में काम कर रहा है।
ज्यादा सीटीसी के साथ छंटनी का रिस्क भी
पाटिल ने एक और अहम पहलू की ओर लोगों का ध्यान दिलाया, और वह है कंपनी में छंटनी या री-स्ट्रक्चरिंग का जोखिम। उनका कहना है कि जैसे-जैसे कर्मचारी की सैलरी बढ़ती है, उसका सीटीसी भी बढ़ जाती है। अगर किसी कंपनी में री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी का दौर शुरू होता है, तो ज्यादा सीटीसी वाले पदों पर भी इसका असर पड़ सकता है।














