नई दिल्ली। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय कूटनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई विशेष द्विपक्षीय बैठक में यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और शांति की बहाली पर विशेष जोर दिया गया।
वहीं, मंच पर पीएम मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की गर्मजोशी भरी त्रिपक्षीय तस्वीरें और संवाद दुनिया भर के मीडिया में छाए रहे, जिससे यह संदेश गया कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्वतंत्र और संतुलित कूटनीति के साथ मजबूती से खड़ा है। इसके विपरीत, इस कूटनीतिक हलचल और भारत-रूस-चीन के बीच सहज संपर्कों के मध्य पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की असहज स्थिति और कूटनीतिक हाशिए पर जाने के दृश्य ने पड़ोसी देशों—विशेषकर चीन और पाकिस्तान की क्षेत्रीय रणनीतियों पर गहरा असर डाला है।
इस यात्रा और एससीओ शिखर सम्मेलन से भारत ने साबित कर दिया है कि वह एक ऐसी ‘विश्व-मित्र’ महाशक्ति है, जो पश्चिमी देशों के साथ मजबूत संबंध (क्वाड के जरिए) रखते हुए भी यूरेशिया में रूस के साथ अपनी पुरानी दोस्ती को पूरी ताकत से निभा सकती है। इससे चीन-पाकिस्तान के उस कूटनीतिक घेरे को तोड़ा गया है जो वे भारत के खिलाफ मध्य एशिया में बनाने की कोशिश करते रहे हैं। अत: यह कह सकते हैं कि बिश्केक में हुए 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन से वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय कूटनीति को एक नई दिशा मिलने का संदेश मिला है।
पीएम मोदी इन दोनों देशों की चार दिवसीय यात्रा से गत 1 सितंबर को लौट चुके हैं पर वह कई समझौतों के जरिये भारत को भविष्य की चुनौतियों के वास्ते तैयार करने के लिए बहुत कुछ अपने साथ लेकर आए हैं।
पीएम मोदी की इस पूरी यात्रा के दौरान भारत का दबदबा कैसे बढ़ा; और चीन तथा पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों पर इसका क्या कूटनीतिक असर रहा, इसे नीचे दिए इन तथ्यों से और स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात
अाधिकारिक तौर पर एससीओ की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित 26वें •शिखर सम्मेलन से अलग अला-अरचा स्टेट रेजिडेंस में दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता रणनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण रही।
अंतहीन युद्ध का अंत संदेश : यूक्रेन संकट पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने शांति का कड़ा संदेश दिया। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि दुनिया को अंतहीन युद्ध (एंडलेस वॉर) से हटकर युद्ध के अंत (एंड ऑफ वॉर) की तरफ बढ़ना होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध में बीता हर एक दिन मानवता को पीछे धकेलता है।
व्यापार और रक्षा साझेदारी : दोनों नेताओं ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की तथा ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रक्षा क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर मजबूत सहमति बनी। समुद्री सुरक्षा की चिंता: वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र (ब्लैक सी) के संघर्षों पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने इस तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर पड़ रहे बुरे असर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
ब्रिक्स का निमंत्रण: पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को भारत में आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया, जिसके लिए पुतिन ने सहर्ष हामी भरी।
पड़ोसी देशों (चीन और पाकिस्तान) पर यात्रा का प्रभाव : एससीओ एक ऐसा साझा मंच है जहां भारत, चीन और पाकिस्तान के शीर्ष नेता एक साथ उपस्थित होते हैं। इस यात्रा और भारत के कूटनीतिक व्यवहार ने पड़ोसियों को बड़े भू-राजनीतिक संकेत दिए हैं।
1. चीन पर असर (संतुलन और संदेश) प्रभाव का मुकाबला : चीन लंबे समय से एससीओ को अपने हितों (जैसे ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’) को साधने का जरिया मानता आया है। पीएम मोदी ने शिखर सम्मेलन में संप्रायिकता (किसी घटना के घटित होने की संभावना) और संप्रभुता का सम्मान करने वाली कनेक्टिविटी पर जोर देकर चीन के आर्थिक आधिपत्य को चुनौती दी है।
गर्मजोशी बनाम कूटनीतिक दूरी: मंच पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच सहज मेल-मिलाप दिखा, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीमा विवाद सुलझ नहीं जाते, तब तक पूर्ण सामान्य द्विपक्षीय संबंध संभव नहीं हैं। वहीं, रूस और भारत की अटूट दोस्ती (कार डिप्लोमेसी) ने चीन को यह संदेश दिया कि वह रूस को पूरी तरह अपने पाले में नहीं ला सकता। उल्लेखनीय है कि मोदी और पुतिन इस दौरान तीसरी बार एक साथ एक कार में साथ-साथ जाते दिखे थे।
2. पाकिस्तान पर प्रभाव (अलगाव और बेनकाब) : आतंकवाद पर दोहरे रवैये की घेराबंदी: एससीओ के मंच से पीएम मोदी ने सीधे तौर पर कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण (टेरर फाइनेंसिंग), कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों (सेफ हैवेंस) को पूरी तरह ध्वस्त करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पर दोहरे रवैये (डबल स्टैंडर्ड्स) की कोई जगह नहीं है। यह सीधे तौर पर पाकिस्तान की नीतियों पर तीखा प्रहार था।
कूटनीतिक हाशिये पर जाना: सम्मेलन के दौरान जहां पीएम मोदी वैश्विक आकर्षण का केंद्र बने रहे और रूस, ईरान व मध्य एशियाई राष्ट्रों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करते रहे, वहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कूटनीतिक रूप से अलग-थलग दिखाई दिए। (यहां तक कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपनी खीझ मिटाने के लिए ग्रुप फोटो को एडिट कर बाकी नेताओं को क्रॉप कर दिया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रहा)।














