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बारिश 12 फ़ीसदी कम, अगस्त-सितंबर का अनुमान भी कमज़ोर। फिर भी बुवाई क्यों नहीं बिगड़ी — और आपके पास अब 11 दिन क्यों बचे हैं

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 4, 2026
in कृषि
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दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।इस मॉनसून की दो बातें एक साथ सही हैं और दोनों उलटी दिशा में जाती हैं। 2 अगस्त तक देश में बारिश सामान्य से 12 फ़ीसदी कम रही है, और मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त-सितंबर में भी बारिश सामान्य के 94 फ़ीसदी से नीचे रह सकती है, क्योंकि अल नीनो का असर बना हुआ है। इसके बावजूद खरीफ़ की बुवाई लगभग पटरी पर आ चुकी है। दरअसल असली सवाल यह नहीं है कि कितनी बारिश हुई — सवाल यह है कि कहां हुई।

देश का औसत आंकड़ा अपने-आप में बहुत कुछ नहीं बताता। बारिश की कमी अगर उस इलाक़े में हो जहां खेती नहर या ट्यूबवेल से चलती है, तो नुक़सान कम होता है। लेकिन वही कमी अगर उस मध्य भारत की पट्टी में हो जहां खेती सिर्फ़ बारिश के भरोसे है, तो फ़सल हाथ से निकल जाती है। इस बार वह मुख्य वर्षा-आधारित इलाक़ा ठीक-ठाक रहा है। यही एक बात है जिसकी वजह से हेडलाइन में 12 फ़ीसदी की कमी दिखते हुए भी बुवाई के आंकड़े संभल गए।

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कहां बरसी, यह ज़्यादा मायने रखता है: देश का औसत 12% कम है, पर मुख्य वर्षा-आधारित पट्टी में बारिश ठीक रही — इसीलिए बुवाई संभल गई।

मॉनसून एक आंकड़ा नहीं है। यह दर्जनों इलाक़ों के अलग-अलग आंकड़े हैं, और फ़सल सिर्फ़ कुछ इलाक़ों की बारिश से तय होती है।

एक नज़र में

• अब तक की कमी: 2 अगस्त तक सामान्य से 12% कम बारिश
• आगे का अनुमान: अगस्त-सितंबर में बारिश सामान्य के 94% से कम रहने के आसार; तापमान भी सामान्य से ऊपर
• वजह: अल नीनो का असर सीज़न भर बने रहने की आशंका
• राहत की बात: मुख्य वर्षा-आधारित इलाक़े में बारिश ठीक रही, बुवाई पटरी पर लौटी
• इस हफ़्ते: 6 अगस्त तक यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश के आसार
• आख़िरी तारीख: खरीफ़ 2026 की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नाम अब 15 अगस्त तक लिखवाया जा सकता है

अब सबसे काम की बात। खरीफ़ 2026 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नाम लिखवाने की तारीख बढ़ाकर 15 अगस्त कर दी गई है। यह तारीख इस साल ख़ास तौर पर काम की है। पहले बीमा की तारीख अक्सर तब निकल जाती थी जब यह पता ही नहीं होता था कि आगे बारिश कैसी रहेगी। इस बार 15 अगस्त तक आपको अगस्त के पहले पखवाड़े की बारिश का हाल दिख चुका होगा — यानी फ़ैसला ज़्यादा जानकारी के साथ लिया जा सकेगा। जिनकी फ़सल पूरी तरह बारिश पर टिकी है, उनके लिए यह 11 दिन का मौक़ा है, न कि बस एक और तारीख।

आगे का रास्ता भी साफ़ है और मुश्किल नहीं। जिन ज़िलों में बारिश कम है, वहां कम अवधि और कम पानी वाली क़िस्मों के बीज ब्लॉक स्तर तक पहले से रखे जाएं। जलाशयों से पानी छोड़ने की योजना सितंबर के अनुमान को देखकर बने, जुलाई के भरे हुए आंकड़े को देखकर नहीं। और किसान अपने स्तर पर बीमा की तारीख का इस्तेमाल करे। भारत ने पिछले दस साल में सिंचाई का दायरा काफ़ी बढ़ाया है, इसलिए कमज़ोर दूसरी छमाही अब संभाली जा सकती है — बशर्ते तैयारी अगस्त के पहले पखवाड़े में हो, आख़िरी में नहीं।

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