• Latest
  • Trending
खेलो इंडिया योजना

खेलो इंडिया का पैसा आठ गुना हुआ — पर गांव-कस्बे के बच्चे के लिए असली बदलाव यह है कि अब चुनाव स्कूल में ही होगा

August 3, 2026
भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

October 6, 2026
भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा...!

भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा…!

October 5, 2026
jai-shankar

न्यूयॉर्क में दिखी नए भारत की ‘दबंग कूटनीति’

October 5, 2026
संसद का मॉनसून सत्र 2026: हंगामे में बर्बाद हुआ समय और जनता के धन का नुकसान

लोकतंत्र में विपक्ष कितना रचनात्मक

October 5, 2026
अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

October 5, 2026
परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

October 5, 2026
स्लीमनाबाद टनल

विंध्य की धरती को मिलेगा मां नर्मदा का आशीर्वाद, जल सुरंग की खुदाई पूरी

October 5, 2026
ev-scooter

23 रुपए में दिनभर के लिए इलेक्टि्रक स्कूटर

October 5, 2026
सोना 4,550 डॉलर के पार, चांदी भी 67 डॉलर के ऊपर

सोना गिरवी रखकर लोन लेने में यूपी वाले सबसे आगे

October 5, 2026
metro

मुंबई मेट्रो का महाविस्तार: 6 नए रूट पर 374 किमी में 130 स्टेशन

October 5, 2026
खटमलों ने उड़ाई अफसरों की नींद

खटमलों ने उड़ाई अफसरों की नींद

October 5, 2026
भारत भी बना रहा अपना ‘सूरज’, गुजरात की लैब में जुटे वैज्ञानिक

भारत भी बना रहा अपना ‘सूरज’, गुजरात की लैब में जुटे वैज्ञानिक

October 5, 2026
Tuesday, October 6, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

खेलो इंडिया का पैसा आठ गुना हुआ — पर गांव-कस्बे के बच्चे के लिए असली बदलाव यह है कि अब चुनाव स्कूल में ही होगा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 3, 2026
in the blitz, खेल, खेल-फ़िल्म
0
खेलो इंडिया योजना

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।बड़ी बात यह है कि रकम आठ गुना हो गई। कैबिनेट ने 31 जुलाई को नए सिरे से बनी खेलो इंडिया योजना और खेल संघों को दी जाने वाली मदद, दोनों को मिलाकर 2026–27 से 2030–31 तक के लिए 36,441 करोड़ रुपये मंज़ूर किए हैं। यह पिछली खेलो इंडिया योजना के मुक़ाबले करीब आठ गुना है।

पर पैसे से ज़्यादा अहम यह है कि पैसा कहां घुसेगा। योजना में दो नई चीज़ें जुड़ी हैं — खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय। इसका मतलब यह है कि प्रतिभा ढूंढने का काम अब आम स्कूल के भीतर होगा, अलग से बने किसी सेंटर में नहीं। तीसरी बात, उभरते खिलाड़ियों यानी इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स की सूची करीब दस गुना बड़ी की जा रही है। तीनों को एक साथ पढ़िए तो साफ़ दिखता है कि सरकार ने कहां हाथ डाला है — अब मदद उन्हें नहीं मिलेगी जो पहले ही सामने आ चुके, बल्कि उन तक पहुंचेगी जो कभी सामने ही नहीं आ पाते।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा…!

रास्ता स्कूल से शुरू होता है: फीडर स्कूल और उत्कृष्ट विद्यालय के ज़रिए बच्चा वहीं परखा जाएगा जहां वह पहले से पढ़ता है।

भारत में हुनरमंद बच्चों की कमी कभी नहीं रही। कमी हमेशा उस छलनी की रही, जो हुनर की जगह ज़िले और जेब से छांटती थी।

एक नज़र में

• मंज़ूरी: 31 जुलाई 2026 — नई खेलो इंडिया योजना और खेल संघों को बढ़ी हुई मदद
• कुल रकम: 36,441 करोड़ रुपये, 2026–27 से 2030–31 तक
• पहले से: करीब आठ गुना
• नया क्या: खेलो इंडिया फीडर स्कूल और उत्कृष्ट विद्यालय
• खिलाड़ियों की सूची: उभरते खिलाड़ियों का दायरा करीब दस गुना
• संघों को मदद: कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, उपकरण, विदेशी कोच, विदेश में मुक़ाबले और कैंप

खेल संघों वाला हिस्सा कम चर्चा में है, पर शायद ज़्यादा काम का है। बढ़ी हुई मदद में कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, आधुनिक उपकरण, विदेश में मुक़ाबलों का ख़र्च, कैंप और विदेशी विशेषज्ञों को बुलाना — सब शामिल है। ये सारे ख़र्च हर साल आते हैं, और यही वह जगह है जहां भारतीय खेल संघ हमेशा फंसते रहे हैं। ओलंपिक वाले साल पैसा आता है, बाक़ी तीन साल सूखा रहता है। एक ही मंज़ूरी में पांच साल का पैसा तय हो जाने से संघ अब पूरे चक्र की योजना बना सकते हैं — और टीम एक सीज़न में नहीं, एक चक्र में बनती है।

अब आगे का असली काम। फीडर स्कूल तभी फीडर स्कूल है जब वहां मैदान हो, कोच हो और साल भर का मुक़ाबला कैलेंडर हो। इतनी बड़ी रकम में सबसे बड़ा ख़तरा यही रहता है कि पैसा इमारत तक तेज़ी से पहुंच जाए और कोच तक धीरे-धीरे। दूसरी ज़रूरत स्पोर्ट्स साइंस की है — फिज़ियोथेरेपिस्ट, आहार विशेषज्ञ और चोट संभालने वाले लोग, वह भी ज़िला स्तर पर, सिर्फ़ राष्ट्रीय कैंप में नहीं। यही एक चीज़ है जो बड़ी हुई सूची को असली खिलाड़ियों में बदलेगी, और यही सबसे धीरे तैयार होती है, क्योंकि पहले इन लोगों को पढ़ाना पड़ता है। अगर हर साल यह आंकड़ा छपे कि ज़िलों में कितने प्रशिक्षित कोच और सहायक स्टाफ़ तैनात हुए, तो देश को दिख जाएगा कि रास्ता सिर्फ़ मंज़ूर हुआ है या बन भी रहा है। ग्लासगो के राष्ट्रमंडल खेलों ने एक बात साबित की — जहां रास्ता बना हुआ है, जैसे मुक्केबाज़ी में, वहां पदक अपने आप आते हैं।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation