ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया है, जिसमें तलाक के मामले में एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (विवाह-बाह्य संबंध) के आरोपी पति के ‘निजता के अधिकार’ के दावे को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि पत्नी अपने पति पर लगे विवाह-बाह्य संबंध के आरोप को साबित करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और होटल बुकिंग से जुड़ी जानकारी जैसे साक्ष्य जुटाने के लिए अदालत की मदद ले सकती है। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अलग रह रहे पति की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दिल्ली हाई कोर्ट के 10 मई, 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। अपील खारिज करते हुए पीठ ने कहा, ‘दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद हमें हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं दिखती।’
हाई कोर्ट ने कहा था?
10 मई, 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि कानून विवाह-बाह्य संबंध को तलाक का वैध आधार मानता है। ऐसे में किसी विवाहित पुरुष पर यदि विवाह के दौरान किसी अन्य महिला के साथ यौन संबंध रखने का आरोप है, तो केवल ‘निजता के अधिकार’ का हवाला देकर उसे कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लेख किया था, जिसमें कहा गया था कि निजता का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित मौलिक अधिकार है, लेकिन यह पूर्ण या असीमित अधिकार नहीं है। जनहित में इस पर उचित और वैधानिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
किस आदेश को दी गई थी चुनौती?
हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति की याचिका खारिज की थी, जिसने फैमिली कोर्ट के 14 दिसंबर, 2022 के आदेश को चुनौती दी थी।














