• Latest
  • Trending
भारत सेमीकंडक्टर मिशन

डिजाइन से सिलिकॉन तक

July 13, 2026
भारत के सरकारी, कौशल, प्रवासी और जनकल्याण अपडेट

भारत के कौशल, प्रवासी, रक्षा, खाद्य और सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रमुख अपडेट

September 24, 2026
भारत स्वास्थ्य, रेलवे, रक्षा और विकास अपडेट

भारत के स्वास्थ्य, रेलवे, रक्षा, आयुर्वेद और विकास से जुड़े प्रमुख अपडेट

September 24, 2026
infra

भारत का निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग, एफटीए और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रमुख आर्थिक अपडेट

September 24, 2026
भारत मंडपम, नई दिल्ली में 9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह का उद्घाटन करते उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, 22 सितंबर 2026। श्रेय : पीआईबी।

भारत की सरकारी योजनाएं, उड़ान, जल सप्ताह और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: प्रमुख अपडेट

September 24, 2026
आयुर्वेद, कोयला, सेमीकंडक्टर, MMA और सिने हब

22 सितंबर 2026 की प्रमुख खबरें: आयुर्वेद, कोयला, सेमीकंडक्टर, MMA और सिने हब

September 23, 2026
EPF स्कीम 2026 नए नियम

22 सितंबर 2026 की प्रमुख खबरें: पीएफ सीमा, न्यूजीलैंड FTA, फिल्म पुरस्कार और CAG रिपोर्ट

September 22, 2026
daily-news

भारत की प्रमुख खबरें 22 सितंबर 2026: बुजुर्ग योजना, कोर सेक्टर, हाईवे और रक्षा

September 22, 2026
daily-news

भारत की प्रमुख खबरें 21 सितंबर 2026: तेजस उड़ान, ग्वालियर टेलीकॉम जोन, खेल और फिल्म पुरस्कार

September 21, 2026
ब्रिक्स ने पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की

ब्रिक्स 2026: भारत की कूटनीतिक विजय

September 21, 2026
केदारनाथ यात्रा 2026

केदारनाथ पर बढ़ता प्राकृतिक जोखिम

September 21, 2026
पीएम मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ बयान: विपक्ष की प्रतिक्रिया और वैचारिक बहस

सेवा के 25 वर्ष सुशासन का संकल्प और राष्ट्र निर्माण की सतत यात्रा।

September 21, 2026
modi

पीएम मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुआ ‘सेवा संकल्प अभियान’

September 21, 2026
Thursday, September 24, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

डिजाइन से सिलिकॉन तक

चिप मैन्युफैक्चरिंग का हब बनने के सफर में कहां खड़ा है भारत ?

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 13, 2026
in the blitz
0
भारत सेमीकंडक्टर मिशन

हरविंदर आहूजा

कुछ साल पहले, भारत में सेमीकंडक्टर बनाने का विचार भविष्य की बात लगती थी। आज यह असलियत बन रहा है। गुजरात के साणंद में माइक्रोन का पैकेजिंग प्लांट पहले से ही चालू है; धोलेरा में बड़े पैमाने पर फैब्रिकेशन यूनिट बन रही है; और सात राज्यों में ऐसी फैक्टि्रयां बन रही हैं जो भविष्य की चिप्स को असेंबल, टेस्ट और पैकेज करेंगी। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनने की भारत की कोशिश ने बहुत कम समय में पॉलिसी पेपर से आगे बढ़कर ज़मीन पर काम शुरू कर दिया है।

इस बदलाव के पैमाने को देश की शुरुआती स्थिति से बेहतर समझा जा सकता है। जब 2021 में ₹76,000 करोड़ के बजट के साथ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) शुरू किया गया था, तब देश में कमर्शियल चिप फैब्रिकेशन न के बराबर था और इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी सेमीकंडक्टर आयात किए जाते थे। उसके बाद के सालों में, सरकार ने कई प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है, जिनमें कुल मिलाकर लगभग ₹1.6 लाख करोड़ का निवेश शामिल है। साथ ही, 2026-27 के बजट में आईएसएम 2.0 लॉन्च किया गया — जिसमें एक साल के लिए ₹8,000 करोड़ का आवंटन किया गया, जो इस प्रोग्राम की शुरुआत के बाद से सबसे बड़ा आवंटन है ताकि इस कोशिश को इक्विपमेंट, मटीरियल, डिज़ाइन और स्किल्स तक बढ़ाया जा सके। अब सवाल यह नहीं है कि भारत चिप्स बनाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि इसका इकोसिस्टम कितनी तेज़ी से और कितना मज़बूत हो सकता है।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत के कौशल, प्रवासी, रक्षा, खाद्य और सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रमुख अपडेट

भारत के स्वास्थ्य, रेलवे, रक्षा, आयुर्वेद और विकास से जुड़े प्रमुख अपडेट

सही समय पर उठाए गए इस कदम से इसकी अहमियत और बढ़ गई है। जब दुनिया चिप सप्लाई चेन पर दोबारा सोच रही है और कुछ ही जगहों पर निर्भरता कम करके विविधता लाने की कोशिश कर रही है, तो सेमीकंडक्टर बनाने में सक्षम एक बड़ी, स्थिर और कुशल अर्थव्यवस्था ग्लोबल मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक आकर्षक विकल्प है। भारत के लिए, घरेलू इंडस्ट्री का मतलब सिर्फ़ नौकरियां और एक्सपोर्ट नहीं है: इसका मतलब है सप्लाई में आने वाले झटकों से बेहतर ढंग से निपटना, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और डिफेंस सेक्टर में मज़बूत स्थिति बनाना, और उन टेक्नोलॉजीज़ में मज़बूत पकड़ बनाना जो आने वाले दशकों को तय करेंगी। इस लिहाज़ से, यह मिशन व्यापार के साथ-साथ रणनीतिक आत्मनिर्भरता के बारे में भी है।

बैक-एंड से शुरुआत

भारत की रणनीति समझदारी से उस जगह से शुरू हुई है जहाँ उसे सबसे पहले सफलता मिल सकती है: चिप इंडस्ट्री के ‘बैक-एंड’ यानी असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग में। 28 फरवरी को प्रधानमंत्री ने साणंद में माइक्रोन की असेंबली और टेस्टिंग सुविधा का उद्घाटन किया। इसमें ₹22,500 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है। यह मौजूदा मिशन साइकल का पहला प्लांट है जो चालू हुआ है और इसने भारत को सेमीकंडक्टर के नक्शे पर मज़बूती से स्थापित किया है। इसके बाद ऐसी ही कई और यूनिट्स आ रही हैं: रेनेसास और स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के साथ सीजी पावर का वेंचर, गुजरात में केन्स सेमीकॉन, उत्तर प्रदेश में जेवर के पास डिस्प्ले-ड्राइवर चिप बनाने वाला एचसीएल-फॉक्सकॉन का जॉइंट वेंचर, और असम के जागीरोड में टाटा की ₹27,000 करोड़ की सुविधा — जो नॉर्थ-ईस्ट की पहली सुविधा होगी और जिससे लगभग 27,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है

यह सोच सही है। फैब्रिकेशन की तुलना में पैकेजिंग और टेस्टिंग में कम पूंजी लगती है, इन्हें तेज़ी से बनाया जा सकता है, और ये सटीक मैन्युफैक्चरिंग और कुशल लेबर के मामले में भारत की ताकतों का फ़ायदा उठाते हैं। इनसे देश को ग्लोबल सप्लाई चेन में शुरुआती और मजबूत जगह मिलती है, बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा होते हैं, और ऐसी औद्योगिक क्षमता और सप्लायर संबंध बनते हैं जिन पर बाद में ज़्यादा एडवांस्ड स्टेज की नींव रखी जा सकती है।

फैब्रिकेशन का मोर्चा

सबसे मुश्किल और अहम चरण फैब्रिकेशन ही है — यानी सिलिकॉन वेफर्स पर सर्किट बनाना — और इस मामले में भी भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। धोलेरा में, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, ताइवान की पावरचिप (पीएसएमसी) के साथ मिलकर लगभग ₹91,000 करोड़ के निवेश से एक फैब (मैन्युफैक्चरिंग प्लांट) बना रही है। इसकी योजना हर महीने 50,000 वेफर्स बनाने की है और लक्ष्य 2026 के आखिर तक पहला सिलिकॉन तैयार करना है। खास बात यह है कि यह प्लांट कुछ नैनोमीटर वाली सबसे एडवांस्ड चिप्स के बजाय 28 नैनोमीटर और उससे ऊपर के मैच्योर-टू-एडवांस्ड नोड्स पर फोकस करेगा।

यह एक समझदारी भरा फैसला है: ऐसी चिप्स कारों, इंडस्ट्रियल मशीनों, डिस्प्ले ड्राइवर्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) में इस्तेमाल होती हैं — ये बड़े और बढ़ते हुए मार्केट हैं जहाँ मांग बनी रहती है और मुकाबला सबसे एडवांस्ड चिप्स वाले मार्केट के मुकाबले कम कड़ा होता है। आधुनिक इंडस्ट्री में फैब बनाना सबसे मुश्किल कामों में से एक है, जिसके लिए बहुत शुद्ध पानी, बिना रुकावट बिजली, बहुत ज़्यादा सफाई और स्पेशलिस्ट इंजीनियरों की एक बड़ी टीम की ज़रूरत होती है। भारत इन चीज़ों को साथ-साथ सीख रहा है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय के अनुसार, 2026 के आखिर तक चार प्लांट और 2027 में दो और प्लांट शुरू होने की उम्मीद है, जबकि धोलेरा में पहली पूरी फैब्रिकेशन यूनिट 2028 तक तैयार हो जाएगी। इस रास्ते को आसान बनाने के लिए, कई राज्यों ने पक्क ी बिजली, पानी और कनेक्टिविटी वाले खास सेमीकंडक्टर पार्क तैयार किए हैं, जबकि केंद्र सरकार की इंसेंटिव स्कीम प्रोजेक्ट की लागत का एक बड़ा हिस्सा कवर करती है। इस सीढ़ी पर हर कदम देश को उन चिप्स को अपने देश में बनाने के करीब लाता है जिन्हें वह लंबे समय से इम्पोर्ट करता रहा है।

भारत का स्थायी फायदा

अगर मैन्युफैक्चरिंग एक नया अध्याय है, तो चिप डिज़ाइन भारत की स्थापित ताकत है और इस दौड़ में उसकी सबसे बड़ी खूबी है। दुनिया के सेमीकंडक्टर डिज़ाइन टैलेंट में भारतीय इंजीनियरों की हिस्सेदारी लगभग पांचवां हिस्सा है, जो चुपचाप दुनिया भर के डिवाइस में इस्तेमाल होने वाली चिप्स को आकार दे रहे हैं। सरकार की डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) स्कीम ने उस टैलेंट को घरेलू प्रोडक्ट्स में बदलना शुरू कर दिया है, जिससे किसी कंपनी के डिज़ाइन खर्च का आधा हिस्सा तक कवर होता है; डीएलआई-सपोर्टेड कंपनियों ने पहले ही 16 टेप-आउट पूरे कर लिए हैं, छह एएसआईसी चिप्स बना लिए हैं और सरकारी मदद से तीन गुना ज़्यादा प्राइवेट इन्वेस्टमेंट हासिल किया है।

सिर्फ चार सालों में भारत ने अपनी महत्वाकांक्षा को हकीकत में बदलना शुरू कर दिया है एक पैकेजिंग प्लांट चालू हो चुका है, गुजरात में एक बड़ा फैब (सेमीकंडक्टर प्लांट) बन रहा है और देश के पास ऐसी डिज़ाइन वर्कफोर्स है जिसकी दुनिया भर में तारीफ हो रही है।

‘चिप्स-टू-स्टार्टअप’ प्रोग्राम, जो अब 113 एकेडमिक संस्थानों तक फैला हुआ है, और आईआईटीज में खास वीएलएसआई कोर्स इस पाइपलाइन को और बढ़ा रहे हैं। जो देश चिप्स डिज़ाइन कर सकता है, वह आखिरकार उनकी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) का मालिक बनने की बेहतर स्थिति में होता है, न कि सिर्फ़ दूसरों के लिए उन्हें असेंबल करने की।

अभी भी कुछ चीजें बाकी हैं

सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम एक चेन की तरह है, और भारत अभी भी इसकी कुछ कड़ियों को जोड़ रहा है। देश अभी भी फैब में इस्तेमाल होने वाली ज़्यादातर चीज़ें — जैसे सिलिकॉन वेफर्स, खास गैसें और केमिकल, फोटोरेसिस्ट, मास्क और लिथोग्राफी के लिए ज़रूरी एडवांस्ड इक्विपमेंट इम्पोर्ट करता है, और इन मटीरियल्स के लिए घरेलू सप्लायर बेस अभी बनना शुरू ही हुआ है।

फैब्रिकेशन के लिए खास तरह के टैलेंट की भी जरूरत होती है — प्रोसेस और इक्विपमेंट इंजीनियर जो प्लांट की पैदावार को ज्यादा बनाए रखते हैं और जैसे-जैसे फैब चालू होंगे, इनकी संख्या तेज़ी से बढ़ानी होगी। ये रुकावटें नहीं हैं, बल्कि एक मैच्योर होती इंडस्ट्री का स्वाभाविक एजेंडा हैं और आईएसएम 2.0 को इन्हीं क्षेत्रों को मज़बूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

आगे का रास्ता

इसका फ़ायदा बहुत बड़ा है। भारत का अपना सेमीकंडक्टर मार्केट, जो आज लगभग $45-52 बिलियन का है, उसके 2030 तक $100-120 बिलियन से ज़्यादा होने और उसके बाद भी बढ़ते रहने का अनुमान है, जबकि ग्लोबल मार्केट ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ रहा है।

लंबे समय तक अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए, देश उस नींव पर मज़बूती से आगे बढ़ सकता है जो उसने रखी है। मटीरियल्स, गैसों और इक्विपमेंट की सप्लाई चेन को मज़बूत करना ताकि फैब ज़्यादातर चीज़ें देश में ही ले सकें; इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेनिंग के ज़रिए प्रोसेस-इंजीनियरिंग टैलेंट को बढ़ाना; ऐसे स्थिर और लंबे समय के इंसेंटिव बनाए रखना जिनसे इन्वेस्टर्स को भरोसा मिले; हर प्लांट के आस-पास घरेलू सप्लायर्स और स्टार्टअप्स का बेस तैयार करना; और उन ज़रूरी मिनरल्स और इनपुट्स तक लगातार पहुंच सुनिश्चित करना जिन पर इंडस्ट्री निर्भर करती है।

आगे बढ़ने की दिशा साफ़ है, और वह है आगे की ओर। चार साल के समय में भारत ने एक ऐसी इंडस्ट्री की शुरुआत कर ली है जिसके बारे में कई लोगों को लगता था कि इसमें एक दशक लगेगा। एक काम करने वाला पैकेजिंग प्लांट, एक बनता हुआ फैब, प्रोजेक्ट्स का बढ़ता हुआ क्लस्टर और एक बेहतरीन डिज़ाइन वर्कफोर्स। अब काम है धैर्य के साथ आगे बढ़ते रहना: एक-एक कड़ी जोड़ते हुए तब तक निर्माण करते रहना जब तक ‘मेड इन इंडिया’ वाली चिप सिर्फ एक हेडलाइन न रहकर एक आदत न बन जाए। मौजूदा सबूतों के आधार पर, यह लक्ष्य देश की पहुँच के भीतर है।

सोर्स: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम ) / मेइटी; पीआईबी; इन्वेस्ट इंडिया; नीति आयोग; केंद्रीय बजट 2026-27; कंपनियों की घोषणाएं (टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स-पीएसएमसी, माइक्रोन, सीजी पावर-रेनेसास, एचसीएल-फॉक्सकॉन)।

अब तक की प्रगति

2021 में शुरुआत करने के बाद, भारत ने पूरी वैल्यू चेन में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की नींव रखी है। मुख्य उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

प्रोजेक्ट्स : आईएसएम और स्पैक्स के तहत 7 राज्यों में लगभग 13 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है; इनमें लगभग ₹1.6 लाख करोड़ का निवेश तय हुआ है।

पहला प्लांट शुरू : गुजरात के साणंद में माइक्रोन की असेंबली-और-टेस्ट फैसिलिटी (₹22,500 करोड़ से ज़्यादा), जिसका उद्घाटन 28 फरवरी, 2026 को हुआ।

प्रमुख फैब : धोलेरा में टाटा-पीएसएमसी लगभग ₹91,000 करोड़, 50,000 वेफर्स/महीना, 28एनएम और उससे ऊपर की तकनीक, पहला सिलिकॉन 2026 के अंत तक बनने की उम्मीद है।

पैकेजिंग का दौर : सीजी पावर-रेनेसास और केन्स (गुजरात), एचसीएल-फॉक्सकॉन डिस्प्ले ड्राइवर बना रहे हैं (यूपी), और असम के जागीरोड में ₹27,000 करोड़ का टाटा ओसेट जो नॉर्थ-ईस्ट का पहला प्लांट है।

पॉलिसी : बजट 2026-27 में ₹8,000 करोड़ के बजट के साथ आईएसएम 2.0 लॉन्च किया गया। यह अब तक का सबसे बड़ा सालाना आवंटन है।

टाइमलाइन : 2026 के आखिर तक 4 प्लांट चालू हो जाएंगे, 2027 में 2 और, और 2028 तक धोलेरा में पहला पूरा फैब तैयार हो जाएगा (इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय)।

डिजाइन में बढ़त : दुनिया के चिप-डिजाइन टैलेंट में भारतीय इंजीनियरों की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है; डीएलआई से 16 टेप-आउट और 6 एएसआईसी तैयार हुए हैं।

मार्केट : आज घरेलू मांग लगभग $45-52 बिलियन है, जिसके 2030 तक $100-120 बिलियन से ज़्यादा होने का अनुमान है; 80,000 से ज्यादा सीधी नौकरियां और कई लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां।

अगले चरण को मजबूत बनाना

मिशन का दूसरा चरण एक मज़बूत शुरुआत को एक टिकाऊ इंडस्ट्री में बदल सकता है। वे प्राथमिकताएं जो इस इकोसिस्टम को सबसे ज़्यादा मजबूत बनाएंगी:

सप्लाई चेन को बढ़ाना: सिलिकॉन वेफ़र्स, खास गैसों, केमिकल्स, फोटोरेसिस्ट, मास्क और फ़ैब इक्विपमेंट के घरेलू स्रोत विकसित करना, ताकि प्लांट विदेशों के बजाय ज़्यादातर इनपुट देश से ही ले सकें।

सही टैलेंट को बढ़ाना: फ़ैब की पैदावार को ज़्यादा बनाए रखने वाले प्रोसेस और इक्विपमेंट इंजीनियरों और टेक्नीशियनों के लिए इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेनिंग का विस्तार करना, ताकि भारत के पास पहले से मौजूद डिज़ाइन टैलेंट को और बेहतर बनाया जा सके।

स्थिर इंसेंटिव बनाए रखना: आईएसएम 2.0 के तहत पॉलिसी सपोर्ट को लंबे समय तक और अनुमानित बनाए रखना, ताकि निवेशकों को कई सालों का भरोसा मिले, जिसकी फ़ैब के कामकाज के लिए ज़रूरत होती है।

सप्लायर्स और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना: 113 संस्थानों में फैले ‘चिप्स-टू-स्टार्टअप’ पाइपलाइन के ज़रिए हर प्लांट के आस-पास घरेलू वेंडर्स और फ़ैबलेस डिज़ाइन स्टार्टअप्स के क्लस्टर बनाना।

जरूरी इनपुट सुरक्षित करना: ज़रूरी मिनरल्स, अल्ट्रा-प्योर पानी और बिना रुकावट बिजली तक भरोसेमंद और लंबे समय तक पहुंच पक्क ी करना, जिन पर फ़ैब्रिकेशन निर्भर करता है।

डिजाइन में बढ़त का फ़ायदा उठाना: वर्ल्ड-क्लास डिज़ाइन टैलेंट को घरेलू इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और तैयार प्रोडक्ट्स में बदलना, जिससे भारत वैल्यू चेन में सर्विस सेक्टर से आगे बढ़कर ओनरशिप (मालिकान हक़) की ओर बढ़ सके।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation