ब्लिट्ज ब्यूरो
बर्न। यूरोप में हीटवेव का कहर जारी है। फ्रांस से लेकर स्विट्जरलैंड तक गर्मी के चलते लोग परेशान हैं। हीटवेव की वजह से जलवायु संकट खड़ा हो गया है। स्विट्जरलैंड में ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं जबकि फ्रांस में जानलेवा गर्मी से एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। फ्रांस में 13500 से अधिक स्कूल अत्यधिक गर्मी के कारण बंद भी कर दिए गए हैं।
स्विट्जरलैंड में ग्लेशियरों से इस साल भारी मात्रा में बर्फ पिघलने की आशंका है। स्विट्जरलैंड के ‘ग्लेशियर लॉस डे’ (ग्लेशियर से बर्फ खत्म होने का दिन) तक पहुंचने की आशंका है।
‘ग्लेशियर लॉस डे’ वह समय होता है जब पिछली सर्दियों में जमा हुई सारी बर्फ पिघल चुकी होती है। इसके बाद अक्टूबर तक, बर्फ पिघलने का हर दिन ग्लेशियर की बर्फ में कुल नुकसान का कारण बनता है, जिससे ग्लेशियर और सिकुड़ते जाते हैं। स्विट्जरलैंड में ऐसा दूसरी बार होने की आशंका है।
स्विट्जरलैंड में ग्लेशियर मॉनिटरिंग एजेंसी के प्रमुख मैथियास हुस ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, ‘हम पूरे आल्प्स में बर्फ को पिघलते हुए देख रहे हैं। सामान्य स्थिति की तुलना में हम तीन महीने आगे चल रहे हैं
यूरोप के कई अन्य देशों में भीषण गर्मी और लू ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। तापमान के नए रिकार्ड बन रहे हैं, स्कूलों के समय बदले जा रहे हैं और खुले में काम करने वालों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
फ्रांस में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के कारण 13,500 से ज्यादा स्कूलों को बंद करना पड़ा है या उनके समय में बदलाव किया गया है। ब्रिटेन में दक्षिणी लंदन में गुरुवार को तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। इसे इस गर्मी के मौसम का सबसे गर्म दिन बताया जा रहा है। देश में लगातार तीसरे दिन रेड हीट अलर्ट जारी रहा। गर्मी के कारण करीब 1,000 स्कूल आंशिक या पूरी तरह बंद रहे।













