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6 करोड़ साल पुरानी शालिग्राम शिलाओं से बनेगी भगवान राम-सीता की मूर्ति

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6 करोड़ साल पुरानी शालिग्राम शिलाओं से बनेगी भगवान राम-सीता की मूर्ति

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 3, 2023
in राष्ट्रीय
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6 करोड़ साल पुरानी शालिग्राम शिलाओं से बनेगी भगवान राम-सीता की मूर्ति

6 करोड़ साल पुरानी शालिग्राम शिलाओं से बनेगी भगवान राम-सीता की मूर्ति

ब्लिट्ज ब्यूरो

अयोध्या। 373 किलोमीटर और 7 दिन के सफर के बाद दो विशाल शालिग्राम शिलाएं अयोध्या पहुंच गई हैं। रामसेवक पुरम में 51 वैदिक ब्राह्मणों ने शालिग्राम शिलाओं का पूजन कराया। इसके बाद नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि और जानकी मंदिर के महंत तपेश्वर दास ने चंपत राय को शालिग्राम शिलाएं सौंप दीं। इसी 6 करोड़ साल पुराने शालिग्राम पत्थर से भगवान राम और सीता की मूर्ति बनेगी, जो राम दरबार में स्थापित की जाएंगी विमलेंद्र निधि ने बताया कि जनकपुर में राम व जानकी की जयंती के साथ ही सीताराम विवाह धूमधाम से मनाते हैं। महंत तपेश्वर दास की मंशा से यह काम हो रहा है। न्यायालय के फैसले के बाद मन में आया कि राममंदिर में शालिग्राम शिला की मूर्ति लगे। इसके लिए 40 शिलाओं की पहचान की गई। वैज्ञानिक तरीके से पहचान के बाद ट्रस्ट से पत्राचार किया गया। विमलेंद्र निधि ने बताया कि वे नृपेंद्र मिश्र से भी मिले। फिर दोनों देशों के बीच सहमति बनी। शिला को भारत लाने के लिए मुझे और महंत राम तपेश्वर दास को जिम्मेदारी दी गई थी।

अयोध्या में उत्सव जैसा माहौल

बुधवार रात शिला लाने वाले वाहन के अयोध्या पहुंचने पर उत्सवी माहौल बन गया। सरयू नदी के पुल पर फूल बरसाकर और नगाड़े बजाकर स्वागत किया गया। जय श्रीराम के जयकारे लगे। श्रद्धालुओं का हजूम इस कदर उमड़ा कि शिलाओं को रामसेवकपुरम पहुंचने में 1 घंटा लग गया। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र, मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने शिलाओं को रामसेवकपुरम में रखवाया। सुरक्षा के लिए बाहर पीएसी पुलिस तैनात की गई है।

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शिला पूजन में शामिल होने के लिए 100 महंतों को आमंत्रित किया गया है। ओडिशा और कर्नाटक से भी शिलाएं अयोध्या आएंगी। इन सभी का तुलनात्मक अध्ययन मूर्तिकार करेंगे। फिर उनके परामर्श पर ट्रस्टी विचार करेंगे।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने बताया कि ‘भगवान श्रीराम के मंदिर में मूर्ति किस तरीके की हो और किन शिलाओं से यह मूर्ति निर्मित हो, इस पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट विचार कर रहा है। इसके लिए देशभर के मूर्तिकारों के विचारों को जानने के लिए बुलाया गया है। भगवान की मूर्ति की भाव भंगिमां कैसी हो, इस पर गहनता से विचार किया जा रहा है।

ओडिशा और कर्नाटक की भी शिलाएं मंगवाई गई हैं, लेकिन उनके यहां आने का समय अभी तय नहीं हुआ है। सभी शिलाओं को एकत्र करने के बाद विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही गर्भगृह की मूर्ति किस पत्थर से बनाई जाएगी यह निर्णय लिया जाएगा।

मूर्तियां गर्भगृह में की जाएंगी स्थापित

जानकारी के अनुसार सभी शिलाओं की जांच के बाद, उनमें से एक शिला का इस्तेमाल गर्भगृह के ऊपर पहली मंजिल पर बनने वाले दरबार में श्रीराम की मूर्ति बनाने में किया जाएगा। वहीं लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की मूर्तियां भी इन्हीं शिलाओं से बनाई जाएंगी। बता दें, गर्भगृह में अभी श्रीराम समेत चारों भाई बाल रूप में विराजमान हैं।

इन प्रतिमाओं के छोटे होने के कारण भक्त अपने आराध्य को निहार नहीं पाते हैं। ऐसे में बताया जा रहा कि इन प्रतिमाओं का बड़ा स्वरूप बनाया जाएगा।

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