• Latest
  • Trending
जलवायु परिवर्तन जैसी धरती की गंभीर

जलवायु परिवर्तन जैसी धरती की गंभीर

November 12, 2022
दिल्ली लक्ष्मी योजना: 4,000 महिलाओं को स्वीकृति पत्र, 1 सितंबर से मिलेंगे ₹2,500

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

August 26, 2026
UPI

यूपीआई के दस साल: अब औसत भुगतान सिर्फ़ ₹1,300 का

August 26, 2026
भारत उच्च शिक्षा

एच-1बी पर एक लाख डॉलर की नई फ़ीस का प्रस्ताव

August 26, 2026
hospital

मौसमी बुखार सामान्य है, पर इन चार को इंतज़ार नहीं करना

August 26, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ श्रमिक जुड़े, जानें रजिस्ट्रेशन और योजनाओं का लाभ

ई-श्रम के पाँच साल: 31.89 करोड़ नाम, और आपका हक़

August 26, 2026
daily-news

26 अगस्त की बड़ी खबरें: पंजाब में चीनी स्टॉक, शिमला भूकंप, खेलो इंडिया, बाजार और इसरो लॉन्च

August 26, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना 2026

दिल्ली लक्ष्मी योजना: पहले 4,000 पत्र आज

August 26, 2026
सुप्रीम कोर्ट

क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष पीठ

August 26, 2026
Amit Sah

तीन नए कानून, और एक साल की समयसीमा

August 26, 2026
गेहूँ के आटा-मैदा निर्यात से हटी रोक, किसानों और मंडी भाव पर क्या होगा असर?

बारिश 13% कम, पर दाल का रकबा बढ़ गया

August 26, 2026
farmer

चार साल बाद गेहूं और आटे का निर्यात खुला

August 26, 2026
daily-news

भारत की प्रगति की रिपोर्टिंग

August 26, 2026
Thursday, August 27, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

जलवायु परिवर्तन जैसी धरती की गंभीर

समस्याओं से कैसे निजात दिलाएगा कॉप?

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 12, 2022
in दृष्टिकोण
0
जलवायु परिवर्तन जैसी धरती की गंभीर

-हरित ऊर्जा व हरित क्रांति ही इस समस्या के समाधान की तरफ आगे ले जाएगी। कॉप-27 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व के समक्ष कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जटिल जलवायु परिवर्तन की समस्या का सरल समाधान हरित क्रांति के रूप में प्रदान किया है।

बेमौसम बाढ़, और सूखे से भारत पिछले कई सालों से परेशान है। अब पहले जैसे मौसम नहीं रहे, कभी भी बरसात और सर्द-गर्म का एहसास होने लगता है। विशेषज्ञ इसके पीछे जलवायु परिवर्तन को एक बड़ा कारण मानते हैं। अब भारत को कॉप-27 के जरिए इस समस्या के हल के लिए विकसित देशों से सकारात्मक पहल किए जाने की उम्मीद है। कॉप-27 क्या है और यह कैसे जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं से निजात दिलाएगा, यह एक विचारणीय मुद्दा है।

YOU MAY ALSO LIKE

कोलाहल का अखाड़ा न बने संसद

ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा नॉर्थ ईस्ट

कॉप-27 का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में प्रयास करना है। कार्बन उत्सर्जन, अनुकूलन, क्लाइमेट फाइनेंस ये 3 विशेष मुद्दे हैं। चिंता की बात यह है कि जलवायु परिवर्तन से वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है, बेमौसम बाढ़ एवं सूखा पड़ने से किसान परेशान हो रहे हैं। पानी की कमी, उपज में गिरावट, भोजन की असुरक्षा और प्रदूषण का बढ़ता खतरा दिनोंदिन गंभीर होता जा रहा है। साथ ही गरीबी भी बहुत तेजी से अपने पांव फैला रही है। ये सभी चिंतन का विषय हैं।

कॉप-27 की बैठक में शामिल होने से पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा था कि भारत विकासशील देशों के लिए फाइनेंस और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की मांग विकसित देशों से करेगा ताकि विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सके। इसके अलावा सार्वजनिक और निजी फाइनेंस को अलग करने के बारे में बात करते हुए पर्यावरण मंत्री ने कहा था कि भारत इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेगा, चाहे वह अनुदान हो, ऋण हो या सब्सिडी। इन सभी मुद्दों को सम्मेलन में उठाए जाने की बात कही गई थी। अब इन मुद्दों के समाधान में कितनी सफलता मिल पाएगी और क्या नतीजे निकलते हैं यह देखना होगा।

आज जलवायु परिवर्तन की स्थिति इतनी गंभीर होती जा रही है कि जब खेती को पानी की जरूरत हो, और बरसात ना हो तो नुकसान होता है तथा जब पानी की आवश्यकता ना हो, और मूसलाधार बरसात हो जाए तब भी फसल खराब हो जाती है। वस्तुत: पिछले कुछ सालों से ऐसा ही हो रहा है। 2022 में इंग्लैंड और पूरा यूरोप गर्मी से परेशान रहा। भारत के अलग-अलग इलाकों में खूब बारिश हुई तो कई इलाकों में बारिश ना होने के कारण धान की बुआई भी नहीं हो पाई। पाकिस्तान में भी कुछ ऐसी ही हालत देखी गई। इन सब के पीछे जलवायु परिवर्तन एक महत्वपूर्ण वजह है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में लगभग 5.5 करोड़ लोग हर साल सूखे से प्रभावित होते हैं सूखे की वजह से बीमारी और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है जिससे बड़े पैमाने पर पलायन होता है। 2022 में दुनिया के कई देशों में बाढ़ का कहर रहा। पाकिस्तान में बाढ़ से 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। नाइजीरिया के 18 राज्य हद से ज्यादा बाढ़ की चपेट में आ गए जिसमें 600 से अधिक लोग मर गए और 10 लाख से अधिक लोग पलायन कर गए। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में बाढ़ से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है और वहां के हजारों लोगों को घर छोड़ना पड़ा। बहुत ज्यादा चारागाहों का बनना, जंगलों की कटाई और बढ़ते शहरों की वजह से पृथ्वी का 40 फीसद भाग खराब हो चुका है। दुनिया भर के सभी महाद्वीपों में सिंचाई वाली भूमि का 20 से 50 प्रतिशत हिस्सा इतना नमकीन हो चुका है कि वहां उपज मुश्किल होती जा रही है।

आगामी वर्षों में जलवायु परिवर्तन के साथ ही दुनिया के कई जगहों में पानी की भी समस्या देखने को मिली है। केपटाउन को 2017 में भारी जलसंकट से जूझना पड़ा था। ऐसी ही समस्या चेन्नई के लोगों को भी हुई थी। गर्मी ने भी तहलका मचा रखा है। अफ्रीका के उप-सहारा क्षेत्र से लेकर अंटार्कटिका तक तापमान में तेजी आई है। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन, प्रदूषण, जंगल की कटाई सहित वो सभी भयानक चीजें जो हम कर रहे हैं उसकी वजह से धरती के तापमान में लगातार तेजी आ रही है। भारत में भी गर्मी का स्तर बीते कुछ वर्षों में बढ़ा है और लोगों के लिए मुसीबत का कारण बना है। आज जलवायु परिवर्तन की स्थिति इतनी गंभीर होती जा रही है कि जब आपकी खेती को पानी की जरूरत हो, और बरसात ना हो तो नुकसान होता है तथा जब पानी की आवश्यकता ना हो, और मूसलाधार बरसात हो जाए तब भी फसल खराब हो जाती है। वस्तुत: पिछले कुछ सालों से ऐसा ही हो रहा है। 2022 में इंग्लैंड और पूरा यूरोप गर्मी से परेशान रहा। भारत के अलग-अलग इलाकों में खूब बारिश हुई तो कई इलाकों में बारिश ना होने के कारण धान की बुआई भी नहीं हो पाई। पाकिस्तान में भी कुछ ऐसी ही हालत देखी गई। इन सब के पीछे जलवायु परिवर्तन एक महत्वपूर्ण वजह है।

मानव सभ्यता इस वक्त बड़े संकट में है। भारत ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में हरित ऊर्जा की वकालत की है। हरित क्रांति एक सुखद अहसास है। हरित ऊर्जा व हरित क्रांति ही इस समस्या के समाधान की तरफ आगे ले जाएगी। कॉप-27 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व के समक्ष कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जटिल जलवायु परिवर्तन की समस्या का सरल समाधान हरित क्रांति के रूप में प्रदान किया है। संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने भी चेताया कि इस धरती को बचाने का वक्त यही है, अगर अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ी को नरक की आग में धकेलने के लिए हम तैयार रहें।

जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याओं का जाल इसकदर तेजी से बढ़ रहा है कि इससे अब अगर तुरंत न निपटा गया तो समस्याएं हल करना मुश्किल हो जाएगा। इसके लिए धन की भी जरूरत होगी। कॉप-27 में क्लाइमेट फाइनेंस भी बड़ा विषय है क्योंकि बिना पैसे के सभी योजनाएं धरी की धरी रह जाएंगी। विकासशील देशों ने पर्याप्त फंडिंग के लिए विकसित देशों से आग्रह करने का विचार किया है। सम्मेलन में विकसित देशों द्वारा प्रति वर्ष 100 अरब डॉलर मुहैया कराए जाने का वादा चर्चा का केंद्र बिंदु है जो अभी पूरा नहीं किया गया है। अब जब जलवायु परिवर्तन पर दुनिया के महत्वपूर्ण और जिम्मेदार लोग एक साथ बैठ रहे हैं तो उम्मीद जरूर की जानी चाहिए कि कुछ न कुछ सकारात्मक एवं खास नतीजा तो अवश्य निकल ही सकता है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation