नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में यूपीएससी शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए फ्लाईदुबई के विमान में लोगों की जान बचाने वाले हीरो कैप्टन स्मित मच्छार की तारीफ करते हुए कहा कि एक हिन्दुस्तानी कैप्टन स्मित ने 9/11 जैसी घटना (अमेरिका में 2001 में हुआ आतंकी हमला) होने से बचा लिया।
भारत की नौकरशाही की रीढ़ संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी ने अपने गठन के 100 साल पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर गुरुवार 1 अक्टूबर को दिल्ली के भारत मंडपम में ‘शताब्दी समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया जिसे पीएम मोदी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 100 साल में पीढ़ियां, सरकारें सभी बदलीं लेकिन यूपीएससी पर भरोसा पहले जैसा ही अटूट बना हुआ है।
क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने कहा- कल जो एक घटना घटी और जिस पर आज इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि एक हिंदुस्तानी ने 9/11 होने से बचा लिया; हर देशवासी के लिए कैप्टन स्मित का ये पराक्रम हमें गौरव से भर देता है। आज मेरी उनके पिता भूपेंद्र भाई, उनकी माता गीता बहन और पत्नी बहन सोनल से भी बातचीत हुई। मैं देशवासियों से प्रार्थना करता हूं कि हम सब स्मित की दीर्घायु की कामना करें और उनका अभिनंदन करें।
यूपीएससी पर भरोसा उतना ही मजबूत
पीएम मोदी ने शताब्दी समारोह में कहा- आज का यह दिन यूपीएससी के 100 वर्षों के साथ एक विरासत का भी उत्सव है। यह उस उम्मीद का उत्सव है जिसे हर साल लाखों युवा जीते हैं। यह उस भरोसे का उत्सव है जो हर भारतीय इस संस्था पर करता है। इस 100 साल के सफर की याद में एक डाक टिकट और एक सिक्क ा भी जारी किया गया। ‘100 लैंडमार्क जजमेंट्स – शेपिंग द पॉलिसीज ऑफ यूपीएससी एंड पब्लिक सर्विस कमीशन्स इन इंडिया’ का विमोचन भी पीएम मोदी ने किया। पीएम बोले कि मैं इस 100 साल के सफर से जुड़े सभी खास लोगों को नमन करता हूं और आप सभी को शुभकामनाएं देता हूं।
भारत का भविष्य इंतजार कर रहा
पीएम मोदी ने कहा- हम सब के सामने भारत का भविष्य इंतजार कर रहा है। 21वीं सदी का एक क्वार्टर बीत चुका है। आने वाले 20-25 वर्ष भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। विकसित भारत के लिए देश को जिस तरह का नेतृत्व चाहिए उसका बहुत बड़ा माध्यम यूपीएससी और राज्यों के चयन आयोग भी हैं। हमें राष्ट्र प्रथम और नागरिक प्रथम का ध्यान रखना है। आज के दौर में हमारा मंत्र है नागरिक देवो भव।
तकनीक बहुत तेजी से बदल रही
पीएम मोदी ने कहा- एआई हजारों की संख्या में डॉक्यूमेंट्स को कुछ ही पल में प्रोसेस कर सकता है। ये बदलती हुई सोच हमारी सिविल सर्विसेज से भी नए बदलाव की मांग करती है। आज 21वीं सदी का भारत नए वर्क कल्चर के साथ आगे बढ़ रहा है। आज युग और तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है। इसके बाद आने वाले समय में नई तरह की चुनौती समाज के सामने आ रही है। इस समय एआई को लेकर समाज में चर्चा छिड़ी हुई है।
पीएम मोदी ने कहा- आप सभी को हमेशा याद रखना है कि आपका काम युवा शक्ति के भविष्य से जुड़ा हुआ है। युवा शक्ति से राष्ट्र शक्ति के मिशन का आप एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। जब यूपीएससी का गठन हुआ था तब बड़े शहरों के बड़े घर के बच्चों को इसका अवसर मिलता था। आज गांव और कस्बों के युवा भी इसमें पहुंच रहे हैं। हमारी बेटियों की भागीदारी भी इसमें बढ़ रही है। यूपीएससी के पूरे इतिहास में 4 महिला चेयरपर्सन रही हैं और उनमें से 3 चेयरपर्सन 2014 के बाद बनी हैं।
1926 में हुई थी यूपीएससी की स्थापना
यूपीएससी की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। इस आयोग ने देश में सरकारी सेवाओं के लिए योग्य उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आजादी के बाद भारतीय संविधान के तहत इसे संवैधानिक संस्था का दर्जा मिला। आयोग का प्रमुख कार्य केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं और पदों के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित करना है। सिविल सेवा परीक्षा भी यूपीएससी की प्रमुख परीक्षाओं में शामिल है। इसके माध्यम से आईएएस, आईपीएस और भारतीय विदेश सेवा सहित कई सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है।














