पन्ना। देशभर के वन्यजीव, प्रकृति प्रेमियों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। देश के सभी टाइगर रिजर्व नए पर्यटन सत्र के लिए खुल गए हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व में भी मंडला और हिनौता गेट से पर्यटकों को प्रवेश दिया गया। पहले दिन गाइड, जिप्सी चालक और सैलानियों का फूलमालाओं से स्वागत हुआ। सफारी शुरू होते ही पर्यटकों में खासा उत्साह नजर आया। बाघों के साथ तेंदुआ, भालू, चीतल, हिरण, बारहसिंघा, हाथी और अन्य वन्यजीवों के दीदार की उम्मीद पर्यटकों को पन्ना टाइगर रिजर्व खींच रही है।
पखवाड़े की शुरुआत से ही पन्ना टाइगर रिजर्व का नया पर्यटन सत्र शुरू हो गया। मंडला गेट पर पर्यटकों के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गईं। फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र श्रीवास्तव और डिप्टी डायरेक्टर बी.के. पटेल की मौजूदगी में गेट को फूलों से सजाया गया था। जहां फीता काटकर गेट खोले गए और फिर गाइड जिप्सी चालक व सैलानियों का फूलमालाओं से स्वागत किया गया। इसके बाद जिप्सियों को हरी झंडी दिखाकर गेट से प्रवेश देकर सफारी के लिए रवाना किया गया। पहले दिन ही पर्यटकों में जंगल सफारी और वन्यजीवों के दीदार को लेकर खासा उत्साह नजर आया।
पिछली बार 8 करोड़ रुपये से अधिक का आया राजस्व
अधिकारियों को इस पर्यटन सत्र में भी बेहतर पर्यटक संख्या और राजस्व की उम्मीद है। पिछले पर्यटन वर्ष में पन्ना टाइगर रिजर्व को पर्यटकों से 8 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ था। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ तेंदुआ, हिरण, भालू, बारहसिंघा, हाथी और कई अन्य वन्य जीव पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। घने जंगल, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों की मौजूदगी के चलते देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं और पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या से साइटिंग भी अच्छी होती है।
बाघ संरक्षण की कहानी
पन्ना कभी बाघों की संख्या में भारी गिरावट के कारण चर्चा में आया था। इसके बाद यहां बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम चलाया गया। दूसरे टाइगर रिजर्व से बाघ और बाघिन लाकर पन्ना में बसाए गए। इसके बाद बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई और पन्ना को बाघ संरक्षण की सफल कहानियों में शामिल किया जाने लगा।

3 महीने बाद खुले रणथंभौर के दरवाजे
पहले दिन ही जंगल सफारी के लिए उमड़ पड़े पर्यटक
रणथंभौर। राजस्थान में तीन महीने बाद रणथंभौर नेशनल पार्क के द्वार पर्यटकों के लिए खुल गए। पहले दिन गणेश धाम मुख्य द्वार पर तिलकमाला से राजस्थानी अंदाज में स्वागत हुआ। रंगोली से सजा मुख्य प्रवेश द्वार और लोक कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कलेक्टर व वन अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर पर्यटक वाहनों को रवाना किया। पहली पारी में सैकड़ों देशी-विदेशी पर्यटक जंगल सफारी के लिए रणथंभौर पहुंचे।
तीन महीने से रणथंभौर नेशनल पार्क के दरवाजे पर्यटकों के लिए बंद थे। जंगल में सन्नाटा था और पर्यटक इंतजार कर रहे थे कि आखिर कब फिर से सफारी शुरू होगी। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में वो इंतजार खत्म हुआ। रणथंभौर के दरवाजे खुले तो पहले ही दिन माहौल किसी त्योहार जैसा नजर आया। सवाई माधोपुर के गणेश धाम स्थित मुख्य प्रवेश द्वार पर पर्यटकों का राजस्थानी अंदाज में स्वागत किया गया। कहीं तिलक लगाया जा रहा था, कहीं माला पहनाई जा रही थी और कहीं लोक कलाकार राजस्थानी नृत्य की प्रस्तुति दे रहे थे।
गाजे-बाजे और लोक संगीत के बीच सफारी वाहन जंगल की ओर रवाना हुए। मतलब तीन महीने बाद जंगल खुला तो स्वागत भी उसी अंदाज में हुआ, जिसके लिए राजस्थान जाना जाता है। गणेश धाम पर रंगोली बनाई गई थी। लोक कलाकारों ने राजस्थानी लोक नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। वन विभाग की टीम ने देशी और विदेशी पर्यटकों का पारंपरिक तरीके से अभिनंदन किया। इसके बाद अधिकारियों ने पर्यटक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रणथंभौर की सफारी के लिए रवाना किया।
इस मौके पर सवाई माधोपुर के जिला कलेक्टर कानाराम, रणथंभौर के मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह, उपवन संरक्षक मानस सिंह और उपवन संरक्षक पर्यटन संजीव शर्मा मौजूद रहे। वन विभाग के मुताबिक, पहले ही दिन सैकड़ों की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक रणथंभौर पहुंचे। बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी जंगल सफारी के लिए पहुंचे। लंबे अंतराल के बाद सफारी शुरू से पर्यटकों में खासा उत्साह नजर आया।














