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आजादी से विकसित देश तक, नए भारत का संकल्प

पीएम मोदी ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ से दिया विकसित भारत का आर्थिक ब्लूप्रिंट

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 24, 2026
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पीएम मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ बयान: विपक्ष की प्रतिक्रिया और वैचारिक बहस

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करते हुए आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीते 12 वर्षों में स्वतंत्रता दिवस का उत्सव देश की विकास यात्रा का उत्सव भी बन गया है। लक्ष्य स्पष्ट है- 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत विश्व के अग्रणी विकसित देशों के साथ खड़ा हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वें और 75 मिनट के अपने संबोधन में स्वतंत्रता से ‘विकसित भारत 2047’ तक नए भारत के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन पेश किया जिसमें युवाओं के लिए एआई कौशल और वैचारिक खतरों से आगाह करने जैसे महत्वपूर्ण संदेश शामिल रहे।

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प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन मुख्य रूप से देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और भविष्य की प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर केंद्रित था। इसके अलावा, पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय गान से पहले पूर्ण ‘वंदे मातरम्’ का गूंजना इस भाषण का एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहलू रहा।

PM Modi Independence Day Speech 2026: 'सप्तधारा' विजन, AI स्किलिंग और विकसित भारत 2047 का रोडमैप

भारत के संदर्भ में निहितार्थ

1. युवा शक्ति और जेन-जी पर फोकस
भाषण का सबसे बड़ा सामाजिक निहितार्थ युवाओं से जुड़ा था। बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बदलावों के बीच, पीएम मोदी ने अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई कौशल का प्रशिक्षण देने और गरीब तथा मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की।

यह कदम आधुनिक श्रम बाजार की मांग के अनुरूप युवाओं को तैयार करने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत प्रयास है।

2. आर्थिक राष्ट्रवाद और बड़े वैश्विक लक्ष्य

भारत के ‘फ्रेजाइल फाइव’ से निकलकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होने का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब देश को छोटे सपनों से आगे देखना होगा।

उनका यह आह्वान कि आने वाले दशक में कम से कम 50 भारतीय कंपनियां ‘फॉर्च्यून 500’ की सूची में शामिल हों, भारतीय कॉरपोरेट जगत को वैश्विक स्तर पर सिरमौर बनने की चुनौती और प्रेरणा देता है।

3. आंतरिक सुरक्षा और ‘दिमागी नक्सलवादी’ चेतावनी

सशस्त्र वामपंथी उग्रवाद के खात्मे की बात कहते हुए प्रधानमंत्री ने समाज में वैचारिक स्तर पर सक्रिय रहने वाले तत्वों यानी ‘दिमागी नक्सलों’ से सतर्क रहने की चेतावनी दी। आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में इसका निहितार्थ यह है कि सरकार अब वैचारिक और बौद्धिक स्तर पर राष्ट्र-विरोधी या भ्रामक प्रवृत्तियों को भी देश की प्रगति में एक गंभीर चुनौती मानती है।

4. वैश्विक महत्वाकांक्षाएं और वर्ष 2047 का लक्ष्य

वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के तहत परमाणु ऊर्जा (100 गीगावाट का लक्ष्य) और अंतरिक्ष व सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य तय किए गए हैं। साथ ही, भारत द्वारा 2036 के ओलंपिक की मेजबानी के लिए मजबूत दावेदारी पेश करने की बात खेल संस्कृति को राष्ट्रीय अस्मिता और युवा ऊर्जा से जोड़ने का प्रयास दर्शाती है।

कुल मिला कर पीएम मोदी का यह भाषण महज आंकड़ों और उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं था, बल्कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब बनाने का घोषणापत्र था। इसका निहितार्थ स्पष्ट है कि भारत अब वैश्विक झटकों को झेलने के साथ-साथ डिजिटल और हरित क्रांति के बल पर दुनिया का नेतृत्व करने की आकांक्षा रखता है।

80 वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने लगातार 13वीं बार लाल किले से भाषण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ और तिरंगे के जिक्र से की। उन्होंने कहा कि आज हर दिल में वंदे मातरम गूंज रहा है, हर घर में तिरंगा है और हर मन में तिरंगा बस गया है। देश नए संकल्पों और उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है।

पीएम ने महात्मा गांधी सहित सभी स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को नमन किया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान किया। पीएम के भाषण का सबसे बड़ा संदेश बड़े सपने देखने का था। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं, क्षितिज को चौड़ा करते हैं और प्रगति की गति बढ़ाते हैं। जब संकल्प दृढ़ होता है तो संभावनाएं खुद रास्ता बना लेती हैं।

क्या है ‘सप्तधारा’ विजन

1-विनिर्माण (मैन्यूफैक्चरिंग): देश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन को बढ़ावा देना।

2-कृषि और खाद्य प्रसंस्करण: आधुनिक कृषि पद्धतियों और मूल्यवर्धन पर जोर।

3-तकनीक और इनोवेशन: एआई, रोबोटिक्स और डेटा केंद्रों का विस्तार।

4-गतिशक्ति: आधुनिक बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स का सुदृढ़ीकरण।

5-रक्षा शक्ति: रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता।

6-ग्रीन और ब्लू इकॉनमी: हरित ऊर्जा और गहरे समुद्र (डीप-सी) के संसाधनों का सतत उपयोग।

7-सॉफ्ट पावर: वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक और कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाना।

स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लाल किले से गूंजा ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण

इस बार आजादी का दिन काफी खास रहा क्योंकि 15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण बजाया गया जो देश के आधिकारिक राष्ट्रीय समारोहों में एक ऐतिहासिक क्षण था। कार्यक्रम की शुरुआत में राष्ट्रीय गीत गाया गया और उसके बाद राष्ट्रगान हुआ। राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित किया। वंदे मातरम् का गायन आज ऐसे समय में हुआ है जब भारत ‘वंदे मातरम्’ की 150 साल पुरानी विरासत का जश्न मना रहा है।

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