नई दिल्ली। दफ्तर की भागदौड़ हो या चाय की टपरी, पेपर कप में गर्म चाय-कॉफी पीना रोजमर्रा का हिस्सा है। प्लास्टिक कप के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाले इन कपों को पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है, लेकिन नई रिसर्च ने इनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। पेपर कप की अंदरूनी प्लास्टिक लाइनिंग गर्म पेय के संपर्क में आने पर बेहद छोटे नैनोप्लास्टिक कण छोड़ सकती है। क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पीएलए और पीई लाइनिंग वाले पेपर कप की जांच की गई। गर्म तरल के संपर्क में पीएलए लाइनिंग वाले कप से करीब 43 लाख नैनोप्लास्टिक कण प्रति मिलीलीटर और पीई लाइनिंग वाले कप से करीब 27 लाख कण प्रति मिलीलीटर पाए गए। पीएलए कप से निकलने वाले प्लास्टिक का कुल द्रव्यमान पीई कप से 12 गुना अधिक था। ज्यादातर पेपर कपों में पॉलीएथिलीन या पीएलए की पतली परत होती है।
शरीर पर असर को लेकर चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञ प्रीति महेश के मुताबिक, नैनोप्लास्टिक के छोटे आकार के कारण इनके शरीर में पहुंचने की चिंता है। सूजन, ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और कोशिकीय क्षति जैसे संभावित प्रभाव सामने आए है। हालांकि, इनके कारण किसी बीमारी की सीधी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
स्टील-कांच बेहतर विकल्प
सीएसई के सिद्धार्थ घनश्याम सिंह के मुताबिक, स्टील, कांच या सिरेमिक के बार-बार इस्तेमाल होने वाले कप बेहतर विकल्प है। कुल्हड़ भी इस्तेमाल हो सकते हैं।
प्लास्टिक कचरा भी चुनौती
प्लास्टिक वेस्ट एक्सपर्ट स्वाति आर्या के मुताबिक, अंदर प्लास्टिक की परत होने के कारण पेपर कप प्लास्टिक कचरे की समस्या का पूरी तरह समाधान नही है।
पहले भी उठे सवाल
2020 की आईआईटी खड़गपुर की स्टडी में गर्म तरल को पेपर कप में रखने पर माइक्रोप्लास्टिक कण निकलने की बात सामने आई थी।














